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भारत में Satellite Internet की जंग तेज! Starlink, Jio और OneWeb की लॉन्चिंग पर टिकी नजरें

भारत में Starlink, Reliance Jio और OneWeb की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी जैसी प्रक्रियाओं पर निर्भर है। इन सेवाओं से दूरदराज के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, लॉन्च की तारीख और अंतिम शुल्क व्यवस्था को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

Neha Sharma12 अक्टू. 2026, 04:20 PM IST
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भारत में Satellite Internet की जंग तेज! Starlink, Jio और OneWeb की लॉन्चिंग पर टिकी नजरें

नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर Starlink, Reliance Jio Satellite Communications और Bharti समूह समर्थित Eutelsat OneWeb की नजरें सरकारी मंजूरी पर टिकी हैं। तीनों कंपनियों को आवश्यक लाइसेंस मिल चुके हैं, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन और अंतिम सुरक्षा मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं अभी पूरी होनी बाकी हैं।


क्या है पूरा मामला?

सैटेलाइट इंटरनेट ऐसी तकनीक है, जिसमें अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाती है। इसके जरिए उन क्षेत्रों में भी इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ऑप्टिकल फाइबर की सुविधा सीमित है। इस क्षेत्र में एलन मस्क की कंपनी SpaceX की Starlink, Reliance Jio की सैटेलाइट इंटरनेट इकाई और Bharti समूह समर्थित Eutelsat OneWeb सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, भारत में इन सेवाओं को शुरू करने से पहले कंपनियों को दूरसंचार विभाग (DoT) और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।


स्पेक्ट्रम आवंटन क्यों है महत्वपूर्ण?

सैटेलाइट इंटरनेट के लिए स्पेक्ट्रम यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी की जरूरत होती है, जिसके माध्यम से उपग्रहों और जमीन पर मौजूद उपकरणों के बीच संचार होता है। 12 अक्टूबर को प्रकाशित एक उद्योग रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार विभाग सैटेलाइट संचार सेवाओं के स्पेक्ट्रम शुल्क को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है।


रिपोर्ट में 5 प्रतिशत समायोजित सकल राजस्व (AGR) के स्पेक्ट्रम शुल्क का प्रस्ताव बताया गया है। सरकार द्वारा अधिसूचित दूरदराज, पहाड़ी, द्वीपीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में यह दर 4 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव अंतिम सरकारी निर्णय के समान नहीं है। मंत्रिमंडल की मंजूरी और आगे की नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही शुल्क की अंतिम व्यवस्था स्पष्ट होगी।


सुरक्षा मंजूरी क्यों जरूरी है?

सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क में डेटा का प्रवाह कई देशों और ग्राउंड स्टेशनों से होकर गुजर सकता है। इसलिए भारत सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नेटवर्क भारतीय कानूनों, डेटा सुरक्षा आवश्यकताओं और वैध निगरानी संबंधी नियमों का पालन करे। इसी कारण कंपनियों को संबंधित सुरक्षा मानकों और तकनीकी शर्तों का अनुपालन करना आवश्यक है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में कहा कि Starlink, Jio और OneWeb को समान नियामकीय प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार ने किसी एक कंपनी को विशेष लाभ देने के आरोपों को खारिज किया है।


एलन मस्क और भारत में प्रतिस्पर्धा

Starlink के संस्थापक एलन मस्क ने भारत में सेवा शुरू करने में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी के प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं। दूसरी ओर, भारत सरकार का कहना है कि तीनों लाइसेंस प्राप्त कंपनियां व्यापक रूप से समान नियामकीय चरण में हैं और सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। मस्क के आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से निर्णायक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।


यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में से एक है और यहां मोबाइल डेटा की कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे बाजार में सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए कीमत, नेटवर्क क्षमता और सेवा की उपलब्धता महत्वपूर्ण कारक होंगे।


आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?

  1. दूरदराज के गांवों और पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाना।

  2. आपदा या प्राकृतिक संकट के दौरान वैकल्पिक संचार सुविधा उपलब्ध कराना।

  3. समुद्री क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और दूरस्थ कार्यस्थलों पर कनेक्टिविटी में मदद करना।

  4. इंटरनेट सेवा के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना।

हालांकि, सैटेलाइट इंटरनेट की वास्तविक उपयोगिता इसकी कीमत, उपकरणों की लागत, मौसम और नेटवर्क क्षमता पर भी निर्भर करेगी। 12 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की व्यावसायिक शुरुआत के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क और सुरक्षा मंजूरी महत्वपूर्ण लंबित चरण हैं। Starlink, Jio और OneWeb के लिए अगला कदम इन आवश्यकताओं को पूरा करना और अंतिम सरकारी स्वीकृतियां प्राप्त करना होगा।