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AI Drug Discovery: कैंसर से बाल झड़ने तक, AI से दवा बनाने के लिए सरकार का ₹86 करोड़ का दांव

भारत सरकार ने AI आधारित दवा अनुसंधान के लिए Peptris Technologies को ₹86 करोड़ की सहायता देने का समझौता किया है। तीन साल की VIGOR परियोजना में चार संभावित दवाओं को आगे विकसित करने पर काम होगा।

Neha Sharma12 अक्टू. 2026, 04:20 PM IST
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AI Drug Discovery: कैंसर से बाल झड़ने तक, AI से दवा बनाने के लिए सरकार का ₹86 करोड़ का दांव

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नई दवाओं के विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत आने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने बेंगलुरु की कंपनी Peptris Technologies Private Limited के साथ ₹86 करोड़ की वित्तीय सहायता के लिए समझौता किया है। इस राशि का उपयोग AI की मदद से खोजे गए चार संभावित दवा उम्मीदवारों को आगे के विकास और क्लिनिकल परीक्षण की तैयारी तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा। 


₹172 करोड़ की है पूरी परियोजना

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस परियोजना का नाम VIGOR (Advancing AI-Discovered Molecules from Bench to Clinic) रखा गया है। परियोजना की कुल लागत ₹172 करोड़ है, जिसमें सरकार की ओर से ₹86 करोड़ की सहायता दी जाएगी। यह वित्तीय सहायता Optionally Convertible Debt यानी ऐसी ऋण व्यवस्था के माध्यम से दी जाएगी, जिसे निर्धारित शर्तों के तहत इक्विटी में बदला जा सकता है। इस परियोजना का उद्देश्य AI से खोजे गए संभावित दवा अणुओं को प्रयोगशाला स्तर के शोध से आगे बढ़ाकर ऐसे विकास चरण तक पहुंचाना है, जहां वे क्लिनिकल परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ सकें।


किन बीमारियों के लिए विकसित होंगी संभावित दवाएं?

  • PEPR111: न्यूरोमस्कुलर विकारों और कैंसर से संबंधित उपचार पर केंद्रित।

  • PEPRX101: एलोपेसिया यानी बाल झड़ने से जुड़ी बीमारी के लिए।

  • PEPR202: न्यूरोपैथी यानी नसों से संबंधित विकारों के लिए।

  • PEPR112: ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD), एक आनुवंशिक मांसपेशी रोग, के लिए।

ये सभी अभी विकास के प्रारंभिक चरण में हैं। परियोजना के तहत इन्हें टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL)-4 से TRL-6 तक आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उन्नत प्रीक्लिनिकल अध्ययन, दवा निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं और क्लिनिकल परीक्षण की तैयारी की जाएगी। 


दवा बनाने में AI की क्या भूमिका होगी?

पारंपरिक तरीके से नई दवा विकसित करने में लंबे समय तक शोध, प्रयोग और परीक्षण की आवश्यकता होती है। AI आधारित तकनीक बड़ी मात्रा में वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण करके संभावित दवा अणुओं की पहचान करने और उनके गुणों का अनुमान लगाने में मदद कर सकती है।


हालांकि, AI द्वारा किसी संभावित दवा की पहचान कर लेना उसके प्रभावी या सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं है। इसके लिए प्रयोगशाला में परीक्षण, प्रीक्लिनिकल अध्ययन और नियामकीय मंजूरी के बाद मानव क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होते हैं। VIGOR परियोजना इसी अंतर को कम करने का प्रयास करेगी, ताकि कंप्यूटेशनल शोध से प्राप्त संभावित दवा उम्मीदवारों को वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए आगे बढ़ाया जा सके। 


भारत के फार्मा और AI सेक्टर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

यह पहल भारत में AI, बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल रिसर्च के बीच सहयोग को बढ़ावा दे सकती है। इससे संभावित रूप से नई दवाओं के विकास, अनुसंधान क्षमता और घरेलू हेल्थकेयर नवाचार को समर्थन मिलेगा।

सरकार की इस सहायता का उद्देश्य केवल AI से दवाओं की खोज करना नहीं, बल्कि उन संभावित खोजों को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित करके आगे के विकास के योग्य बनाना भी है।


आगे क्या होगा?

सरकारी योजना के अनुसार, यह परियोजना तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। इस दौरान चारों दवा उम्मीदवारों पर प्रीक्लिनिकल अध्ययन, सत्यापन, फॉर्मूलेशन विकास और क्लिनिकल परीक्षण की तैयारी से जुड़े कार्य किए जाएंगे। वास्तविक प्रगति वैज्ञानिक परिणामों और आवश्यक नियामकीय अनुमतियों पर निर्भर करेगी।केंद्र सरकार की ₹86 करोड़ की यह सहायता भारत में AI आधारित दवा अनुसंधान को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि, इन संभावित दवाओं के मरीजों तक पहुंचने से पहले कई वैज्ञानिक परीक्षण और नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।