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13 अक्टूबर को मिज़ोरम विश्वविद्यालय में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने छात्रों से किया संवाद
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिज़ोरम विश्वविद्यालय में छात्रों से बातचीत की। उन्होंने उत्तर-पूर्व की संस्कृति, विकास और देश की एकता पर जोर दिया। ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम’ का उद्देश्य अलग-अलग राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति समझने का मौका देना और ‘विकसित भारत 2047’ में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

नई दिल्ली: केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास (DoNER) मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मिज़ोरम के दो दिवसीय दौरे के दौरान मिज़ोरम विश्वविद्यालय में छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर-पूर्वी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मंत्री ने उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय के ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम’ के अंतर्गत उत्तर-पूर्व का दौरा कर रहे गोवा और चंडीगढ़ के विद्यार्थियों से भी बातचीत की। उन्होंने विद्यार्थियों के अनुभवों और विचारों को सुना तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच आपसी समझ और सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।
उत्तर-पूर्व की संस्कृति और विकास पर जोर
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम युवाओं को उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विविधता, परंपराओं और विकास के अवसरों को करीब से समझने का मौका देते हैं। इससे राष्ट्रीय एकता, आपसी सहयोग और विभिन्न राज्यों के बीच संबंधों को मजबूत करने में मदद मिलती है।
क्या है अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम?
अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की एक पहल है। इसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों के विद्यार्थियों को उत्तर-पूर्व के राज्यों की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक जीवन और विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है। सरकारी जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में इस कार्यक्रम के तहत 590 से अधिक विद्यार्थी भाग ले चुके हैं। इससे उत्तर-पूर्व और देश के अन्य हिस्सों के युवाओं के बीच संपर्क और समझ बढ़ाने में सहायता मिली है।
विकसित भारत 2047 में उत्तर-पूर्व की भूमिका
मंत्री ने इस पहल को ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए युवाओं की भागीदारी, भारत की सांस्कृतिक विविधता और उत्तर-पूर्वी राज्यों की विकास यात्रा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान देश के अधिक एकीकृत और विकसित भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकता है। यह संवाद युवाओं को राष्ट्रीय विकास में भागीदारी के लिए प्रेरित करने और देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
