health

मरीजों के लिए बड़ी खबर! अस्पतालों में इलाज का खर्च दिखाने पर केंद्र सरकार का जोर

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों में इलाज की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित कराने को कहा है। इससे मरीजों को इलाज के खर्च की जानकारी पहले से मिल सकेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। विदेशी मरीजों के लिए भी इलाज के पैकेज की दरें प्रदर्शित करने पर जोर दिया गया है।

Neha Sharma13 अक्टू. 2026, 03:09 PM IST
खबर शेयर करें:
मरीजों के लिए बड़ी खबर! अस्पतालों में इलाज का खर्च दिखाने पर केंद्र सरकार का जोर

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराने को कहा है। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज के खर्च की जानकारी देना, स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और बिल को लेकर होने वाले विवादों को कम करना है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संबंधित नियमों के पालन की समीक्षा करने और जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।


अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में दिखानी होंगी दरें

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और इससे जुड़े नियमों के तहत, जहां यह कानून लागू है, स्वास्थ्य संस्थानों को अपनी सेवाओं और सुविधाओं की दरें ऐसी जगह प्रदर्शित करनी होती हैं, जहां मरीज और उनके परिजन उन्हें आसानी से देख सकें। यह जानकारी अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में उपलब्ध होनी चाहिए। अन्य राज्यों में संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नियम लागू होते हैं।


मरीजों को कैसे होगा फायदा?

इलाज की दरें स्पष्ट रूप से दिखाई देने से मरीजों और उनके परिवारों को संभावित खर्च का अनुमान लगाने और सोच-समझकर इलाज का विकल्प चुनने में मदद मिलेगी। इससे बिलिंग को लेकर भ्रम और विवाद भी कम हो सकते हैं। हालांकि, जांच, दवाओं, अस्पताल में रहने की अवधि और मरीज की स्थिति के अनुसार अंतिम बिल अलग हो सकता है।


विदेशी मरीजों के लिए भी पैकेज दरों पर जोर

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए इलाज के पैकेज की दरें भी प्रमुखता से प्रदर्शित कराने को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया है। इससे विदेशी मरीजों को इलाज के खर्च की जानकारी पहले से मिल सकेगी और भारत में चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए इन नियमों को लागू कराने और उनका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है।