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Yamuna Pollution: गंदे नालों और सीवेज से बिगड़ रही यमुना की हालत

मानसून की बारिश के बावजूद दिल्ली में यमुना नदी के कई हिस्सों में प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। सितंबर 2026 के आंकड़ों में कुछ निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिले हैं। सीवेज, गंदे नालों और औद्योगिक अपशिष्ट को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।

Neha Sharma13 अक्टू. 2026, 03:09 PM IST
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Yamuna Pollution: गंदे नालों और सीवेज से बिगड़ रही यमुना की हालत

नई दिल्ली: यमुना नदी में प्रदूषण की समस्या एक बार फिर चिंता बढ़ा रही है। मानसून के दौरान अच्छी बारिश होने के बावजूद दिल्ली में नदी के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में यमुना के कई निगरानी केंद्रों पर पिछले साल के मुकाबले प्रदूषण का स्तर अधिक दर्ज किया गया। इससे साफ है कि केवल बारिश से नदी को साफ रखना संभव नहीं है। 


बारिश के बाद भी नहीं सुधरी यमुना की हालत

आमतौर पर मानसून के दौरान नदी में पानी का बहाव बढ़ने से प्रदूषकों की सांद्रता कम हो सकती है। लेकिन इस बार दिल्ली में यमुना के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में लिए गए पानी के नमूनों में जैविक और रासायनिक प्रदूषण के संकेत पिछले साल की तुलना में अधिक पाए गए।

हालांकि, नदी की स्थिति हर जगह एक जैसी नहीं रही। अगस्त में मानसून के बढ़े हुए बहाव के कारण कुछ स्थानों पर पानी की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कई जगह प्रदूषण निर्धारित मानकों से अधिक बना रहा। 


ISBT और ITO के पास प्रदूषण में बढ़ोतरी

रिपोर्ट में दिल्ली के अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी सामने आई है। ISBT ब्रिज पर 7 सितंबर 2026 को लिए गए नमूने में जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) 30 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि पिछले साल सितंबर में यह 8 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। इसी तरह, रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) 44 से बढ़कर 92 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई। ITO ब्रिज पर भी BOD का स्तर पिछले साल के 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 18 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि नदी के कुछ हिस्सों में प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। 

सीवेज और गंदे नाले बड़ी वजह

यमुना में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में बिना उपचार वाला सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों से आने वाला गंदा पानी शामिल हैं। दिल्ली में कई नालों के जरिए प्रदूषित पानी नदी तक पहुंचता है। इसके अलावा, नदी के किनारे कचरा फेंकना और अपशिष्ट प्रबंधन की कमियां भी समस्या को बढ़ाती हैं।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और अन्य एजेंसियों की निगरानी से जुड़े निष्कर्षों में भी नालों से आने वाले अनुपचारित या आंशिक रूप से उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को प्रदूषण का महत्वपूर्ण स्रोत बताया गया है। जब तक इन स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक नदी की सफाई की कोशिशों का पूरा असर दिखाई देना मुश्किल है। 


नदी की सफाई के लिए क्या जरूरी है?

यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता और कामकाज में सुधार करना जरूरी है। साथ ही, नालों में बहने वाले गंदे पानी का उचित उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी और नदी के किनारे जमा कचरे को हटाने जैसे कदम लगातार उठाने होंगे। इसके अलावा, संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल और नियमित जल गुणवत्ता जांच भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी की सफाई केवल कुछ दिनों के अभियान से संभव नहीं है; इसके लिए प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार कार्रवाई करनी होगी।


यमुना की हालत बनी चिंता का विषय

यमुना दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण नदी है, लेकिन प्रदूषण के कारण इसकी जल गुणवत्ता लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। मानसून का पानी कुछ स्थानों पर प्रदूषण को पतला कर सकता है, लेकिन इससे गंदगी के मूल स्रोत खत्म नहीं होते।