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पुणे में मराठी अभिनेत्री मधु कांबीकर का निधन, 73 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
मराठी सिनेमा और लोककला की दिग्गज अभिनेत्री एवं लावणी कलाकार मधु कांबीकर का 12 अक्टूबर को 73 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पुणे में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके निधन पर शोक जताते हुए मराठी सिनेमा, रंगमंच, टेलीविजन और लावणी में उनके योगदान को याद किया।

मराठी सिनेमा और महाराष्ट्र की लोककला की दिग्गज अभिनेत्री एवं लावणी कलाकार मधु कांबीकर का 12 अक्टूबर को 73 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पुणे में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थीं। उनके निधन से मराठी मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। मधु कांबीकर ने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में फिल्मों, रंगमंच और टेलीविजन पर अपनी खास पहचान बनाई। मधु कांबीकर 27 नवंबर 2016 को मुंबई के माटुंगा स्थित यशवंत नाट्य मंदिर में एक ‘लावण्य संगीत’ कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुति देते समय अचानक बेहोश होकर गिर गई थीं। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर स्ट्रोक आया था। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण वह लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहीं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मधु कांबीकर के निधन पर शोक जताते हुए मराठी सिनेमा, रंगमंच और टेलीविजन में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने ‘हेच माझं माहेर’, ‘रघुमैना’, ‘एक होता विदूषक’, ‘झपाटलेला’, ‘देबू’ और ‘येऊ का घरात’ जैसी फिल्मों में उनके काम की सराहना की। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने भी उनके निधन पर दुख जताया। मधु कांबीकर को फिल्म ‘शापित’ से खास पहचान मिली। इसके अलावा ‘एक होता विदूषक’ और ‘झपाटलेला’ जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय को याद किया जाता है। वह अपने सहज अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए जानी जाती थीं। अभिनय के साथ-साथ मधु कांबीकर ने महाराष्ट्र की पारंपरिक लोककला लावणी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए ग्रामीण जीवन और लोकपरंपराओं को दर्शकों तक पहुंचाया। उनके निधन से मराठी सिनेमा और लोककला की दुनिया ने एक अनुभवी कलाकार को खो दिया है। उनकी कला और योगदान लंबे समय तक याद किए जाएंगे।
