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नासिक के पानी के नमूने में कैंसरकारी Hexavalent Chromium की मात्रा निर्धारित सीमा से 1,000 गुना से ज्यादा!
नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास पानी के नमूने में हेक्सावेलेंट क्रोमियम 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जबकि पेयजल के लिए निर्धारित सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर है। रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने 15 औद्योगिक इकाइयों को बंदी के नोटिस दिए या सील किया है। 2027 के सिंहस्थ कुंभ से पहले भूजल और नदी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

नासिक: 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले महाराष्ट्र के नासिक में पानी के प्रदूषण का गंभीर मामला सामने आया है। अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास पानी के नमूने की प्रयोगशाला जांच में कैंसरकारी रसायन हेक्सावेलेंट क्रोमियम (Hexavalent Chromium- हेक्सावेलेंट क्रोमियम (Cr⁶⁺) एक अत्यंत जहरीला रसायन है, जिसे कैंसरकारी माना जाता है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों सहित अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।) की मात्रा निर्धारित पेयजल सीमा से 1,000 गुना से अधिक पाई गई। इस खुलासे के बाद प्रशासन ने प्रदूषण फैलाने वाली संदिग्ध औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
निर्धारित सीमा से 1,000 गुना ज्यादा क्रोमियम
प्रयोगशाला रिपोर्ट के मुताबिक, पानी में कुल क्रोमियम की मात्रा 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर और हेक्सावेलेंट क्रोमियम की मात्रा 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पेयजल मानक में क्रोमियम की निर्धारित सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर बताई गई है। यह रसायन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
15 औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) की संयुक्त टीमों ने 15 औद्योगिक इकाइयों को बंदी के नोटिस दिए या सील किया। जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने प्रदूषण के स्रोत की पहचान कर उसे रोकने के लिए कार्रवाई की पुष्टि की। प्रशासन को औद्योगिक अपशिष्ट के निपटान और जल निकासी व्यवस्था की भी जांच करनी है।
नंदिनी से गोदावरी तक प्रदूषण की आशंका
नंदिनी नदी गोदावरी में मिलती है। औद्योगिक नालों के जरिए प्रदूषण नदी तंत्र तक पहुंचने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, भूजल में मिले प्रदूषण की मात्रा को सीधे गोदावरी नदी के पानी की मात्रा मानना सही नहीं होगा। नदी में प्रदूषण का स्तर और उसका फैलाव जानने के लिए अलग-अलग स्थानों से जांच जरूरी है।
कुंभ से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
कुंभ मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सुरक्षित पेयजल, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण और प्रभावित बस्तियों में स्वास्थ्य जांच प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिकारियों को प्रदूषण के वास्तविक स्रोत की पहचान कर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होगी, ताकि स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
