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नमामि गंगे योजना से गंगा की सफाई पर जोर, कारखानों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम

नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी को स्वच्छ बनाने और कारखानों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी आकलन के अनुसार, गंगा बेसिन में औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरण नियमों का पालन 2017 के 39% से बढ़कर 2025 में 86% हो गया। सरकार गंदे पानी के उपचार और प्रदूषण की निगरानी पर जोर दे रही है।

Neha Sharma14 अक्टू. 2026, 05:43 PM IST
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नमामि गंगे योजना से गंगा की सफाई पर जोर, कारखानों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम

नई दिल्ली: गंगा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी को नदियों में जाने से रोकना, औद्योगिक इकाइयों से पर्यावरण नियमों का पालन कराना और अपशिष्ट जल का उचित उपचार सुनिश्चित करना है।


सरकारी आकलन के अनुसार, गंगा बेसिन में अधिक प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के नियमों का पालन करने की दर 2017 में 39 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 86 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में इन उद्योगों से जुड़े जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) प्रदूषण भार में 72.46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।


नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच की जाती है। इस दौरान यह देखा जाता है कि कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उचित उपचार हो रहा है या नहीं और वे निर्धारित पर्यावरण मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों की पहचान कर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर जोर दिया जाता है।


औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) यानी साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इन संयंत्रों में औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ किया जाता है, ताकि हानिकारक पदार्थ नदियों तक न पहुंचें। सरकारी आकलन में गंगा और यमुना बेसिन के ऐसे संयंत्रों के संचालन और शोधन क्षमता की भी समीक्षा की गई है। इसके अलावा, उद्योगों में पानी की खपत कम करने, उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल करने और कम प्रदूषण वाली तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इन उपायों से जल संसाधनों की बचत करने और नदियों में प्रदूषण का स्तर कम करने में मदद मिल सकती है।


हालांकि, गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए औद्योगिक इकाइयों की लगातार निगरानी, अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों का बेहतर संचालन और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। नमामि गंगे योजना के तहत किए जा रहे प्रयासों का दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय कितनी प्रभावी ढंग से लागू किए जाते हैं।

कुल मिलाकर, गंगा बेसिन में औद्योगिक इकाइयों के नियमों के पालन में हुई बढ़ोतरी प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के लिए सकारात्मक संकेत है। इसके बावजूद, गंगा नदी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए सरकार, उद्योगों और स्थानीय प्रशासन के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है।