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हल्दी से साफ होगा कारखानों का गंदा पानी! वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

वैज्ञानिकों ने औद्योगिक गंदे पानी को साफ करने के लिए हल्दी के अर्क से बने जिंक ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स पर आधारित नई तकनीक विकसित की है। शोध में इस तकनीक ने पानी से मेथिलीन ब्लू रंग को 98.6% तक हटाया। यह तकनीक खासकर कपड़ा उद्योग के अपशिष्ट जल के उपचार में उपयोगी हो सकती है।

Neha Sharma14 अक्टू. 2026, 05:43 PM IST
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हल्दी से साफ होगा कारखानों का गंदा पानी! वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

नई दिल्ली: औद्योगिक गंदे पानी से प्रदूषण कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में हल्दी के अर्क से तैयार जिंक ऑक्साइड के नैनोपार्टिकल्स और बायोडिग्रेडेबल नैनोफाइबर का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य खासतौर पर कपड़ा उद्योग से निकलने वाले रंगों और रसायनों से प्रदूषित पानी को साफ करना है।


मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक पर शोध किया है। इसमें हल्दी के अर्क की मदद से जिंक ऑक्साइड के बेहद छोटे कण तैयार किए गए, जिन्हें पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) से बने नैनोफाइबर में शामिल किया गया। इससे एक ऐसी सामग्री तैयार हुई, जो प्रदूषित पानी में मौजूद रंगों को हटाने में मदद कर सकती है।


शोध के दौरान इस तकनीक ने मेथिलीन ब्लू रंग को 120 मिनट में 98.6 प्रतिशत और कॉन्गो रेड रंग को 96.7 प्रतिशत तक हटाने में सफलता हासिल की। वैज्ञानिकों ने प्रकाश और अल्ट्रासोनिक कंपन के संयुक्त इस्तेमाल से सफाई की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का प्रयास किया। इसके अलावा, मशीन लर्निंग की मदद से यह अनुमान लगाने की कोशिश की गई कि अलग-अलग परिस्थितियों में पानी की सफाई कितनी प्रभावी होगी।


कपड़ा उद्योग से निकलने वाले रंगीन अपशिष्ट जल का उचित उपचार नहीं होने पर नदियों और अन्य जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ सकता है। ऐसे में यह नई तकनीक औद्योगिक पानी के उपचार के लिए एक संभावित पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन सकती है। हालांकि, बड़े औद्योगिक संयंत्रों में इसके इस्तेमाल से पहले इसकी लागत, टिकाऊपन और वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावशीलता का परीक्षण करना जरूरी होगा। वैज्ञानिकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उपचार के बाद इस्तेमाल की गई सामग्री और बचे हुए प्रदूषकों का सुरक्षित निपटान किया जा सके। यह शोध औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए नई और टिकाऊ तकनीक विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।