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बांग्लादेश में खसरे का भीषण प्रकोप, 1,147 लोगों की मौत; बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है। अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में खसरे के हजारों पुष्ट मामले सामने आए हैं और बीमारी से संबंधित मौतों में छोटे बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। नियमित टीकाकरण में कमी और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच को संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।

Neha Sharma17 अक्टू. 2026, 05:36 PM IST
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बांग्लादेश में खसरे का भीषण प्रकोप, 1,147 लोगों की मौत; बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

ढाका, 17 अक्टूबर 2026। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मार्च के मध्य से 9 अक्टूबर 2026 तक देश में खसरे के लगभग 2.02 लाख संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से करीब 22 हजार मामलों की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई है। इस दौरान बीमारी से संबंधित 1,147 लोगों की मौत दर्ज की गई है। मृतकों में लगभग 94 प्रतिशत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित टीकाकरण में आई गिरावट, स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर पहुंच और टीकाकरण अभियान में छूट गए बच्चों की बड़ी संख्या ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय पर टीकाकरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो संक्रमण को नियंत्रित करना और मुश्किल हो सकता है।


टीकाकरण में गिरावट से बढ़ा संकट

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में राजनीतिक अस्थिरता और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण बांग्लादेश का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुआ। इसके चलते खसरे से बचाव के टीके की कवरेज में गिरावट दर्ज की गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, खसरे के प्रकोप को रोकने के लिए टीकाकरण का स्तर लगभग 95 प्रतिशत बनाए रखना जरूरी है। लेकिन बांग्लादेश में वर्ष 2025 के दौरान पहले टीके की कवरेज घटकर लगभग 90 प्रतिशत और दूसरे टीके की कवरेज 86 प्रतिशत रह गई थी।


आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू

बढ़ते संक्रमण को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने बच्चों के लिए आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाया। अप्रैल और मई में लगभग दो करोड़ बच्चों को टीका लगाया गया। हालांकि, बाद में सामने आया कि अभियान के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए थे।

सितंबर के अंत में सरकार ने एक नया अभियान शुरू किया, जिसके तहत पहले छूट गए लगभग 34 लाख बच्चों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, बच्चों का पंजीकरण न होना और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच अभियान के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।


छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

बांग्लादेश के उत्तर-पूर्वी सिलहट क्षेत्र में खसरे का प्रकोप विशेष रूप से गंभीर रहा है। यहां कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की समय पर पहुंच नहीं होने और टीकाकरण से वंचित रहने के कारण गरीब तथा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, नाक बहना और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना शामिल हैं। गंभीर मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। बच्चों का समय पर टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।


दूसरे देशों के लिए भी चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में फैला खसरा यह दर्शाता है कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में थोड़ी-सी गिरावट भी बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों ने सरकारों से टीकाकरण व्यवस्था मजबूत करने, छूटे हुए बच्चों की पहचान करने और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की अपील की है। बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण, प्रभावी निगरानी और समय पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।