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Crude Oil Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी, भारत पर पड़ सकता है असर

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने कीमतों को प्रभावित किया है।

Neha Sharma17 अक्टू. 2026, 05:36 PM IST
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Crude Oil Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी, भारत पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत शुक्रवार को कारोबार के दौरान 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने कीमतों को ऊपर धकेला है। मई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड इस स्तर पर पहुंचा है।


ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में तेजी

शुक्रवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा 3.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं, अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 3.5 प्रतिशत बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में लगभग 4.9 प्रतिशत और WTI में 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।


मध्य पूर्व में तनाव से बढ़ी तेल आपूर्ति की चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर हमलों और तेल परिवहन में संभावित बाधाओं ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके अलावा, सऊदी अरब के आसपास सुरक्षा संबंधी घटनाओं और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।


रूस-यूक्रेन संघर्ष ने भी बढ़ाई मुश्किलें

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष भी तेल बाजार को प्रभावित कर रहा है। यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरी पर हमले की खबरों के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। बाजार में यह चिंता भी बनी हुई है कि रूस से वैश्विक बाजार तक तेल और डीजल की आपूर्ति कितनी स्थिर रह पाएगी। आपूर्ति में संभावित कमी की आशंका के कारण कारोबारी तेल की कीमतों में और तेजी की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं।


भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव, परिवहन लागत में वृद्धि और महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू ईंधन की कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, करों, तेल कंपनियों की लागत और सरकारी नीतियों समेत कई कारकों का असर पड़ता है।


आगे कैसी रह सकती हैं कीमतें?

आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति और रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि आपूर्ति में बाधाएं बढ़ती हैं, तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। वहीं, तनाव कम होने और तेल की आपूर्ति सामान्य होने पर कीमतों में राहत मिलने की संभावना भी रहेगी। फिलहाल, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में आई तेजी ने ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों पर नजर रखना अहम होगा।