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कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन के बाद दूसरी प्रसूता की मौत, परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए

राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूता रोशन बाई (30) की सिजेरियन प्रसव के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनके पेट में खून के थक्के जम गए और तबीयत बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित इलाज नहीं मिला। बाद में दूसरी सर्जरी की गई, लेकिन उन्हें होश नहीं आया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीज हाई रिस्क श्रेणी में थी और उसे बचाने के प्रयास किए गए। मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है।

Kashish Rai19 अक्टू. 2026, 05:55 PM IST
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कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन के बाद दूसरी प्रसूता की मौत, परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 30 वर्षीय रोशन बाई की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिवार के मुताबिक, रोशन का ऑपरेशन रात करीब 1:15 बजे हुआ था। उन्होंने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद रात करीब 2 बजे उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, कुछ समय बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें तेज दर्द होने लगा। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को रोशन की परेशानी के बारे में बताया, लेकिन शुरुआत में उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।


परिजनों के अनुसार, सुबह करीब 6 बजे रोशन का पेशाब बंद हो गया और उनके पेट में सूजन आने लगी। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने जांच की। परिवार का कहना है कि कैथेटर हटाकर खून साफ करने के दौरान करीब 100 से 150 ग्राम खून के थक्के निकले। इस दौरान रोशन की बेचैनी बढ़ती गई और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि समय रहते उनकी स्थिति को गंभीरता से नहीं संभाला गया, जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रोशन की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन करने की जरूरत बताई। परिवार को बताया गया कि उनकी जान बचाने के लिए गर्भाशय निकालने की सर्जरी करनी पड़ सकती है। इसके बाद परिजनों ने जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की। परिवार के मुताबिक, सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच ऑपरेशन की तैयारी के दौरान रोशन को एनेस्थीसिया दिया गया, लेकिन इसके बाद वह दोबारा होश में नहीं आ सकीं। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार में मातम पसरा है और परिजनों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।


अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि रोशन की हालत जोखिम भरी थी। डॉक्टरों की ओर से निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया के अनुसार इलाज किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल प्रशासन के इस बयान के बीच परिजनों के आरोपों ने इलाज की प्रक्रिया और मरीज की बिगड़ती हालत पर समय रहते की गई कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।  गौरतलब है कि न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इससे पहले भी प्रसूता रेशमा की मौत का मामला सामने आया था। रेशमा की मौत के बाद उनके शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया था। इस बोर्ड में मेडिसिन, फॉरेंसिक और स्त्री रोग विभाग के डॉक्टर शामिल थे। महावीर नगर थाना प्रभारी हरेंद्र सौदा के अनुसार, मृतका के पति की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।


इसी अस्पताल में एक अन्य प्रसूता अनीता बाईरवा की हालत भी गंभीर बताई गई है। उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है और उन्हें किडनी से जुड़ी गंभीर परेशानी होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि एक दिन में उनका पेशाब करीब 100 मिलीलीटर ही हुआ, जो काफी कम है। हालांकि, शुक्रवार से शनिवार के बीच प्लेटलेट्स और कुछ अन्य चिकित्सकीय मानकों में सुधार की बात भी सामने आई है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अस्पताल में प्रसूताओं को मिलने वाले उपचार और गंभीर स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।