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शादी के 84 दिन बाद अलग हुए पति-पत्नी, अब एक साल पूरा होने से पहले दाखिल कर सकेंगे तलाक की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने शादी के महज 84 दिन बाद अलग हुए पति-पत्नी को एक साल की कानूनी अवधि पूरी होने से पहले आपसी सहमति से तलाक की याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है। दोनों के बीच शारीरिक संबंध नहीं बने और सुलह की कोई संभावना नहीं बची थी। अदालत ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, हालांकि तलाक की अंतिम डिक्री अभी नहीं दी गई है।

Sonali20 अक्टू. 2026, 06:34 PM IST
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शादी के 84 दिन बाद अलग हुए पति-पत्नी, अब एक साल पूरा होने से पहले दाखिल कर सकेंगे तलाक की याचिका

दंपती की शादी 1 दिसंबर 2025 को दिल्ली के पालम गांव स्थित आर्य समाज मंदिर में हुई थी। हालांकि, आपसी मतभेद और स्वभाव में असंगति के कारण उनका रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका। दोनों 23 फरवरी 2026 को, यानी शादी के 84 दिनों के भीतर अलग रहने लगे। पति-पत्नी ने अदालत को बताया कि उनके बीच शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हुए थे और शादी से कोई बच्चा भी नहीं है। परिवारों और रिश्तेदारों के माध्यम से सुलह कराने की कोशिशें भी सफल नहीं हुईं। इसके बाद दोनों ने 30 अप्रैल 2026 को समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) तैयार कर आपसी विवादों और दावों का निपटारा कर लिया। इसके बाद 6 मई 2026 को दोनों ने आपसी सहमति से तलाक की संयुक्त याचिका दाखिल की। लेकिन शादी को एक साल पूरा नहीं होने के कारण उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14(1) के तहत निर्धारित अवधि में छूट देने की मांग भी की।

फैमिली कोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका?

दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने 17 अगस्त 2026 को एक साल की अवधि में छूट देने की मांग खारिज कर दी थी। फैमिली कोर्ट का कहना था कि दोनों 84 दिनों तक एक ही घर में रहे थे, इसलिए उनके इस दावे को स्वीकार करना मुश्किल है कि शादी में शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हुए। अदालत ने इस संबंध में पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं मिलने की बात भी कही। इसके बाद दंपती ने फैमिली कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही घर में रहने से यह साबित नहीं होता कि पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए थे। जब दोनों ने शपथपत्र पर स्पष्ट रूप से कहा है कि शादी का शारीरिक रूप से consummation (वैवाहिक संबंधों की स्थापना) नहीं हुआ और रिकॉर्ड में उनके बयान के विपरीत कोई सबूत नहीं है, तो केवल स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने के आधार पर उनके दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। पीठ ने यह भी ध्यान दिया कि दोनों लंबे समय से अलग रह रहे हैं, उनके बीच सुलह की कोई वास्तविक संभावना नहीं है, कोई बच्चा नहीं है और आपसी विवादों का समझौते से निपटारा हो चुका है। ऐसे हालात में शेष कुछ महीनों तक उन्हें इंतजार करने के लिए मजबूर करना महज औपचारिकता होगी और इससे कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14 का महत्व

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 14(1) सामान्यतः शादी के एक साल के भीतर तलाक की याचिका दाखिल करने पर रोक लगाती है। हालांकि, असाधारण कठिनाई या दूसरे पक्ष की असाधारण दुर्दशा जैसी परिस्थितियों में अदालत इस अवधि में छूट दे सकती है। हाईकोर्ट ने इसी प्रावधान के तहत दंपती को एक साल पूरा होने से पहले आपसी सहमति से तलाक की याचिका पेश करने की अनुमति दी और फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

क्या दंपती को तुरंत तलाक मिल गया?

नहीं। हाईकोर्ट ने तत्काल तलाक की अंतिम डिक्री नहीं दी है। अदालत ने दंपती को एक साल की अवधि पूरी होने से पहले संयुक्त याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है और मामले को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए फैमिली कोर्ट वापस भेज दिया है। फैमिली कोर्ट को याचिका पर कानून के अनुसार शीघ्र सुनवाई करने का निर्देश दिया गया है। 

इस फैसले का अर्थ यह है कि विशेष परिस्थितियों में शादी के एक साल की कानूनी अवधि में छूट मिल सकती है, लेकिन ऐसी छूट हर मामले में अपने आप नहीं मिलेगी। अदालत को मामले के तथ्यों, असाधारण कठिनाई और सुलह की संभावना पर विचार करना होगा।