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पढ़ाई छोड़ विश्वविद्यालय से मुकदमेबाजी में उलझा छात्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई फटकार; अपील खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के खिलाफ बार-बार याचिकाएं दाखिल करने वाले BA छात्र की अपील खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने छात्र को निरर्थक मुकदमेबाजी से बचने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा जारी रहने पर उसके खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित किए जा सकते हैं।

मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज में BA की पढ़ाई करने वाले छात्र से जुड़ा है। छात्र ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 में तीन वर्षीय BA पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। वर्ष 2024 में BA प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल घोषित होने के बाद उसने आगे की पढ़ाई जारी नहीं की और विश्वविद्यालय के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
छात्र ने अदालत से कई तरह की राहत देने की मांग की थी। इनमें प्रथम वर्ष की परीक्षा निरस्त करने, परीक्षा में असफल छात्रों को दूसरे वर्ष में प्रमोट करने और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में बदलाव करने जैसी मांगें शामिल थीं। इसके अलावा, छात्र ने लड़कों के छात्रावास के नवीनीकरण और आवंटन की मांग भी उठाई। उसने विश्वविद्यालय में कथित व्यवस्थागत खामियों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र समिति गठित करने और मानसिक परेशानी के लिए पांच लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की थी।
अदालत ने कहा- पढ़ाई पर ध्यान दें
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान छात्र की अपील में कोई ठोस आधार नहीं पाया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अपील में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। अदालत ने छात्र को चेतावनी दी कि वह इस तरह की निरर्थक याचिकाएं दाखिल करने से बचे। पीठ ने कहा कि यदि छात्र ने ऐसा करना जारी रखा, तो अदालत को उसके खिलाफ कई तरह के प्रतिकूल आदेश पारित करने पड़ सकते हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि छात्र को पहले भी इस तरह की निरर्थक मुकदमेबाजी से बचने और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई थी। हालांकि, छात्र ने अदालत की सलाह पर ध्यान नहीं दिया।
बार-बार याचिका दाखिल करने पर सख्त रुख
हाईकोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल ठोस कानूनी आधार वाले विवादों के समाधान के लिए किया जाना चाहिए। अदालत ने छात्र की अपील खारिज करते हुए उसे भविष्य में ऐसी याचिकाएं दाखिल करने से बचने की चेतावनी दी। इस मामले में अदालत ने छात्र की मांगों को स्वीकार नहीं किया और अपील खारिज कर दी। साथ ही, उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी।
