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ट्रेन में तेज आवाज में फोन चलाने पर ₹1,000 जुर्माना, 6 महीने तक की जेल का प्रावधान

रेलवे ने ट्रेन और रेलवे परिसर में तेज आवाज में मोबाइल पर बात करने और स्पीकर पर ऑडियो-वीडियो चलाने से यात्रियों को होने वाली परेशानी रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर ₹1,000 तक का जुर्माना और गंभीर मामलों में 6 महीने तक की जेल हो सकती है।

Kashish Rai20 अक्टू. 2026, 06:02 PM IST
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ट्रेन में तेज आवाज में फोन चलाने पर ₹1,000 जुर्माना, 6 महीने तक की जेल का प्रावधान

ट्रेन में सफर के दौरान तेज आवाज में मोबाइल फोन पर बात करना या स्पीकर पर गाने, वीडियो और अन्य ऑडियो चलाना यात्रियों को भारी पड़ सकता है। सहयात्रियों को होने वाली परेशानी रोकने के लिए रेलवे ने सख्ती बरतने की तैयारी की है। साउदर्न रेलवे के चेन्नई स्थित मुख्यालय ने 6 अक्टूबर 2026 को निर्देश जारी कर अपने सभी डिवीजनों को यात्रियों के बीच जागरूकता अभियान चलाने को कहा है। इसका उद्देश्य ट्रेन और रेलवे परिसर में शोर कम करना और यात्रियों की यात्रा को आरामदायक बनाना है। रेलवे के निर्देश में रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। इसके तहत यात्रियों को परेशान करने और रेलवे परिसर में अनुचित व्यवहार करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। निर्देश में ₹1,000 तक के जुर्माने और गंभीर मामलों में छह महीने तक की जेल का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, सजा और जुर्माने का निर्धारण मामले की परिस्थितियों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगा।


रेलवे ने डिवीजनों को निर्देश दिया है कि यात्रियों तक यह संदेश हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए पहुंचाया जाए। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों और अन्य संबंधित स्थानों पर जागरूकता से जुड़े नोटिस भी लगाए जाएंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मोबाइल फोन पर ऑडियो या वीडियो सुनते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करें और फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखें, ताकि दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो। रेलवे ने इस मामले में 23 जुलाई 2012 को जारी रेलवे बोर्ड के एक पुराने पत्र का भी हवाला दिया है। उस समय भी ट्रेन के डिब्बों, खासकर एसी कोच में तेज आवाज में मोबाइल पर बात करने, लंबे समय तक बातचीत करने और तेज या आपत्तिजनक रिंगटोन बजाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों को यात्रियों के बीच जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए थे। यात्रियों को मोबाइल साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखने, कम आवाज वाली रिंगटोन इस्तेमाल करने और तेज आवाज में बातचीत से बचने की सलाह दी गई थी।


साउदर्न रेलवे के निर्देश चेन्नई, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, तिरुचिरापल्ली, मदुरै और सलेम डिवीजनों के वरिष्ठ वाणिज्यिक अधिकारियों को भेजे गए हैं। पत्र के मुताबिक, रेलवे अधिनियम के लागू प्रावधानों के तहत टिकट जांच कर्मचारी (टीटीई) या उससे ऊपर के रैंक के वाणिज्यिक कर्मचारियों को नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का अधिकार है। निर्देश में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत संशोधित धारा 145(2)(a) का भी उल्लेख किया गया है। यह प्रावधान रेलवे परिसर में यात्रियों को परेशान करने, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, अनुचित व्यवहार करने और रेलवे की सुविधाओं में जानबूझकर बाधा डालने जैसे मामलों से संबंधित है। कुछ परिस्थितियों में संबंधित व्यक्ति को रेलवे परिसर से बाहर निकालने का प्रावधान भी लागू हो सकता है। रेलवे ने संबंधित डिवीजनों को निर्देशों पर जरूरी कार्रवाई करने और 20 अक्टूबर 2026 तक मुख्यालय को अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा है। रेलवे की अपील है कि यात्री मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय दूसरों की सुविधा का ध्यान रखें और सफर के दौरान अनावश्यक शोर करने से बचें।