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फर्जी डिग्री से शिक्षक की नौकरी पाने वालों की अब खैर नहीं! यूपी के सभी बेसिक शिक्षकों के दस्तावेज जांचेगा विभाग

उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी प्रमाणपत्रों और दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के मामलों की जानकारी सामने आने के बाद यह निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित शिक्षकों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की ओर से जारी सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेजों की पठनीय प्रतियां जमा करने को कहा है।

Sonali21 अक्टू. 2026, 01:53 PM IST
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फर्जी डिग्री से शिक्षक की नौकरी पाने वालों की अब खैर नहीं! यूपी के सभी बेसिक शिक्षकों के दस्तावेज जांचेगा विभाग

उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के बेसिक स्कूलों में तैनात सभी शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और दूसरे व्यक्तियों के दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्यव्यापी जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने शिक्षकों को संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की ओर से सूचना जारी होने के एक सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां जमा करने को कहा है।

फर्जी दस्तावेजों से नौकरी मिलने के मामलों पर अदालत सख्त

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने यह आदेश एक शिक्षिका कुसुमलता की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने संत कबीर नगर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से अपनी सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति को मंजूरी देने और वेतन जारी करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनकी नियुक्ति 2 जनवरी 2006 को सिद्धार्थनगर जिले में हुई थी और 12 जुलाई 2010 को उन्हें पदोन्नति मिली थी। हालांकि, 11 फरवरी 2021 को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच में सामने आया कि याचिकाकर्ता ने गोरखपुर जिले के एक स्कूल में तैनात दूसरी शिक्षिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षणिक दस्तावेजों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया था।

STF की जांच में सामने आए गंभीर आरोप

मामले की जांच विशेष कार्यबल (Special Task Force—STF), लखनऊ को सौंपी गई थी। हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर को याचिकाकर्ता को 12 और 13 अक्टूबर को अपने सभी दस्तावेजों तथा दावों के साथ STF के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अदालत ने STF को एक सप्ताह के भीतर दस्तावेजों की वैधता और वास्तविकता की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। हालांकि, याचिकाकर्ता निर्धारित दोनों तारीखों पर उपस्थित नहीं हुईं और उन्होंने सत्यापन के लिए अपने शैक्षणिक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए। उनके वकील ने पहले बताया था कि हाल ही में सर्जरी होने के कारण वह बिस्तर पर आराम कर रही थीं, लेकिन अगली सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि STF की जांच में राज्य के कई शिक्षकों की नियुक्ति कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में एक ही शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी मिलने की बात भी सामने आई।

किन दस्तावेजों की होगी जांच?

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, सभी संबंधित शिक्षकों को अपने शैक्षणिक और नियुक्ति संबंधी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र

  • स्नातक की डिग्री

  • बीएड, बीटीसी, डीएलएड, बीएलएड या अन्य संबंधित शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र

  • शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET/CTET) के प्रमाणपत्र

  • नियुक्ति पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज

शिक्षकों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से जारी सूचना प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर इन दस्तावेजों की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रतियां जमा करनी होंगी।

फर्जी नियुक्तियों पर कार्रवाई की चेतावनी

अदालत ने पहले दिए गए एक अन्य आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें धोखाधड़ी से नियुक्ति हासिल करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने और कानून के अनुसार जहां संभव हो, वेतन की वसूली करने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे मामलों में कथित रूप से मिलीभगत करने, मदद पहुंचाने या जानबूझकर अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई करने की बात भी कही गई थी। हाईकोर्ट ने सरकारी प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, मध्याह्न भोजन, यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर पर्याप्त संसाधन खर्च कर रही है। इसके बावजूद प्राथमिक स्कूलों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने के पीछे शिक्षकों की गुणवत्ता और उनके कर्तव्यों के प्रति गंभीरता भी एक कारण हो सकती है। अदालत के इस आदेश का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति की प्रामाणिकता की जांच करना तथा कथित फर्जीवाड़े पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।