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27 साल पुराने लूटपाट केस का अंत, शिकायतकर्ता और गवाहों की गैरहाजिरी में दोनों आरोपी बरी
कल्याण की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने करीब 27 साल पुराने लूटपाट के मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष अदालत में आरोप साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। मामले के शिकायतकर्ता और अन्य प्रमुख गवाह अपने बताए गए पतों पर नहीं मिले, जबकि एक पंच गवाह की मृत्यु होने की जानकारी सामने आई। ऐसे में अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

यह मामला नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 237/1999 से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, घटना 9 अप्रैल 1999 की है। शिकायतकर्ता महेश मधुकर अहिरराव उल्हासनगर स्टैंड पर यात्री की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान दोनों आरोपी उनके पास आए और घूमने जाने की बात कहकर उन्हें रिक्शा में बैठाया। आरोप था कि रिक्शा उल्हासनगर रोड से आगे एकवीरा मंदिर के पास पहुंचा, जहां आरोपियों ने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की। इसके बाद उनके गले से सोने की चेन, चांदी का ब्रेसलेट और नकदी जबरन छीन ली गई। शिकायत के आधार पर कल्याण तालुका पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 39/1999 दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद राजकुमार जगतनारायण तिवारी और राजकुमार गिरिजाशंकर उपाध्याय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 394 और 34 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। धारा 394 लूटपाट के दौरान चोट पहुंचाने से संबंधित है, जबकि धारा 34 साझा मंशा से किए गए अपराध से जुड़ी है।
मुख्य गवाह नहीं मिले, अभियोजन की दलील कमजोर
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों को अदालत में पेश करने के लिए समन जारी कराने के प्रयास किए। हालांकि, शिकायतकर्ता और अन्य गवाह अपने दिए गए पतों पर नहीं मिले। परिसर में पूछताछ करने पर भी उनके बारे में उपयोगी जानकारी नहीं मिल सकी। पंच गवाह की मृत्यु होने की जानकारी भी अदालत के सामने आई।
अभियोजन पक्ष ने कल्याण तालुका पुलिस स्टेशन में समन और वारंट की तामील का काम करने वाले अधिकारी एम.एन. शाह की गवाही दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि संबंधित गवाहों को तलाशने के बावजूद वे नहीं मिले। इस संबंध में रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन करते हुए पाया कि शिकायतकर्ता और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों की अनुपस्थिति के कारण कथित लूटपाट और मारपीट के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। आरोपियों के खिलाफ अपराध के आवश्यक तत्व साबित करने वाला ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आया।
अदालत ने दोनों आरोपियों को किया बरी
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, छठे न्यायालय, कल्याण की न्यायाधीश के.एस. कातकाडे ने 23 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 248(1) के तहत IPC की धारा 394 के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने आरोपियों और उनके जमानतदारों के बंधपत्र रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही, जब्त सोने की चेन, चांदी के ब्रेसलेट और टेप रिकॉर्डर को उचित दावेदार को लौटाने का निर्देश दिया। यदि कोई उचित दावेदार सामने नहीं आता है, तो अपील की अवधि के बाद नियमानुसार सार्वजनिक नीलामी कर रकम सरकारी खाते में जमा करने को कहा गया।
