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मनोज बाजपेयी का बॉलीवुड पर निशाना: ‘इंडस्ट्री ने कई बेहतरीन प्रतिभाओं को बर्बाद कर दिया’
बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई प्रतिभाशाली कलाकारों को उनकी पूरी क्षमता के अनुसार अवसर नहीं मिलते। उनके अनुसार, कलाकारों को बार-बार एक जैसी भूमिकाओं में बाँध देने से उनकी अभिनय प्रतिभा सीमित हो जाती है।

नई दिल्ली: बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली और कलाकारों के साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी फिल्म गजब रात के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में कई प्रतिभाशाली कलाकारों को एक ही तरह की भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाता है। इससे उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता को सामने आने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता।
बॉलीवुड की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मनोज बाजपेयी ने एक साक्षात्कार में कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की छवि कई बार प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ किए जाने वाले व्यवहार के कारण खराब हुई है। उनके अनुसार, कलाकारों को सीमित भूमिकाएँ देना और उनके साथ उचित व्यवहार न करना उनकी प्रतिभा को नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिला और वे बिना उचित पहचान हासिल किए ही इंडस्ट्री से दूर हो गए। अभिनेता ने इस स्थिति को बॉलीवुड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कलाकारों को उनकी वास्तविक प्रतिभा के आधार पर अवसर मिलने चाहिए।
‘मेरी प्रतिभा का भी केवल 25 प्रतिशत इस्तेमाल हुआ’
मनोज बाजपेयी ने अपने करियर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि अब तक उनकी अभिनय क्षमता का केवल लगभग 25 प्रतिशत ही इस्तेमाल किया गया है। उनके अनुसार, एक कलाकार के भीतर कई तरह के किरदार निभाने की क्षमता होती है, लेकिन सीमित भूमिकाओं और एक जैसी छवि में बाँध दिए जाने के कारण उसकी पूरी प्रतिभा सामने नहीं आ पाती। हालाँकि, उन्होंने इस बात को निराशा के बजाय अपने लिए आगे बढ़ने और नए किरदार निभाने की प्रेरणा के रूप में देखा। उनका मानना है कि एक कलाकार के भीतर हमेशा कुछ नया करने की इच्छा बनी रहनी चाहिए।
दिव्या दत्ता ने भी उठाया ‘सपोर्टिंग एक्टर’ के टैग पर सवाल
इस बातचीत में अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने भी कलाकारों को ‘सपोर्टिंग एक्टर’ या ‘कैरेक्टर आर्टिस्ट’ जैसी श्रेणियों में बाँटने की प्रवृत्ति पर आपत्ति जताई। उनका मानना है कि ऐसे लेबल कलाकारों की पहचान को सीमित कर सकते हैं। किसी कलाकार की क्षमता केवल इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि उसे फिल्म में मुख्य भूमिका मिली है या सहायक भूमिका। दिव्या दत्ता के अनुसार, हर कलाकार अपने किरदार के माध्यम से कहानी में महत्वपूर्ण योगदान देता है और उसे अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर मिलने चाहिए।
OTT प्लेटफॉर्म से कलाकारों को मिल रहे नए अवसर
मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता ने डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी OTT के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, OTT प्लेटफॉर्म ने कलाकारों को अलग-अलग प्रकार के किरदार निभाने और अपनी अभिनय क्षमता दिखाने के नए अवसर दिए हैं। डिजिटल माध्यमों पर बनने वाली फिल्मों और वेब सीरीज में कई बार ऐसे कलाकारों को भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ मिलती हैं, जिन्हें पारंपरिक फिल्म उद्योग में सीमित अवसर मिलते थे।
इस बदलाव से दर्शकों को भी विविध कहानियाँ और अलग-अलग तरह के अभिनय देखने का अवसर मिल रहा है।
‘गजब रात’ के प्रचार के दौरान दिया बयान
मनोज बाजपेयी ये बातें अपनी फिल्म गजब रात के प्रचार के दौरान कह रहे थे। इस फिल्म में उनके साथ दिव्या दत्ता और श्रद्धा दास भी नजर आ रही हैं। फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को Netflix पर रिलीज हुई। फिल्म के प्रचार के दौरान हुई इस बातचीत ने एक बार फिर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की भूमिका, अवसरों की समानता और प्रतिभा को पहचानने की जरूरत पर चर्चा शुरू कर दी है।
मनोज बाजपेयी का बयान बॉलीवुड में कलाकारों को मिलने वाले अवसरों और उनकी प्रतिभा के उचित इस्तेमाल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बहस को सामने लाता है। कलाकारों को एक ही प्रकार की भूमिकाओं में सीमित करने के बजाय उन्हें विविध किरदार निभाने के अवसर देना हिंदी सिनेमा को अधिक समृद्ध बना सकता है। उनकी टिप्पणियाँ इस बात पर भी जोर देती हैं कि किसी कलाकार की क्षमता को केवल उसकी लोकप्रियता या भूमिका के आकार से नहीं आँकना चाहिए, बल्कि उसके अभिनय कौशल और रचनात्मक संभावनाओं को भी महत्व देना चाहिए।
