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अपराधियों के दस्तावेज जुटाकर उनके नाम पर लोन! गोरखपुर का निलंबित सिपाही नीतीश यादव गिरफ्तार, दुबई कनेक्शन की भी जांच

गोरखपुर के निलंबित सिपाही नीतीश कुमार यादव को करीब दो साल तक फरार रहने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ में आरोप है कि उसने पुलिस सत्यापन के दौरान अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों के दस्तावेज जुटाकर उनके नाम पर फर्जी तरीके से व्यक्तिगत लोन कराया। उसके बैंक खातों में करीब 55 लाख रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस उसके दुबई में रहने के दौरान संभावित ठगी और हवाला कारोबार से जुड़े संपर्कों की भी जांच कर रही है।

Samant Dubey26 अग. 2026, 03:51 PM IST
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अपराधियों के दस्तावेज जुटाकर उनके नाम पर लोन! गोरखपुर का निलंबित सिपाही नीतीश यादव गिरफ्तार, दुबई कनेक्शन की भी जांच

दिल्ली एयरपोर्ट से हुई गिरफ्तारी

गोरखपुर के निलंबित सिपाही नीतीश कुमार यादव को करीब दो साल तक फरार रहने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। उस पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था। पुलिस के मुताबिक, नीतीश दुबई से भारत लौटा था। एयरपोर्ट पर लुकआउट नोटिस के आधार पर उसे रोका गया और गोरखपुर पुलिस को सूचना दी गई।

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इसके बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर गोरखपुर लेकर आई। अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

अपराधियों के दस्तावेजों का कथित तौर पर किया इस्तेमाल

पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला है कि नीतीश ने पुलिस सत्यापन के दौरान संपर्क में आने वाले अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और गैंगस्टरों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज हासिल किए।

आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कागजात तैयार कर उनके नाम पर तीन से पांच लाख रुपये तक के व्यक्तिगत लोन कराए गए। पुलिस अब ऐसे करीब 15 लोगों के दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कर रही है।इनमें महराजगंज के जिला बदर अपराधी अजय साहनी का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, उसके नाम पर करीब पांच लाख रुपये का लोन लिए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि इस पूरे हिस्से की जांच अभी जारी है।

बैंक लोन फर्जीवाड़े से खुला मामला

नीतीश के खिलाफ बैंक लोन में फर्जीवाड़े का मामला वर्ष 2024 में सामने आया था। बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से शिकायत के बाद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में अलग-अलग बैंक शाखाओं से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर व्यक्तिगत ऋण लेने के आरोप सामने आए।पुलिस के मुताबिक, उसने कथित तौर पर पुलिस पहचान पत्र, वेतन पर्ची, फॉर्म-16 और कर्मचारी सत्यापन जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके बाद बैंकिंग प्रक्रिया के जरिए लोन हासिल करने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद नीतीश को निलंबित किया गया था। दिसंबर 2024 में वह फरार हो गया और बाद में उसके दुबई चले जाने की जानकारी पुलिस को मिली।

55 लाख के लेनदेन और 80 लाख की देनदारी

ताजा जांच में नीतीश के बैंक खातों में करीब 55 लाख रुपये के लेनदेन का पता चलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, लोन और अन्य उधारी को मिलाकर उस पर करीब 80 लाख रुपये की देनदारी थी। पूछताछ में उसके जुए की लत और कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की कोशिश का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस अब उसके वित्तीय लेनदेन की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम कहां से आई और किन खातों में भेजी गई।

दुबई और हवाला कनेक्शन की भी जांच

नीतीश के दुबई जाने के बाद अब जांच का दायरा विदेश तक पहुंच गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि दुबई में रहते हुए उसने किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह के साथ मिलकर वित्तीय धोखाधड़ी तो नहीं की। उसके हवाला कारोबार से जुड़े होने की आशंका की भी जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक हवाला कारोबार में उसकी संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस उसके विदेश में संपर्कों और संभावित वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

पूरे नेटवर्क की तलाश में पुलिस

नीतीश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित तौर पर लोन की रकम किन लोगों तक पहुंची। जांच में उसके बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड, विदेश यात्रा, संपर्कों और संबंधित दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या अपराधियों के दस्तावेज जुटाने और उनके नाम पर लोन कराने का यह मामला केवल नीतीश तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

फिलहाल मामले में सामने आए कई नए आरोप पुलिस पूछताछ और जांच पर आधारित हैं। इसलिए अदालत में आरोप साबित होने तक इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।