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आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जनआरोग्य योजना के 15,407 संदिग्ध दावों की SIT करेगी जांच; महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला

आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) और महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना (MJPJAY) के तहत वर्ष 2024 से 2026 के दौरान संदिग्ध पाए गए 15,407 दावों की गहन जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। नासिक मंडल आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में गठित यह टीम 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। जांच में लाभार्थियों के सत्यापन से लेकर अस्पतालों, थर्ड पार्टी एजेंसियों और दावा स्वीकृति प्रक्रिया तक सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:09 PM IST
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आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जनआरोग्य योजना के 15,407 संदिग्ध दावों की SIT करेगी जांच; महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला
मुंबई Mumbai : महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की दो प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजनाओं—आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) और महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना (MJPJAY)—के तहत सामने आए संदिग्ध दावों की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार वर्ष 2024 से 2026 के बीच प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए गए 15,407 उपचार दावों की जांच के लिए विशेष जांच दल (Special Investigation Team - SIT) का गठन किया गया है। सरकार के अनुसार, इन मामलों में उपचार के दावों, लाभार्थियों की पहचान, अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों तथा भुगतान प्रक्रिया में कई प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं। इन्हीं शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर राज्य सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है।

इससे पहले शासन ने जिला शल्य चिकित्सकों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को लाभार्थियों से सीधे संपर्क कर उपचार की पुष्टि करने तथा दावों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, जांच के दौरान कई जिलों में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 10 जुलाई 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विशेष जांच दल गठित करने का निर्णय लिया गया।

डॉ. प्रवीण गेडाम होंगे SIT के प्रमुख
गठित विशेष जांच दल का नेतृत्व नासिक मंडल आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम करेंगे। उनके साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सचिव-2, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग के सचिव, महाराष्ट्र पुलिस द्वारा नामित नासिक साइबर पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के सहायक आयुक्त तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव (MJPJAY) को सदस्य बनाया गया है। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा एवं औषधि विभाग तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी SIT को उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि तकनीकी मामलों की निष्पक्ष जांच की जा सके।

किन मामलों की होगी जांच?
विशेष जांच दल उन सभी मामलों की जांच करेगा जिनमें अस्पताल स्तर पर अनियमितताओं की आशंका है। इसमें फर्जी या चिकित्सकीय दृष्टि से अनावश्यक उपचार दावे, इलाज की श्रेणी बढ़ाकर अधिक भुगतान प्राप्त करने के प्रयास, अस्पतालों के पैनल में शामिल करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं, मरीजों के पंजीकरण में अनधिकृत व्यक्तियों या बिचौलियों की भूमिका, एक ही मोबाइल नंबर या पहचान पत्र पर कई दावों का दर्ज होना तथा बड़े पैमाने पर संदिग्ध पंजीकरण जैसे मामलों की विस्तार से जांच की जाएगी। इसके अलावा योजना के संचालन से जुड़ी थर्ड पार्टी एजेंसियों (Third Party Agency), जिला समन्वयकों अथवा अन्य संबंधित पक्षों की संभावित भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति, संस्था या अस्पताल की संलिप्तता सामने आती है तो उसके संबंध में विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।

प्रक्रिया में सुधार के भी सुझाव देगी SIT
जांच केवल संदिग्ध दावों तक सीमित नहीं रहेगी। SIT यह भी अध्ययन करेगी कि अस्पतालों को योजना में शामिल करने, उपचार दावों की मंजूरी, भुगतान और निगरानी की मौजूदा व्यवस्था में कहां-कहां कमियां हैं। इसके आधार पर भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सुधारात्मक उपायों और नई कार्यप्रणाली की सिफारिश भी सरकार को दी जाएगी।

30 दिनों में सरकार को सौंपनी होगी रिपोर्ट
शासनादेश के अनुसार, SIT को गठन की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। जांच के दौरान आवश्यक मानव संसाधन, तकनीकी सहायता और प्रशासनिक सहयोग राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसायटी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। जांच से संबंधित सभी प्रशासनिक व्यय भी इसी संस्था की स्वीकृत निधि से वहन किए जाएंगे।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक लाभार्थियों तक सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित अस्पतालों, एजेंसियों और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जनआरोग्य जैसी योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। इसलिए योजनाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।