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एक पैर पर 400 मीटर का सफर, रागिनी को मिली मदद

बलिया की सात वर्षीय रागिनी एक पैर के सहारे करीब 400 मीटर दूर स्कूल जाती थी। उसका वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और उसे ट्राईसाइकिल समेत जरूरी सहायता उपलब्ध कराई। रागिनी की पढ़ाई जारी रखने की जिद ने लोगों का ध्यान खींचा।

Neha Sharma03 सित. 2026, 04:39 PM IST
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एक पैर पर 400 मीटर का सफर, रागिनी को मिली मदद

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया की सात वर्षीय रागिनी की कहानी ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। एक पैर की परेशानी के बावजूद पढ़ाई जारी रखने की उसकी जिद ने लोगों को प्रभावित किया। घर से करीब 400 मीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा तक पहुंचने के लिए रागिनी कई बार एक पैर के सहारे कूदते हुए स्कूल जाती थी। उसकी स्थिति का वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया और उसके लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई।


बचपन में हादसे ने बदली जिंदगी

रागिनी बलिया जिले के मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव की रहने वाली है। वह प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में कक्षा 1 की छात्रा है। रिपोर्टों के मुताबिक, जब रागिनी करीब छह महीने की थी, तब एक हादसे में उसके पैर को गंभीर चोट लगी थी। परिवार ने इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण बेहतर उपचार और कृत्रिम अंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। इसके बावजूद रागिनी ने पढ़ाई छोड़ने के बजाय स्कूल जाना जारी रखा। स्कूल घर से करीब 400 मीटर की दूरी पर है, लेकिन उसके लिए यह छोटा-सा रास्ता भी रोज की चुनौती बन जाता था। कई बार परिवार के सदस्य उसे स्कूल तक पहुंचाते थे और जब यह संभव नहीं होता, तो वह अपने एक पैर के सहारे खुद स्कूल जाने की कोशिश करती थी।


पढ़ाई की जिद ने खींचा लोगों का ध्यान

रागिनी की परेशानी तब सामने आई जब उसका स्कूल जाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वह एक पैर के सहारे स्कूल की ओर जाती दिखाई दी। उसकी कहानी सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन से बच्ची को आवागमन की सुविधा और इलाज उपलब्ध कराने की अपील की। रिपोर्टों के मुताबिक, रागिनी की पढ़ाई के प्रति लगन को देखते हुए स्कूल के शिक्षकों और स्थानीय स्तर पर भी उसके लिए मदद की मांग उठी। मामला जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने परिवार से संपर्क किया।


DM खुद पहुंचे रागिनी के घर

बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिव्यांग कल्याण विभाग के अधिकारी और चिकित्सक को रागिनी की स्थिति का आकलन करने के लिए भेजा। इसके बाद जिलाधिकारी खुद रागिनी के घर पहुंचे और उसके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने रागिनी और उसके परिजनों से उसकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। स्कूल आने-जाने में हो रही परेशानी को देखते हुए प्रशासन की ओर से रागिनी को ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा उसे किताबें, स्कूल बैग, खिलौने और चॉकलेट भी दिए गए। प्रशासन ने उसके इलाज और शिक्षा को लेकर भी जरूरी कदम उठाने की बात कही।


सड़क की हालत सुधारने के निर्देश

रागिनी की परेशानी केवल शारीरिक चुनौती तक सीमित नहीं थी। उसके गांव से स्कूल तक जाने वाले रास्ते की स्थिति भी खराब बताई गई। जिलाधिकारी ने मौके का निरीक्षण करने के बाद संबंधित अधिकारियों को सड़क की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए, ताकि रागिनी और गांव के दूसरे बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो। प्रशासन की ओर से रागिनी के परिवार को घर में शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि की जानकारी भी दी गई। साथ ही बच्ची का दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे वह पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ ले सके।


AAP ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

रागिनी की कहानी सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से भी उसके परिवार की सहायता की गई। पार्टी की ओर से रागिनी को व्हीलचेयर, बैसाखी और स्टेशनरी उपलब्ध कराने के साथ परिवार को ₹25,000 की आर्थिक सहायता देने की जानकारी सामने आई है। पार्टी ने आगे रागिनी के लिए कृत्रिम पैर की व्यवस्था कराने की बात भी कही है। AAP के मुताबिक, कृत्रिम पैर के लिए रागिनी को ALIMCO, कानपुर ले जाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद उसके लिए उपयुक्त कृत्रिम अंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।


सरकारी मदद से आसान होगी स्कूल की राह

रागिनी के मामले ने ग्रामीण इलाकों में दिव्यांग बच्चों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को भी सामने रखा है। स्कूल तक पहुंचने के लिए जरूरी mobility aid, इलाज, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं समय पर मिलना ऐसे बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रागिनी के मामले में वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ और उसे आवागमन के लिए ट्राईसाइकिल समेत कई सुविधाएं मिलीं। अब परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि इलाज, कृत्रिम अंग और शिक्षा से जुड़ी सहायता भी जल्द पूरी तरह उपलब्ध हो, ताकि रागिनी को स्कूल जाने के लिए रोजाना संघर्ष न करना पड़े। रागिनी की कहानी इस बात की मिसाल बनकर सामने आई है कि पढ़ने की इच्छा और हौसला मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ने की ताकत दे सकता है। अब प्रशासनिक मदद के बाद उसके लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता पहले से आसान होने की उम्मीद है।