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ऑपरेशन सिंदूर के हीरो जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, जानिए फाइटर पायलट से अयोध्या तक का सफर
सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया गया है। करीब चार दशक के भारतीय वायुसेना करियर में उन्होंने फाइटर पायलट, Experimental Test Pilot और वरिष्ठ सैन्य कमांडर के तौर पर काम किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह Western Air Command के प्रमुख थे। अब अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन, संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।

फाइटर पायलट से राम मंदिर ट्रस्ट के CEO तक
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और मंदिर से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया है। मिश्रा अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट से पहले वह Western Air Command के Air Officer Commanding-in-Chief (AOC-in-C) थे। अब सैन्य कमान संभालने के बाद वह देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थानों में से एक के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
करीब 40 साल का भारतीय वायुसेना करियर
जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिला था। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने लड़ाकू विमानों के संचालन से लेकर विमान परीक्षण, ऑपरेशनल प्लानिंग और बड़े सैन्य संगठनों के नेतृत्व तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके पास 3,000 से ज्यादा घंटे की उड़ान का अनुभव बताया जाता है। उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए हैं। मिश्रा Fighter Combat Leader और Experimental Test Pilot भी रहे हैं। Aircraft & Systems Testing Establishment (ASTE) में उन्होंने Chief Test Pilot और बाद में Commandant जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।
कारगिल युद्ध में भी निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर में कारगिल युद्ध का दौर भी महत्वपूर्ण रहा। वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने Mirage-2000 लड़ाकू विमानों पर Laser-Guided Bomb क्षमता को ऑपरेशनल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने Mirage-2000 का इस्तेमाल महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ किया था। मिश्रा के परीक्षण और ऑपरेशनल अनुभव ने इस क्षमता को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने में योगदान दिया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की कमान
जितेंद्र मिश्रा के करियर का सबसे चर्चित अध्याय Operation Sindoor रहा। वह उस समय Western Air Command के प्रमुख थे और भारत के पश्चिमी क्षेत्र में वायु अभियानों की कमान से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्हें Sarvottam Yudh Seva Medal (SYSM) से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें Ati Vishisht Seva Medal (AVSM) और Vishisht Seva Medal (VSM) जैसे सैन्य सम्मान भी मिल चुके हैं।
विदेशों में भी सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव
मिश्रा ने भारत के अलावा कई प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके प्रशिक्षण में Air Force Test Pilots School, Air Command and Staff College और Royal College of Defence Studies जैसे संस्थान शामिल रहे। उन्होंने 2010 में फ्रांस में आयोजित बहुराष्ट्रीय Exercise Garuda-IV में भारतीय वायुसेना के दल का नेतृत्व भी किया था।
5,585 आवेदनों के बाद हुआ CEO का चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया काफी व्यापक रही। रिपोर्टों के अनुसार इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे।
चयन के लिए एक समिति बनाई गई थी, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल थे। आवेदनों की प्रारंभिक छंटनी के बाद उम्मीदवारों की ऑनलाइन बातचीत और व्यक्तिगत इंटरव्यू किए गए। अंतिम चरण में तीन उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया और उसमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम को चुना गया।
CEO के तौर पर क्या होगी जिम्मेदारी?
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें ट्रस्ट के रोजमर्रा के प्रशासन, कर्मचारियों, विभिन्न परियोजनाओं और संस्थागत संचालन को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी संभालनी होगी। इसके अलावा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पेशेवर बनाना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना, नियमों और Trust Deed का पालन सुनिश्चित करना तथा विभिन्न गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होगा।
मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और अयोध्या में तेजी से विकसित हो रहे धार्मिक-पर्यटन ढांचे को देखते हुए ट्रस्ट के सामने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी चुनौतियां हैं।
ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में अन्य बदलाव भी किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब ट्रस्ट मंदिर से जुड़े प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था और भविष्य की परियोजनाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
देवरिया से है संबंध
जितेंद्र मिश्रा का संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से बताया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार उनका पैतृक संबंध जिले के भोपतपुरा गांव से है।
एक छोटे गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष कमांड पद तक पहुंचना और फिर देश के सबसे चर्चित धार्मिक संस्थानों में से एक के CEO की जिम्मेदारी संभालना उनके करियर की खास उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
सैन्य अनुशासन अब मंदिर प्रशासन में आएगा काम
जितेंद्र मिश्रा की नई जिम्मेदारी उनके सैन्य करियर से पूरी तरह अलग है, लेकिन उनके लंबे प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव को देखते हुए ट्रस्ट ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
भारतीय वायुसेना में उन्होंने बड़े स्तर पर leadership, planning, operations, personnel management और institutional administration का अनुभव हासिल किया है। अब इसी अनुभव का इस्तेमाल राम मंदिर ट्रस्ट के बढ़ते प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित करने में किया जा सकता है।
फाइटर पायलट से टेस्ट पायलट, फिर Western Air Command के शीर्ष अधिकारी और अब राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO—जितेंद्र मिश्रा का यह सफर भारतीय सैन्य सेवा से धार्मिक संस्थान के प्रशासन तक एक असाधारण बदलाव को दर्शाता है।
