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कुर्ला में अवैध निर्माण पर BMC अधिकारी पर गंभीर आरोप

मुंबई के कुर्ला स्थित Arfat Compound में कथित अनधिकृत RCC निर्माण को लेकर BMC की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि नोटिस और Speaking Order के बावजूद निर्माण जारी है। साथ ही L-Ward के Assistant Engineer Sanjay Dudhbhate पर रिश्वतखोरी और कथित संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और ACB व लोकायुक्त से जांच की मांग की गई है।

Neha Sharma12 अग. 2026, 07:35 PM IST
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कुर्ला में अवैध निर्माण पर BMC अधिकारी पर गंभीर आरोप

मुंबई: कुर्ला के New Mill Road स्थित Arfat Compound में कथित अनधिकृत RCC निर्माण को लेकर नगर निगम की कार्रवाई और Building & Factory Department की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायत के अनुसार, निर्माण को लेकर BMC की ओर से वैधानिक नोटिस और Speaking Order जारी किए जाने के बावजूद मौके पर कथित तौर पर प्रभावी demolition और enforcement action नहीं हुआ है। आरोप है कि कार्रवाई में देरी का फायदा उठाते हुए निर्माण कार्य जारी है।


इस मामले में BMC के L-Ward के Assistant Engineer Sanjay M. Dudhbhate पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि अधिकारी ने कथित रूप से अवैध निर्माणकर्ताओं को संरक्षण दिया और इसके बदले प्रति वर्ग फुट ₹600 से ₹1,000 तक की रिश्वत मांगे जाने या लिए जाने का दावा किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में नहीं मिली है। ऐसे में इन्हें गंभीर लेकिन अप्रमाणित आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।


क्या है पूरा विवाद?

शिकायत के मुताबिक Arfat Compound में RCC से संबंधित निर्माण कथित तौर पर आवश्यक मंजूरियों और नियमों के विपरीत किया जा रहा है। आरोप है कि BMC ने निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी किया और बाद में Speaking Order के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट की। Speaking Order का सामान्य अर्थ ऐसा आदेश है जिसमें सक्षम प्राधिकारी किसी मामले में लिए गए निर्णय के कारणों को रिकॉर्ड करता है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि जब नगर निगम की ओर से निर्माण को लेकर आदेश जारी हो चुका है, तब उसके बाद मौके पर कार्रवाई होना अपेक्षित था। लेकिन आरोप है कि demolition या अन्य enforcement कार्रवाई प्रभावी तरीके से नहीं हुई और निर्माण गतिविधियां जारी रहीं। यदि संबंधित दस्तावेजों से यह बात प्रमाणित होती है, तो यह सवाल उठेगा कि आदेश जारी होने के बाद उसके अनुपालन की निगरानी किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी और कार्रवाई में देरी क्यों हुई।


BMC की भूमिका पर उठ रहे सवाल

मुंबई में अनधिकृत निर्माण के मामलों में नगर निगम का Building & Factory Department महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी निर्माण को अनुमति के बिना या स्वीकृत योजना के विपरीत पाए जाने पर संबंधित प्राधिकारी नोटिस, काम रोकने के निर्देश और कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है। L-Ward से संबंधित एक अलग मामले में BMC अधिकारी Sanjay Dudhbhate का नाम सार्वजनिक रिकॉर्ड में सामने आ चुका है। जुलाई 2025 में Powai के एक पहाड़ी क्षेत्र में कथित अनधिकृत खुदाई के मामले में BMC की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी और रिपोर्टों के अनुसार शिकायत BMC के L-Ward के Assistant Engineer Sanjay Dudhbhate की ओर से की गई थी। BMC ने संबंधित मामले में Maharashtra Regional and Town Planning Act की धाराओं के तहत कार्रवाई कराई थी। यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह पुष्टि होती है कि Dudhbhate L-Ward में ऐसे मामलों से जुड़े अधिकारी के रूप में सार्वजनिक रिकॉर्ड में रहे हैं। हालांकि, इससे Arfat Compound मामले में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप स्वतः साबित नहीं होते।


Bombay High Court के रिकॉर्ड में भी नाम

अप्रैल 2026 के Bombay High Court के एक मामले में BMC और उसके L-Ward अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड में Sanjay Mallinath Dudhbhate का नाम आया है। मामले में BMC की ओर से दाखिल हलफनामे का उल्लेख किया गया है और विवादित संपत्ति/निर्माण की स्थिति से जुड़े दस्तावेजों पर पक्ष रखा गया था। हालांकि यह मामला Arfat Compound में कथित रिश्वत के आरोप से अलग है। इसलिए इन दोनों घटनाओं को आपस में जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।


₹600 से ₹1,000 प्रति वर्ग फुट रिश्वत का आरोप कितना गंभीर?

यदि शिकायत में लगाया गया ₹600 से ₹1,000 प्रति वर्ग फुट रिश्वत का आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी अधिकारी द्वारा किसी अवैध निर्माण को संरक्षण देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप भ्रष्टाचार कानूनों के तहत गंभीर जांच का विषय बन सकता है। लेकिन किसी व्यक्ति पर रिश्वत लेने का आरोप लगना और रिश्वत लेना साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। आरोप को प्रमाणित करने के लिए शिकायत, दस्तावेज, बैंक या वित्तीय लेन-देन, संचार रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, संबंधित अधिकारियों की फाइल नोटिंग और आवश्यकता पड़ने पर ट्रैप या अन्य जांच साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


निर्माण की सुरक्षा को लेकर भी चिंता

अनधिकृत RCC निर्माण का मुद्दा केवल संपत्ति या नगर नियोजन के नियमों तक सीमित नहीं है। यदि निर्माण बिना स्वीकृत structural plan या आवश्यक तकनीकी जांच के किया गया हो, तो उससे भवन की सुरक्षा को लेकर जोखिम पैदा हो सकता है।

मुंबई जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण का विस्तार आसपास की इमारतों, रास्तों, अग्निशमन पहुंच और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है। इसलिए किसी निर्माण के खिलाफ आदेश जारी होने के बाद उसकी स्थिति की नियमित निगरानी और आवश्यक enforcement कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।


ACB और Lokayukta से जांच की मांग

शिकायतकर्ता पक्ष ने Maharashtra Anti-Corruption Bureau (ACB) और Maharashtra Lokayukta से मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है। मांग यह है कि कथित रिश्वतखोरी, अधिकारी की भूमिका, नगर निगम की फाइलों में हुई कार्रवाई और कथित निर्माण के खिलाफ जारी आदेशों के अनुपालन की जांच की जाए। महाराष्ट्र ACB भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करने वाली राज्य की प्रमुख एजेंसी है। उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में मुंबई स्थित मुख्यालय और शिकायत/जांच व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध है।


जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?

  • इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है:
  • क्या Arfat Compound के निर्माण के खिलाफ BMC ने वास्तव में वैधानिक नोटिस जारी किया था?
  • क्या उसके बाद कोई Speaking Order जारी हुआ?
  • यदि आदेश जारी हुआ तो उसकी तारीख और उसमें दिए गए निर्देश क्या थे?
  • क्या संबंधित निर्माण के खिलाफ demolition या stop-work action के निर्देश दिए गए थे?
  • निर्देशों के बावजूद निर्माण जारी रहा तो संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
  • मौके पर कितनी बार निरीक्षण किया गया और inspection reports में क्या दर्ज है?
  • ₹600–₹1,000 प्रति वर्ग फुट रिश्वत के आरोप के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं?
  • क्या BMC के वरिष्ठ अधिकारियों को कथित उल्लंघन और कार्रवाई न होने की जानकारी दी गई थी?
  • इन सवालों के जवाब दस्तावेजी जांच से ही सामने आ सकते हैं।


अब नजर BMC और जांच एजेंसियों पर

Arfat Compound का मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसमें कथित अनधिकृत निर्माण के साथ-साथ नगर निगम की enforcement प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। यदि निर्माण के खिलाफ जारी आदेशों की आधिकारिक पुष्टि होती है और इसके बावजूद निर्माण जारी रहने की बात सही पाई जाती है, तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। वहीं, Assistant Engineer Sanjay Dudhbhate के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा। यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, और यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।


इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कथित अवैध निर्माण, BMC के आदेशों और अधिकारी के खिलाफ लगाए गए रिश्वत के आरोपों को अलग-अलग स्तर पर सत्यापित किया जाए। इससे न केवल जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि मुंबई में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ नगर निगम की enforcement व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।