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गड़चिरोली के आदिवासी स्कूल में बिस्तर तक नहीं थे, जहरीले सांप के काटने से एक ही रात में 3 छात्राओं की मौत l
महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई, जहां सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि दो अन्य छात्राओं को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से एक छात्रा की हालत इतनी गंभीर बताई गई कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। घटना ने स्कूल में मौजूद बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया कि स्कूल में पर्याप्त बेड और जरूरी मेडिकल सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। सांप के काटने के बाद छात्राओं को समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिलने में भी परेशानी हुई। घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्कूल का लाइसेंस रद्द करने का फैसला किया है। साथ ही राज्य के आदिवासी आवासीय स्कूलों की व्यवस्था और सुरक्षा की जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया गया है। यह घटना सिर्फ तीन छात्राओं की मौत का मामला नहीं है, बल्कि आदिवासी इलाकों में चल रहे आवासीय स्कूलों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, रहने की व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

गड़चिरोली जिले के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब रात के दौरान कई छात्राओं को सांप ने काट लिया। घटना में तीन छात्राओं की जान चली गई, जबकि दो अन्य छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में भर्ती छात्राओं में से एक की स्थिति बेहद गंभीर बताई गई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। घटना ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में छात्राओं के लिए पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आदिवासी छात्राओं के लिए बनाए गए आवासीय स्कूल में आखिर रहने और सोने की बुनियादी सुविधाएं क्यों मौजूद नहीं थीं। सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में स्कूल के पास जरूरी चिकित्सा व्यवस्था और तत्काल उपचार की सुविधा भी पर्याप्त नहीं होने की बात सामने आई है।
गड़चिरोली जैसे इलाके में सांपों का खतरा पहले से मौजूद रहता है। ऐसे क्षेत्रों में आवासीय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम की जरूरत होती है। स्कूल परिसर और छात्रावास में नियमित रूप से सफाई, घास-झाड़ियों की कटाई, कीटनाशक या अन्य जरूरी सुरक्षा उपाय, रात में पर्याप्त रोशनी और सांपों से बचाव की व्यवस्था जरूरी होती है। इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि स्कूल प्रशासन ने ऐसी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीरता दिखाई थी। घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले पर कार्रवाई करते हुए संबंधित स्कूल का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया। सरकार ने यह भी तय किया कि राज्य में चल रहे आदिवासी आवासीय स्कूलों की व्यवस्थाओं की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाएगी। इसके लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया गया है। इस ऑडिट का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि इन स्कूलों में बच्चों के रहने, खाने, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के लिए जरूरी मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
थर्ड-पार्टी ऑडिट इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्कूलों की व्यवस्था की जांच केवल स्थानीय अधिकारियों के भरोसे नहीं रहेगी। बाहरी एजेंसी यह देख सकती है कि स्कूलों में पर्याप्त बेड हैं या नहीं, छात्रावास सुरक्षित हैं या नहीं, बच्चों के लिए मेडिकल सहायता उपलब्ध है या नहीं और किसी आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। इस घटना ने आदिवासी आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे स्कूलों में बच्चे अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह स्कूल प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों की होती है। इसलिए अगर किसी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आती है, तो यह प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
सांप के काटने के मामलों में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में पीड़ित को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना जरूरी होता है। इस घटना के बाद यह भी जांच का विषय बन सकता है कि छात्राओं को सांप के काटने के बाद कितनी जल्दी चिकित्सा सहायता मिली और उन्हें अस्पताल पहुंचाने में कितना समय लगा। तीन छात्राओं की मौत के बाद उनके परिवारों में गहरा दुख है। यह घटना उन परिवारों के लिए बेहद दर्दनाक है जिन्होंने अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा और भविष्य की उम्मीद में आवासीय स्कूल भेजा था। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी घटना दोबारा किसी दूसरे स्कूल में न हो। कुल मिलाकर, गड़चिरोली की यह घटना सिर्फ सांप के काटने से हुई मौतों तक सीमित नहीं है। इसने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, छात्रावासों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार द्वारा स्कूल का लाइसेंस रद्द करने और पूरे राज्य के आदिवासी आवासीय स्कूलों का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का फैसला इस घटना के बाद उठाया गया एक बड़ा कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या खामियां सामने आती हैं और सरकार उन कमियों को दूर करने के लिए क्या स्थायी कदम उठाती है।
