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चमोली में सैलाब, बह गया वैली ब्रिज

उत्तराखंड के चमोली जिले की नीति घाटी में भारी बारिश के बाद तमक नाले में अचानक तेज बहाव आने से फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बन गई। पानी और मलबे की तेज धारा में वैली/बेली ब्रिज बह गया। घटना का खौफनाक वीडियो सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक एक BRO कर्मचारी के लापता होने की सूचना है और राहत-बचाव टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं।

Neha Sharma11 अग. 2026, 05:59 PM IST
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चमोली में सैलाब, बह गया वैली ब्रिज

देहरादून/चमोली: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच चमोली जिले से बड़ी प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आई है। जिले की नीति घाटी में अचानक तेज जलप्रवाह आने से एक वैली ब्रिज बह गया। तमक नाले में पानी का बहाव अचानक इतना तेज हो गया कि पुल उसकी चपेट में आ गया और देखते ही देखते पूरी संरचना बह गई। इस घटना के बाद इलाके में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और राहत एवं बचाव एजेंसियों को सक्रिय किया गया है।


घटना चमोली जिले के ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग पर तमक नाले के आसपास की बताई जा रही है। भारी बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्र से पानी और मलबा तेजी से नीचे आया। नाले में अचानक बढ़े जलस्तर के कारण फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो गई। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मलबा और पत्थर भी लेकर आया, जिसकी चपेट में आने से पुल को भारी नुकसान पहुंचा और वह बह गया।


BRO कर्मचारी के लापता होने की सूचना

पुल के बहने की घटना के दौरान एक BRO यानी Border Roads Organisation कर्मचारी के लापता होने की सूचना सामने आई है। घटना के बाद राहत और बचाव टीमों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया है। तेज पानी और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें भी सामने आ रही हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लापता कर्मचारी की तलाश के साथ-साथ सड़क मार्ग को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।


नीति घाटी में कनेक्टिविटी प्रभावित

वैली ब्रिज के बह जाने से नीति घाटी की ओर आने-जाने वाली सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में पुलों का महत्व बेहद अधिक होता है, क्योंकि कई दूरदराज के गांव और सीमावर्ती इलाके इन्हीं सड़कों और पुलों के जरिए मुख्य क्षेत्र से जुड़े होते हैं। नीति घाटी भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में यहां सड़क और पुलों का मजबूत नेटवर्क स्थानीय लोगों की आवाजाही के साथ-साथ सीमा क्षेत्र तक पहुंच और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।


अचानक बढ़ा तमक नाले का जलस्तर

भारी बारिश के बाद तमक नाले में अचानक पानी बढ़ने से स्थिति गंभीर हुई। पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी परिस्थितियां बेहद खतरनाक होती हैं, क्योंकि ऊपर के जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली बारिश का असर नीचे के इलाकों में अचानक दिखाई दे सकता है। जब पानी के साथ मलबा, बड़े पत्थर और मिट्टी भी नीचे आती है तो उसका दबाव कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि मजबूत दिखाई देने वाले सड़क पुल भी अचानक आई फ्लैश फ्लड में क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।


बादल फटने की आशंका, आधिकारिक पुष्टि जरूरी

इस घटना को कुछ रिपोर्टों में बादल फटने से जोड़कर बताया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में भारी बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड को घटना की वजह बताया गया है। ऐसे में जब तक मौसम विभाग या स्थानीय प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, इसे निश्चित रूप से बादल फटने की घटना कहना उचित नहीं होगा। बादल फटना एक सीमित क्षेत्र में बहुत कम समय के भीतर अत्यधिक बारिश होने की घटना है। पहाड़ी क्षेत्रों में इसका प्रभाव और भी गंभीर हो सकता है। अचानक हुई तेज बारिश जब नालों और छोटी जलधाराओं में पहुंचती है तो कुछ ही समय में तेज बाढ़ का रूप ले सकती है।


उत्तराखंड में मानसून के दौरान बढ़ता खतरा

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा लगातार बना रहता है। ऊंचे पहाड़ों से नीचे आने वाला पानी संकरी घाटियों और नालों में तेजी से बहता है। इससे सड़कें टूटने, पुल बहने और गांवों का संपर्क कटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। चमोली में हुई यह घटना भी इसी खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करती है। अचानक बढ़े जलप्रवाह ने एक महत्वपूर्ण पुल को अपनी चपेट में ले लिया और क्षेत्र की कनेक्टिविटी प्रभावित हो गई।


राहत और बचाव अभियान जारी

घटना के बाद राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया है। लापता BRO कर्मचारी की तलाश प्राथमिकता पर है। इसके साथ ही प्रभावित सड़क मार्ग और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों और यात्रियों को नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान जलधाराओं का स्वरूप अचानक बदल सकता है। ऐसे में सामान्य दिखाई देने वाले नाले भी कुछ ही मिनटों में बेहद खतरनाक हो सकते हैं।


आगे भी सतर्क रहने की जरूरत

मौसम विभाग की ओर से उत्तराखंड के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना के बीच प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। पहले से कमजोर सड़कें और पुल लगातार बारिश के कारण और अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी इलाकों में अत्यधिक बारिश के दौरान सबसे बड़ा खतरा अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का होता है। इसलिए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना चाहिए और नदी, नाले तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।


फिलहाल चमोली की नीति घाटी में वैली ब्रिज के बहने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और एक BRO कर्मचारी के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। राहत-बचाव एजेंसियां तलाश अभियान में जुटी हैं। घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि लगातार बदलते मौसम और अत्यधिक बारिश के बीच उत्तराखंड के दूरदराज और रणनीतिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को किस तरह अधिक मजबूत और आपदा-रोधी बनाया जाए।