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तारापीठ होटल में भीषण आग, 8 श्रद्धालुओं की मौत l

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ में सोमवार तड़के एक चार मंजिला होटल में भीषण आग लगने से 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। हादसे के समय होटल में 43 लोग मौजूद थे। आग के बाद धुआं तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गया, जिससे कई लोग कमरों में फंस गए। 34 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि एक व्यक्ति का इलाज जारी है। होटल के फायर-फाइटिंग सिस्टम में कथित लापरवाही के मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है।

Kashish Rai19 अग. 2026, 10:02 AM IST
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तारापीठ होटल में भीषण आग, 8 श्रद्धालुओं की मौत l

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तारापीठ में सोमवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां एक चार मंजिला होटल में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग आग और धुएं की चपेट में आने से बीमार हुए हैं। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने होटल के अग्निशमन इंतजामों में कथित लापरवाही के मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है।

सुबह 4:30 बजे लगी आग

जानकारी के मुताबिक, आग सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे होटल के ग्राउंड फ्लोर पर लगी। उस वक्त होटल में मौजूद ज्यादातर लोग अपने कमरों में सो रहे थे। होटल चार मंजिला था। ग्राउंड फ्लोर पर आग लगने के बाद धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गया। देखते ही देखते कई कमरों में धुआं भर गया और वहां ठहरे लोग बाहर निकलने के लिए परेशान हो गए। हादसे के वक्त होटल में कुल 43 लोग मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या उन श्रद्धालुओं की थी, जो सावन के आखिरी सोमवार को तारापीठ मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे।

धुएं से दम घुटने और झुलसने से कई प्रभावित

आग की चपेट में आने वाले लोगों को तत्काल रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग आग में झुलसे हैं, जबकि कई लोगों को होटल के अंदर धुआं भर जाने की वजह से सांस लेने में परेशानी हुई। प्रारंभिक जांच और इलाज के बाद 34 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि एक व्यक्ति का अस्पताल में इलाज जारी है।

आग लगने की वजह अभी साफ नहीं

होटल प्रबंधन की ओर से शुरुआती तौर पर दावा किया गया कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। बताया गया कि बिजली आपूर्ति से जुड़े एक उपकरण में आग लगी और आग होटल के रिसेप्शन के पास से शुरू हुई। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक आग लगने की सटीक वजह की पुष्टि नहीं की है। आग की वास्तविक वजह जानने के लिए जांच की जा रही है।

सजावटी और फाइबर के सामान से तेजी से फैली आग

अधिकारियों के मुताबिक, होटल के अंदर इस्तेमाल किए गए सजावटी और फाइबर के सामान की वजह से आग तेजी से फैल गई। आग लगने के कुछ ही समय बाद धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया। धुएं के कारण कई मेहमान अपने कमरों में फंस गए और उनके लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। हादसे ने होटल में मौजूद फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

फायर-फाइटिंग सिस्टम में लापरवाही का आरोप

हादसे के बाद होटल के फायर-फाइटिंग सिस्टम के रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने अग्निशमन व्यवस्था में कथित लापरवाही के मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि होटल में आग से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं और अगर थे तो वे घटना के समय सही तरीके से काम कर रहे थे या नहीं। वहीं, हादसे के बाद बीरभूम जिला प्रशासन ने तारापीठ के होटल, लॉज और अन्य प्रतिष्ठानों में बिजली व्यवस्था और अग्निशमन इंतजामों का विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया है।

45 मिनट तक कमरे में फंसा रहा परिवार

हादसे में बची कोलकाता की एक महिला ने बताया कि अचानक पूरा होटल धुएं से भर गया था। सांस लेना मुश्किल हो गया था और बाहर निकलने का रास्ता भी समझ नहीं आ रहा था। एक अन्य होटल गेस्ट तपनज्योति मंडल ने अपने भयावह अनुभव के बारे में बताया। उनके मुताबिक, वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ करीब 45 मिनट तक कमरे में फंसे रहे। आग की वजह से कमरे के दरवाजे से बाहर निकलना संभव नहीं था। उनके कमरे में खिड़की भी नहीं थी। ऐसे में परिवार ने बाथरूम की छत के पास बने एक रास्ते से बाहर निकलकर किसी तरह अपनी जान बचाई। इस दौरान मंडल की मां बेहोश हो गईं, जबकि उनकी बहन को भी चोटें आईं।

होटल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

तारापीठ धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु होटल और लॉज में ठहरते हैं। ऐसे में इस हादसे ने होटल और लॉज में फायर सेफ्टी मानकों और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे होटल जहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ ठहरते हैं, वहां आग लगने की स्थिति में तुरंत बाहर निकलने के लिए पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित निकासी मार्ग होना बेहद जरूरी है। इस हादसे के बाद प्रशासन द्वारा तारापीठ के होटल और लॉज का विशेष ऑडिट कराने का फैसला अहम माना जा रहा है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस और प्रशासन आग लगने के कारणों और होटल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि आग के समय होटल का फायर-फाइटिंग सिस्टम किस स्थिति में था और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। तारापीठ होटल अग्निकांड में 8 लोगों की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि होटल और लॉज में फायर सेफ्टी नियमों की निगरानी कितनी गंभीरता से की जा रही है। हादसे के बाद अब प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ आग की वजह पता लगाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि भविष्य में किसी होटल में ऐसी घटना होने पर लोगों की जान बचाने के लिए पर्याप्त और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद हो।