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तिवारी बघरा की सड़क पर उठे सवाल
मिर्जापुर के तिवारी बघरा गांव में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। गड्ढों और टूटे रास्ते के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सड़क की जल्द मरम्मत की मांग करते हुए स्थानीय विधायक रत्नाकर मिश्रा और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

मिर्जापुर: जिले के तिवारी बघरा गांव में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क लंबे समय से खराब है और जगह-जगह गड्ढों तथा टूटे हिस्सों के कारण आवागमन में परेशानी हो रही है। सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से जल्द मरम्मत की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक खराब सड़क का असर रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ रहा है। गांव से बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी स्थानों तक आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब होने की आशंका रहती है, जिससे कीचड़ और जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है।
सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में स्थानीय विधायक रत्नाकर मिश्रा के प्रति भी नाराजगी सामने आई है। लोगों का सवाल है कि जब ग्रामीण लगातार सड़क की समस्या उठाते रहे हैं तो इसके स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई कब होगी। हालांकि, उपलब्ध स्रोतों में विधायक रत्नाकर मिश्रा की इस विशेष सड़क मामले पर कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसलिए ग्रामीणों की नाराजगी को स्थानीय लोगों की शिकायत के रूप में देखा जाना चाहिए।
तिवारी बघरा मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र से जुड़ा गांव है। सरकारी और समाचार स्रोतों में भी बघरा तिवारी गांव का उल्लेख मिलता है। 2021 के पंचायत चुनाव परिणामों में यह गांव छानबे ब्लॉक के अंतर्गत दर्ज किया गया था। गांव की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सड़क सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। खराब सड़क केवल आवागमन की समस्या नहीं बनती, बल्कि आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों के स्कूल आने-जाने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भी परेशानी पैदा कर सकती है।
बघरा तिवारी गांव का नाम इससे पहले भी स्थानीय प्रशासनिक और सार्वजनिक मामलों में सामने आता रहा है। उदाहरण के लिए, 2022 में राजस्व, खनन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने गांव की पहाड़ी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर कथित अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की थी। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि सड़क की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और जरूरत के अनुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण का काम कराया जाए। साथ ही लोगों का कहना है कि सिर्फ अस्थायी पैचवर्क के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे सड़क लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।
ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण यही है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें बार-बार शिकायत न करनी पड़े। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर है। यदि सड़क की मरम्मत जल्द शुरू होती है तो इससे गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिल सकती है और लंबे समय से चली आ रही शिकायत का समाधान भी हो सकता है।
