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भूमि रिकॉर्ड में बड़ा डिजिटल बदलाव, 99.8% रिकॉर्ड ऑनलाइन

केंद्र सरकार भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। Digital India Land Records Modernization Programme के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के 99.8% Record of Rights का डिजिटलीकरण हो चुका है, जबकि 36.67 करोड़ भूमि पार्सलों को ULPIN यानी Bhu-Aadhaar दिया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य भूमि रिकॉर्ड, नक्शों और डिजिटल पहचान को जोड़कर जमीन से जुड़ी सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाना है।

Neha Sharma13 अग. 2026, 09:41 PM IST
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भूमि रिकॉर्ड में बड़ा डिजिटल बदलाव, 99.8% रिकॉर्ड ऑनलाइन

नई दिल्ली: जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, सटीक और आसानी से उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर लगातार जोर दे रही है। Digital India Land Records Modernization Programme (DILRMP) के तहत देश में भूमि रिकॉर्ड, नक्शों और पंजीकरण व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा काम हुआ है। सरकार के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध 99.8 प्रतिशत Record of Rights (RoR) का डिजिटलीकरण हो चुका है।

36.67 करोड़ भू-खंडों को मिला ULPIN

भूमि रिकॉर्ड को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान देने के लिए सरकार Unique Land Parcel Identification Number (ULPIN) व्यवस्था पर भी काम कर रही है। इसे आम तौर पर 'Bhu-Aadhaar' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 36.67 करोड़ भूमि पार्सलों को ULPIN आवंटित किया जा चुका है। यह एक विशिष्ट पहचान संख्या है, जो भू-खंड की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी होती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग रिकॉर्ड में एक ही जमीन की पहचान को लेकर होने वाली अस्पष्टता और दोहराव को कम करना है। ULPIN व्यवस्था के जरिए भविष्य में भूमि संबंधी अलग-अलग सेवाओं और रिकॉर्ड को एक-दूसरे से जोड़ना आसान हो सकता है। इससे जमीन की पहचान, रिकॉर्ड प्रबंधन और सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


जमीन के नक्शे भी हो रहे डिजिटल

भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के साथ cadastral maps यानी भू-नक्शों को भी डिजिटल किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, देश के 97.37 प्रतिशत cadastral maps का डिजिटलीकरण हो चुका है। नक्शों और लिखित भूमि रिकॉर्ड को आपस में जोड़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल रिकॉर्ड में जमीन का विवरण होना पर्याप्त नहीं है। जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमा और स्थान से संबंधित जानकारी भी रिकॉर्ड के साथ जुड़ी हो तो भूमि प्रशासन अधिक प्रभावी हो सकता है।


घर बैठे मिल सकते हैं डिजिटल भूमि रिकॉर्ड

डिजिटलीकरण का सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों के लिए रिकॉर्ड तक आसान पहुंच के रूप में सामने आ रहा है। सरकार के अनुसार, 19 राज्यों में नागरिक घर बैठे digitally signed और legally valid land records डाउनलोड कर सकते हैं। इससे जमीन के दस्तावेज हासिल करने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से रिकॉर्ड की जांच और साझा करना भी आसान होता है।


बैंकों के लिए भी आसान होगी जमीन की जांच

डिजिटल भूमि रिकॉर्ड का फायदा केवल जमीन मालिकों तक सीमित नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन तरीके से mortgage यानी गिरवी रखी गई संपत्ति का सत्यापन कर सकते हैं। इससे जमीन या संपत्ति के आधार पर ऋण लेने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है। भूमि रिकॉर्ड और बैंकिंग व्यवस्था के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत होने से दस्तावेजों की जांच में लगने वाला समय कम हो सकता है।


संपत्ति विवाद और धोखाधड़ी कम करने की कोशिश

भूमि विवादों का एक बड़ा कारण रिकॉर्ड में अस्पष्टता, पुराने दस्तावेज, अलग-अलग विभागों में मौजूद जानकारी और जमीन की सीमाओं को लेकर विवाद होता है। DILRMP का उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना तथा भूमि एवं संपत्ति विवादों की गुंजाइश कम करना है। ULPIN जैसी व्यवस्था जमीन की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान बनाने की दिशा में कदम है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इसका उद्देश्य रिकॉर्ड में दोहराव को कम करना और एक अधिक एकीकृत भूमि व्यवस्था तैयार करना है।


शहरी जमीन के लिए NAKSHA योजना

ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड के साथ-साथ सरकार शहरी क्षेत्रों में भी डिजिटल भूमि डेटा तैयार करने पर काम कर रही है। इसके लिए NAKSHA (National Geospatial Knowledge-based Land Survey of Urban Habitations) पायलट कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सरकार के अनुसार, दिसंबर 2025 तक 116 Urban Local Bodies में aerial survey पूरा किया गया था। इन सर्वेक्षणों के जरिए लगभग 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को high-resolution imagery के माध्यम से कवर किया गया। इसका उद्देश्य शहरी भूमि पार्सलों का GIS आधारित व्यापक डेटाबेस तैयार करना है, जिससे भविष्य में शहरी नियोजन और भूमि प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सके।


SVAMITVA से गांवों में संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड

ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति की मैपिंग के लिए SVAMITVA योजना के तहत ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, दिसंबर 2025 तक 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा किया जा चुका था और करीब 1.82 लाख गांवों में 2.76 करोड़ Property Cards तैयार किए गए थे। उत्तर प्रदेश में भी इस दिशा में बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। 13 जुलाई 2026 तक राज्य के अधिसूचित 90,573 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका था और करीब 67 हजार गांवों में 1.01 करोड़ Property Cards वितरित किए जा चुके थे।


ULPIN और DIGIPIN को जोड़ने पर भी काम

जुलाई 2026 में भूमि संसाधन विभाग ने ULPIN और DIGIPIN के बीच संभावित एकीकरण को लेकर राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान और डाक विभाग के साथ बैठक की। ULPIN जमीन के भू-खंड को डिजिटल पहचान देता है, जबकि DIGIPIN किसी स्थान की सटीक geo-referenced पहचान से जुड़ा डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम है। दोनों प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनने से भविष्य में जमीन और स्थान से जुड़ी डिजिटल सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।


आगे क्या बदलेगा?

भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से सरकार का लक्ष्य केवल पुराने कागजी रिकॉर्ड को कंप्यूटर में डालना नहीं है। इसके जरिए भूमि रिकॉर्ड, नक्शे, पंजीकरण और संपत्ति की डिजिटल पहचान को एक-दूसरे से जोड़कर अधिक एकीकृत भूमि प्रशासन तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, डिजिटल रिकॉर्ड की सफलता के लिए पुराने रिकॉर्ड की गलतियों को ठीक करना, रिकॉर्ड और नक्शों का सही मिलान करना तथा राज्यों की अलग-अलग भूमि प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा।


आंकड़ों में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

  • 99.8% — ग्रामीण Record of Rights का डिजिटलीकरण
  • 97.37% — cadastral maps का डिजिटलीकरण
  • 36.67 करोड़ — ULPIN प्राप्त भूमि पार्सल
  • 19 राज्य — जहां घर बैठे digitally signed land records उपलब्ध
  • 406 जिले — जहां बैंक ऑनलाइन mortgage verification कर सकते हैं
  • 116 शहरी निकाय — NAKSHA के तहत aerial survey पूरा
  • 3.28 लाख गांव — SVAMITVA के तहत ड्रोन सर्वे पूरा होने का आंकड़ा (दिसंबर 2025 तक)
भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भारत में जमीन से जुड़े प्रशासन को कागजी व्यवस्था से डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जाने की बड़ी प्रक्रिया है। रिकॉर्ड, नक्शे और भू-खंड की डिजिटल पहचान को जोड़ने से नागरिकों के लिए सेवाएं आसान होने, पारदर्शिता बढ़ने और भूमि विवादों को कम करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।