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महाराष्ट्र में पशुधन बीमा योजना में सुधार; सरकार ने जारी किया नया संशोधन पत्र l
महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन अभियान के तहत लागू पशुधन बीमा योजना में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इस संशोधन के अनुसार, प्रति परिवार अधिकतम 10 पशुधन इकाइयों तक ही सरकारी सहायता के साथ बीमा का लाभ मिलेगा, जबकि अतिरिक्त पशुधन के लिए प्रीमियम स्वयं वहन करना होगा। साथ ही, बीमा दावों की स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की अनिवार्यता और समयसीमा को स्पष्ट किया गया है, जिससे पशुपालकों को समय पर और सही लाभ मिल सके।

महाराष्ट्र सरकार के पशुसंवर्धन, दुग्ध विकास एवं मत्स्यव्यवसाय विभाग ने राज्य के पशुपालकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘पशुधन बीमा योजना’ में व्यापक सुधार किए हैं। यह योजना राष्ट्रीय पशुधन अभियान (NLM) के अंतर्गत संचालित की जाती है और इसका उद्देश्य पशुपालकों को उनके पशुओं की आकस्मिक मृत्यु या नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। हाल ही में जारी संशोधन पत्र के माध्यम से सरकार ने योजना के कई प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित और प्रभावी बनाया है।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब प्रत्येक परिवार को अधिकतम 10 पशुधन इकाइयों तक ही सरकारी अनुदान के साथ बीमा का लाभ मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सीमित संसाधनों का उपयोग अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए किया जाए। यदि किसी पशुपालक के पास 10 से अधिक पशुधन हैं और वह सभी का बीमा करवाना चाहता है, तो अतिरिक्त पशुओं के लिए बीमा प्रीमियम उसे स्वयं भुगतान करना होगा। इस व्यवस्था से योजना का संतुलित और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, बीमा दावों के निपटान की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले जहां प्रस्ताव को 5 दिनों के भीतर स्वीकृत करना आवश्यक था, वहीं अब यह प्रावधान जोड़ा गया है कि सभी आवश्यक दस्तावेजों की पूर्णता के बाद ही 5 दिनों की समयसीमा लागू होगी। इसका उद्देश्य अपूर्ण दस्तावेजों के कारण होने वाली देरी और विवादों को कम करना है। अब संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदन पूरी तरह से सही और प्रमाणित हो, तभी उसे निर्धारित समय में मंजूरी दी जाएगी।
सरकार ने इस संशोधन के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है। योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक कागजी प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे पशुपालकों को किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बीमा कंपनियां और संबंधित विभाग समय पर दावों का निपटान करें, ताकि पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से राहत मिल सके।
यह संशोधित आदेश 6 अगस्त 2026 को जारी किया गया है और इसके लागू होने के बाद राज्यभर में पशुधन बीमा योजना की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सुधारों से न केवल योजना की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि पशुपालकों का भरोसा भी मजबूत होगा। भविष्य में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी सहायक साबित हो सकता है, क्योंकि पशुपालन राज्य के कई हिस्सों में आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
