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महाराष्ट्र में 63 जंगली हाथियों की मौजूदगी, गडचिरोली में सबसे ज्यादा संख्या

महाराष्ट्र में 63 जंगली हाथियों की मौजूदगी का अनुमान सामने आया है। इनमें 26 हाथी पश्चिमी घाट क्षेत्र में, जबकि 37 हाथी गडचिरोली क्षेत्र में हैं। हाथियों की यह मौजूदगी राज्य में वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Priyanka Gaikwad12 अग. 2026, 08:30 PM IST
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महाराष्ट्र में 63 जंगली हाथियों की मौजूदगी, गडचिरोली में सबसे ज्यादा संख्या
महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट से लेकर गडचिरोली तक जंगली हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। ‘स्टेटस ऑफ एलिफेंट्स इन इंडिया’ रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में कुल 63 हाथियों का अनुमान है। इनमें 26 हाथी पश्चिमी घाट क्षेत्र में, जबकि 37 हाथी गडचिरोली परिसर में होने की जानकारी सामने आई है। गडचिरोली में हाथियों की मौजूदगी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 2021 में ओडिशा से झारखंड और छत्तीसगढ़ के रास्ते 22 हाथियों का एक झुंड गडचिरोली पहुंचा था। गडचिरोली के घने जंगलों में भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र हाथियों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके चलते हाथियों की आवाजाही इस क्षेत्र में लगातार वन विभाग की निगरानी में रहती है।

पश्चिमी घाट क्षेत्र में भी पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की गतिविधियां सामने आई हैं। सिंधुदुर्ग और कोल्हापुर जिलों के जंगलों में हाथियों की आवाजाही देखी गई है। कर्नाटक और अन्य पड़ोसी राज्यों के जंगलों से हाथियों के महाराष्ट्र में आने-जाने के कारण पश्चिमी घाट का वन्यजीव कॉरिडोर उनके लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, जंगलों से हाथियों के गांवों और खेती वाले इलाकों की ओर आने पर किसानों को फसलों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई बार हाथियों और इंसानों का आमना-सामना होने से संघर्ष की स्थिति भी पैदा होती है। इसलिए हाथियों के प्राकृतिक आवास, जंगलों की निरंतरता और उनके पारंपरिक आवागमन मार्गों को सुरक्षित रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर उपलब्ध रहना बेहद महत्वपूर्ण है। जंगलों के बीच सड़क, खेती और अन्य मानवीय गतिविधियां बढ़ने से हाथियों के पारंपरिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। इससे हाथियों के गांवों की ओर आने की संभावना बढ़ती है और मानव-हाथी संघर्ष का खतरा भी बढ़ सकता है। देशभर में भी हाथियों के संरक्षण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। नई आबादी आकलन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल 22 हजार 446 जंगली हाथियों का अनुमान लगाया गया है। कर्नाटक में सबसे अधिक 6 हजार 13 हाथी हैं।

इसके बाद असम में 4 हजार 159 और तमिलनाडु में 3 हजार 136 हाथियों का अनुमान दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र में 63 हाथियों की मौजूदगी राज्य के लिए वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के मार्गों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ स्थानीय लोगों और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। आने वाले समय में मानव-हाथी संघर्ष को कम करना और हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए कॉरिडोर बचाए रखना वन विभाग के सामने अहम चुनौती रहेगी।