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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: CAT में पैरवी करने वाले वकीलों की फीस बढ़ी, 3 अगस्त से नई दरें लागू

महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों से जुड़े सेवा मामलों की पैरवी करने वाले पैनल वकीलों की फीस में बड़ा संशोधन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के 3 अगस्त 2026 के शासन निर्णय के बाद ‘A’ और ‘B’ पैनल के वकीलों के लिए अलग-अलग नई फीस दरें लागू हो गई हैं। अंतिम सुनवाई से लेकर हलफनामे, लिखित जवाब और कानूनी सलाह तक के लिए अब पहले से संशोधित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

Sonali08 अग. 2026, 05:39 PM IST
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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: CAT में पैरवी करने वाले वकीलों की फीस बढ़ी, 3 अगस्त से नई दरें लागू

मुंबई:

 महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के समक्ष अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों से जुड़े सेवा मामलों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले पैनल वकीलों की फीस में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 3 अगस्त 2026 को इस संबंध में शासन निर्णय जारी किया है।


सरकार ने क्यों बढ़ाई फीस?

शासन निर्णय के मुताबिक, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से संबंधित सेवा मामलों में समय-समय पर CAT के समक्ष याचिकाएं दाखिल होती हैं। इन मामलों में महाराष्ट्र सरकार की ओर से पैरवी के लिए राज्य सरकार ने पैनल वकीलों की व्यवस्था की है। इन वकीलों को पहले से निर्धारित दरों के अनुसार फीस दी जाती थी। फीस की इन दरों में बढ़ोतरी की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने अब संशोधित दरों को मंजूरी दी है।


अब कितनी मिलेगी फीस?

नए शासन निर्णय के अनुसार प्रत्यक्ष सुनवाई के लिए ‘A’ पैनल के वकील को ₹3,750 प्रतिदिन और ‘B’ पैनल के वकील को ₹2,500 प्रतिदिन मिलेंगे। याचिका की अंतिम सुनवाई के लिए ‘A’ पैनल को ₹7,500 और ‘B’ पैनल को ₹5,000 की फीस तय की गई है। हलफनामे या लिखित जवाब की जांच के लिए दोनों पैनल की फीस क्रमशः ₹3,750 और ₹2,500 निर्धारित की गई है। लिखित अभिमत लेने के लिए भी यही दरें लागू होंगी। चर्चा और कानूनी सलाह के लिए अलग फीस ऐसे अन्य कार्य जो निर्धारित श्रेणियों में शामिल नहीं हैं, जैसे चर्चा या कानूनी सलाह, उनके लिए ‘A’ पैनल के वकील को ₹1,200 और ‘B’ पैनल के वकील को ₹960 फीस दी जाएगी।


3 अगस्त से लागू हुईं नई दरें

महाराष्ट्र सरकार के आदेश के मुताबिक संशोधित फीस दरें शासन निर्णय की तारीख यानी 3 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगी। बाकी नियम और शर्तें 21 जुलाई 1992 के संबंधित सामान्य प्रशासन विभाग के शासन निर्णय के अनुसार लागू रहेंगी।


फीस भुगतान से पहले जांच जरूरी

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वकीलों की ओर से फीस की मांग किए जाने पर भुगतान से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि मांग उचित है। बढ़ी हुई फीस का खर्च संबंधित स्वीकृत बजट प्रावधान से पूरा किया जाएगा।


CAT की भूमिका क्या है?

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी CAT सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े सेवा मामलों के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक मंच है। प्रशासनिक अधिकरण व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवा से जुड़े विवादों के समाधान के लिए विशेष मंच उपलब्ध कराना है। महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला खास तौर पर उन मामलों से संबंधित है जिनमें अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी सेवा संबंधी विवादों को लेकर CAT का रुख करते हैं और राज्य सरकार की ओर से इन मामलों में पैनल वकील पैरवी करते हैं। यह बात सीधे महाराष्ट्र सरकार के शासन निर्णय में दर्ज है।


क्या बदला, एक नजर में

‘A’ पैनल — प्रत्यक्ष सुनवाई ₹3,750, अंतिम सुनवाई ₹7,500, हलफनामा/लिखित जवाब ₹3,750, अन्य चर्चा/सलाह ₹1,200।

‘B’ पैनल — प्रत्यक्ष सुनवाई ₹2,500, अंतिम सुनवाई ₹5,000, हलफनामा/लिखित जवाब ₹2,500, अन्य चर्चा/सलाह ₹960।


निष्कर्ष

महाराष्ट्र सरकार ने CAT में अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों से जुड़े सेवा मामलों में राज्य की ओर से पैरवी करने वाले पैनल वकीलों की फीस संशोधित कर दी है। नई दरें 3 अगस्त 2026 से प्रभावी हैं। इस फैसले की पुष्टि आधिकारिक सरकारी शासन निर्णय से होती है, जबकि इस विशिष्ट आदेश पर प्रमुख समाचार संस्थानों की स्वतंत्र रिपोर्ट फिलहाल उपलब्ध नहीं मिली है।