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मोहनलालगंज में वकीलों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, नई रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ धरना

राजधानी लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील में शासन की नई रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार को मोहनलालगंज बार एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने उप-निबंधक कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के निर्णय के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने शासन से अधिसूचना तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलन के कारण तहसील परिसर में रजिस्ट्री, दस्तावेज सत्यापन और अन्य प्रशासनिक कार्य लगातार दूसरे दिन भी बुरी तरह प्रभावित रहे।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:09 PM IST
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मोहनलालगंज में वकीलों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, नई रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ धरना


अधिवक्ताओं का विरोध उस नई व्यवस्था को लेकर है, जिसके तहत मोहनलालगंज क्षेत्र की संपत्तियों की रजिस्ट्री अब केवल स्थानीय उप-निबंधक कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगी। नई अधिसूचना लागू होने के बाद संबंधित संपत्तियों की रजिस्ट्री लखनऊ सदर के अन्य उप-निबंधक कार्यालयों में भी कराई जा सकेगी। बार एसोसिएशन का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर वर्षों से स्थापित राजस्व और रजिस्ट्री प्रणाली को प्रभावित करेगी तथा इससे अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। धरना-स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने यह निर्णय बिना किसी पूर्व परामर्श के लागू कर दिया। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करने से पहले स्थानीय बार एसोसिएशन, दस्तावेज लेखक संघ और संबंधित हितधारकों से राय ली जानी चाहिए थी। उनका दावा है कि यदि यह व्यवस्था लागू रहती है तो मोहनलालगंज तहसील में कार्यरत सैकड़ों अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की आजीविका प्रभावित होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर मिलने वाली कानूनी और दस्तावेजी सेवाओं का भी विकेंद्रीकरण होगा, जिससे क्षेत्रीय पेशेवरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।


बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। पहले जहां क्षेत्र के लोगों को अपने संपत्ति संबंधी कार्यों के लिए केवल मोहनलालगंज उप-निबंधक कार्यालय जाना पड़ता था, वहीं अब उन्हें विभिन्न उप-निबंधक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इससे समय, परिवहन व्यय और प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ने की आशंका है। अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल पेशेगत हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे आम जनता की सुविधा से जुड़ा मुद्दा भी मानते हैं। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रजिस्ट्री सेवाओं को कमजोर करने के बजाय उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाया जाना चाहिए, ताकि नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं आसानी से मिल सकें।


हड़ताल का सीधा असर तहसील के दैनिक कामकाज पर देखने को मिला। उप-निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री का कार्य लगभग ठप रहा, जबकि दस्तावेज सत्यापन, बैनामा और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हुईं। बड़ी संख्या में संपत्ति की खरीद-बिक्री, बंधक, उपहार विलेख और अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए पहुंचे लोगों को बिना कार्य कराए वापस लौटना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि उन्हें पहले से तय समय पर रजिस्ट्री कराने आना पड़ा था, लेकिन हड़ताल के कारण उनका काम नहीं हो सका, जिससे आर्थिक और समय दोनों का नुकसान हुआ। तहसील परिसर में मौजूद नागरिकों ने प्रशासन और शासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं और सरकार के बीच बातचीत के माध्यम से विवाद समाप्त होना चाहिए ताकि आम जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े। कई लोगों ने यह भी कहा कि रजिस्ट्री कार्य रुकने से संपत्ति से जुड़े अन्य लेन-देन और बैंकिंग प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ रहा है।


बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने शीघ्र कोई सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के अन्य बार संगठनों से भी समर्थन मांगा जा सकता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे अपने अधिकारों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल शासन और अधिवक्ताओं के बीच गतिरोध बना हुआ है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में यदि जल्द कोई सहमति नहीं बनती है तो मोहनलालगंज तहसील में रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक कार्य आने वाले दिनों में भी प्रभावित रह सकते हैं, जिससे नागरिकों की परेशानियां और बढ़ने की आशंका है।