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यूपी में सड़कों का जाल होगा और मजबूत, ₹15,400 करोड़ मंजूर

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और नए लिंक मार्गों के विकास के लिए ₹15,400 करोड़ का प्रावधान किया है। राशि का बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण पर खर्च किया जाएगा। विंध्य एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार, पूर्वांचल लिंक स्पर और जेवर एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं पर फोकस है। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के साथ औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।

Neha Sharma13 अग. 2026, 09:42 PM IST
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यूपी में सड़कों का जाल होगा और मजबूत, ₹15,400 करोड़ मंजूर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और नए संपर्क मार्गों के विकास के लिए ₹15,400 करोड़ के प्रावधान को मंजूरी दी है। 2026-27 के अनुपूरक बजट में रखे गए इस प्रावधान का बड़ा हिस्सा विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण पर खर्च किया जाना है। इससे राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच सड़क संपर्क मजबूत करने की योजना को गति मिलने की उम्मीद है।


विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए ₹6,500 करोड़

इस पैकेज में सबसे बड़ा प्रावधान प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए किया गया है। सरकार ने इसके भूमि अधिग्रहण के लिए करीब ₹6,500 करोड़ रखे हैं। प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को सोनभद्र से जोड़ने की योजना का हिस्सा है। इसका मार्ग प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी और चंदौली जैसे जिलों से होकर प्रस्तावित है। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश और विंध्य क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है।


गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार पर भी जोर

सरकार ने मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार से संबंधित भूमि अधिग्रहण के लिए करीब ₹5,700 करोड़ का प्रावधान किया है। गंगा एक्सप्रेसवे राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों के बीच तेज सड़क संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


जेवर एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेसवे तक नया संपर्क

बजट में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेसवे तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए भी करीब ₹250 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह मार्ग बुलंदशहर के रास्ते प्रस्तावित है। यह परियोजना जेवर एयरपोर्ट को राज्य के बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के शहरों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की संभावना है।


आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी

सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से गंगा एक्सप्रेसवे तक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए भी करीब ₹400 करोड़ का प्रावधान किया है। यह संपर्क मार्ग हरदोई होते हुए फर्रुखाबाद क्षेत्र को जोड़ने की योजना से संबंधित है। ऐसे लिंक एक्सप्रेसवे राज्य के मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे लंबी दूरी के आवागमन और माल ढुलाई के लिए वैकल्पिक तथा तेज मार्ग उपलब्ध होने की उम्मीद है।


पूर्वांचल लिंक स्पर के लिए ₹2,300 करोड़

पूर्वांचल लिंक स्पर के लिए करीब ₹2,300 करोड़ का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित संपर्क मार्ग सोनभद्र को चंदौली और गाजीपुर जिलों से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए है और इसे विंध्य एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ा जाना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के इन क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और औद्योगिक गतिविधियों को लाभ मिलने की संभावना है।


भूमि अधिग्रहण क्यों अहम?

इन परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक भूमि अधिग्रहण है। नए एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में जमीन की जरूरत होती है। इसलिए सरकार के बजट में भूमि अधिग्रहण के लिए अलग से बड़ी राशि रखना परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में जमीन की पहचान, मालिकाना रिकॉर्ड, मुआवजा और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होगा।


एक्सप्रेसवे से क्या बदल सकता है?

उत्तर प्रदेश पहले से ही देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। नए लिंक और विस्तार परियोजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक व्यापक सड़क नेटवर्क तैयार करना है।

  • यात्रा का समय कम हो सकता है।

  • माल ढुलाई अधिक तेज हो सकती है।

  • औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

  • नए आर्थिक केंद्र विकसित हो सकते हैं।

  • छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े बाजारों से बेहतर संपर्क मिल सकता है।

हालांकि, इन संभावित लाभों का वास्तविक असर परियोजनाओं के समय पर निर्माण और आसपास के क्षेत्रों में अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर निर्भर करेगा।


यूपी के भूमि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए बड़ा फैसला

₹15,400 करोड़ का यह प्रावधान केवल सड़क निर्माण से जुड़ा बजट नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा भूमि अधिग्रहण के लिए रखा गया है, इसलिए इसका सीधा संबंध भूमि प्रबंधन, मुआवजा और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से भी है। राज्य सरकार के लिए अब चुनौती यह होगी कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करते हुए परियोजनाओं को तय समयसीमा में आगे बढ़ाया जाए। साथ ही, अधिग्रहित जमीन और प्रभावित परिवारों से जुड़े मामलों का उचित निस्तारण भी महत्वपूर्ण रहेगा।


एक नजर में प्रमुख प्रावधान

परियोजनाप्रमुख प्रावधान
विंध्य एक्सप्रेसवे₹6,500 करोड़
मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार₹5,700 करोड़
पूर्वांचल लिंक स्पर₹2,300 करोड़
आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक₹400 करोड़
जेवर एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक₹250 करोड़

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह पैकेज राज्य के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। भूमि अधिग्रहण के लिए बड़ी राशि का प्रावधान यह संकेत देता है कि सरकार नई परियोजनाओं को निर्माण के अगले चरण तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।