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राष्ट्रीय सुरक्षा से आपदा राहत तक, टेरिटोरियल आर्मी की बढ़ेगी भूमिका
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में टेरिटोरियल आर्मी की भूमिका की समीक्षा की। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। सरकार ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए टेरिटोरियल आर्मी को और अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया।
Neha Sharma06 अग. 2026, 06:37 PM IST

नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026: देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति (Parliamentary Consultative Committee) की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य विषय टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) रहा, जिसमें इसके वर्तमान कार्यों, उपलब्धियों और भविष्य की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को टेरिटोरियल आर्मी के उद्देश्य, संगठन, संचालन और अब तक के योगदान की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही समिति के सदस्यों ने इस बल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि टेरिटोरियल आर्मी केवल देश की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने इसे "सिटिजन-सोल्जर" (Citizen-Soldier) की अवधारणा का सबसे सशक्त उदाहरण बताया। उनके अनुसार, इस बल के सदस्य सामान्य जीवन में अपने-अपने पेशे से जुड़े रहते हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर सैन्य वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं।
रक्षा मंत्री ने बताया कि टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सशस्त्र बलों के लिए प्रशिक्षित रिजर्व बल के रूप में कार्य करती है। किसी भी आपातकाल, युद्ध या विशेष परिस्थिति में इसके जवानों को तुरंत तैनात किया जा सकता है। सेवा पूरी करने के बाद यही जवान समाज और सेना के बीच एक मजबूत कड़ी बनते हैं तथा युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।
वर्तमान में टेरिटोरियल आर्मी में लगभग 44,400 प्रशिक्षित जवान और 59 विभिन्न इकाइयाँ कार्यरत हैं। यह बल बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में अग्रिम पंक्ति में काम करता है। केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात और हाल ही में असम में आई बाढ़ के दौरान भी इसने राहत, बचाव और चिकित्सा सहायता में अहम योगदान दिया।
बैठक में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। रक्षा मंत्री ने बताया कि टेरिटोरियल आर्मी की इकोलॉजिकल टास्क फोर्स अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगा चुकी है, जिनकी 80–85 प्रतिशत तक जीवित रहने की दर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री के Mission LiFE और पंचामृत लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में 'हर घर तिरंगा' अभियान को सफल बनाने में भी टेरिटोरियल आर्मी की भूमिका सराहनीय रही है।
बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य टेरिटोरियल आर्मी को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों और आपदा प्रबंधन के लिए और अधिक सक्षम बनाना था।
