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रेलवे के 4 मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी, 410 किमी बढ़ेगा रेल नेटवर्क l

केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे के नेटवर्क और क्षमता बढ़ाने के लिए ₹9,450 करोड़ की लागत वाली चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में करीब 410 किलोमीटर नया ट्रैक जोड़ा जाएगा। परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे करीब 6,448 गांवों के लगभग 60 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। माल ढुलाई क्षमता में भी करीब 76 MTPA की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

Kashish Rai21 अग. 2026, 10:00 AM IST
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रेलवे के 4 मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी, 410 किमी बढ़ेगा रेल नेटवर्क l

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने भारतीय रेलवे की चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब ₹9,450 करोड़ है और इन्हें वित्त वर्ष 2030-31 तक पूरा करने की योजना है। रेल मंत्रालय की इन चार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इनका उद्देश्य रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाना, भीड़ और ट्रैफिक को कम करना तथा यात्रियों और माल की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाना है।

किन रेल मार्गों पर होगा काम?

कैबिनेट से मंजूर चार परियोजनाओं में शामिल हैं:

  1. खड़गपुर–भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन – 173 किलोमीटर, पश्चिम बंगाल और ओडिशा
  2. भद्रक–हरिदासपुर चौथी लाइन – 75 किलोमीटर, ओडिशा
  3. गुम्मिडिपुंडी–गुडूर तीसरी और चौथी लाइन – 90 किलोमीटर, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु
  4. कटक–पारादीप (बड़ाबांधा) तीसरी और चौथी लाइन – 72 किलोमीटर, ओडिशा

इन परियोजनाओं से आठ जिलों में रेल कनेक्टिविटी और परिचालन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

6,448 गांवों को मिलेगा फायदा

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग 6,448 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इन गांवों में करीब 60 लाख की आबादी रहती है। रेल नेटवर्क के विस्तार से लोगों की आवाजाही के साथ-साथ सामान और सेवाओं के परिवहन को भी गति मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार के मुताबिक, इससे यात्रियों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

नई रेल क्षमता से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। इनमें कुलडीहा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, भितरकनिका नेशनल पार्क, मां भद्रकाली मंदिर, मां धामराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तलसारी-उदयपुर और चांदीपुर बीच, पुलिकट झील, नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य, भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर, गड़ा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सारला मंदिर, धाबलेश्वर मंदिर और ललितगिरी बौद्ध स्थल शामिल हैं।

माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी

इन रेल परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य माल परिवहन की क्षमता बढ़ाना भी है। इन मार्गों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसे सामानों की आवाजाही होती है। क्षमता बढ़ने के बाद रेलवे को अतिरिक्त 76 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) माल ढुलाई मिलने का अनुमान है। इससे देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और उद्योगों तक कच्चे माल एवं तैयार उत्पादों की आवाजाही को तेज करने में मदद मिल सकती है।

तेल आयात और कार्बन उत्सर्जन में कमी का दावा

सरकार के अनुसार, रेलवे ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर परिवहन माध्यम होने के कारण इन परियोजनाओं से करीब 13 करोड़ लीटर तेल आयात कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही लगभग 65 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।


सरकार ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन में यह कमी लगभग 2.60 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर मानी जा सकती है। इस तरह परियोजनाओं से रेल क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ देश के जलवायु लक्ष्यों और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के मुताबिक, इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से रेलवे की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी और यात्रियों तथा माल परिवहन के लिए सेवा की विश्वसनीयता में सुधार आएगा।