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‘रोड रेज FIR में डिजिटल फुटप्रिंट क्यों चाहिए?’ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय मामले में SC ने UP Police से मांगा जवाब

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज रोड रेज FIR की जांच में सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी जुटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि सड़क विवाद से जुड़े मामले में आरोपी के ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? साथ ही गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से यह स्पष्ट करने को कहा है कि X से कौन-कौन सी जानकारी मांगी गई और उसका FIR की जांच से क्या संबंध है।

Sonali07 सित. 2026, 06:40 PM IST
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‘रोड रेज FIR में डिजिटल फुटप्रिंट क्यों चाहिए?’ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय मामले में SC ने UP Police से मांगा जवाब


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी जानकारी मांगने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस से जवाब मांगा। कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, जिसे पहले Twitter के नाम से जाना जाता था, से किस तरह की जानकारी मांगी गई है और वह जानकारी किस FIR की जांच के लिए आवश्यक है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।


क्या है पूरा मामला?

अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद पुलिस की ओर से उनके खिलाफ दर्ज रोड रेज FIR को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इसी मामले में पुलिस ने X को नोटिस भेजकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट से संबंधित विभिन्न जानकारियां मांगी थीं। उपाध्याय की ओर से इस नोटिस को भी चुनौती दी गई। उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि पुलिस की मांग काफी व्यापक है। उनके मुताबिक पुलिस ने 18 अगस्त की कथित रोड रेज घटना से संबंधित FIR की जांच के लिए 1 जून से सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी मांगी है।


मोबाइल डिवाइस की जानकारी मांगने पर भी सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट में लॉग-इन करने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल डिवाइस से जुड़ी जानकारी भी मांगी है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने आशंका जताई कि इस तरह की व्यापक डिजिटल जानकारी जुटाने से पत्रकार के स्रोतों और अन्य गोपनीय जानकारियों तक पुलिस की पहुंच हो सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया डेटा हासिल करने को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की मांग की।


‘रोड रेज में डिजिटल फुटप्रिंट क्यों?’

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पुलिस से सीधे सवाल किया कि जब मामला रोड रेज का है तो आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट की जरूरत क्यों है? उन्होंने कहा, “रोड रेज केस में आपको आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट की जरूरत क्यों है?” CJI ने भी डिजिटल जांच की सीमा और निजता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति की गोपनीय जानकारी पुलिस के हाथ लगती है और उसे रिकॉर्ड पर लाया जाता है, तो इससे निजता प्रभावित हो सकती है।


SC ने मांगा स्पष्ट जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि X से मांगी गई जानकारी संबंधित रोड रेज FIR या अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ पहले दर्ज किसी अन्य FIR की जांच के लिए क्यों आवश्यक है। कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा मांगी गई ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। 


अभिषेक उपाध्याय ने जांच में सहयोग की बात कही

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने रोड रेज मामले की जांच पूरी करने में पुलिस अधिकारियों को सहयोग करने की इच्छा जताई है। यानी फिलहाल विवाद का एक प्रमुख मुद्दा FIR की जांच के लिए डिजिटल डेटा जुटाने की सीमा और उसकी आवश्यकता है।


पुलिस ने कहा- आरोपों की जांच जरूरी

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि याचिका का मूल उद्देश्य FIR रद्द कराना है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतकर्ता की चोटों से संबंधित मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट मौजूद है और मामले में जांच की जरूरत है। राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में अधिकारियों के खिलाफ कई व्यापक आरोप लगाए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई में मुख्य रूप से डिजिटल जानकारी हासिल करने की सीमा और उससे जुड़े निजता के सवाल पर ध्यान केंद्रित किया।


CJI ने गाइडलाइंस की जरूरत पर उठाया सवाल

CJI सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल फुटप्रिंट की जांच में यह तय करना जरूरी है कि उसकी सीमा क्या होनी चाहिए और इसके लिए किस तरह के दिशानिर्देश होने चाहिए। खासकर तब, जब जांच एजेंसियों को किसी व्यक्ति की संवेदनशील या गोपनीय जानकारी तक पहुंच मिल सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई में पुलिस के हलफनामे के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि X से कौन-सी जानकारी मांगी गई थी और रोड रेज FIR की जांच में उसकी वास्तविक आवश्यकता क्या थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी न तो FIR को रद्द किया है और न ही पुलिस की जांच को अवैध घोषित किया है। फिलहाल कोर्ट ने डिजिटल जानकारी मांगने की सीमा और उसके औचित्य पर पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है।