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शेयर बाजार में नया Price Gap, Bank Stocks पर उठे सवाल

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में कुछ बैंक शेयरों के NSE और BSE Closing Prices में असामान्य अंतर देखने को मिला। IndusInd Bank के शेयर में दोनों एक्सचेंजों पर करीब ₹33 का अंतर दर्ज किया गया। AU Small Finance Bank, IDFC First Bank और Federal Bank में भी Price Gap देखा गया। विशेषज्ञों के मुताबिक Closing Auction System, कम Liquidity और Monthly Expiry इस उतार-चढ़ाव की प्रमुख वजहों में शामिल हो सकते हैं।

Neha Sharma29 अग. 2026, 07:57 PM IST
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शेयर बाजार में नया Price Gap, Bank Stocks पर उठे सवाल

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बैंकिंग शेयरों को लेकर एक असामान्य स्थिति सामने आई है। गुरुवार के Closing Auction Session के दौरान कुछ बैंक शेयरों की कीमतों में NSE और BSE के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। सबसे उल्लेखनीय मामला IndusInd Bank का रहा, जहां दोनों एक्सचेंजों पर अंतिम कीमत में करीब ₹33 का अंतर दर्ज किया गया। यह बैंक के लिए दो दशकों से ज्यादा समय में सबसे बड़ा Exchange Price Gap बताया गया है।


IndusInd Bank में करीब ₹33 का अंतर

गुरुवार के कारोबार के बाद IndusInd Bank का शेयर NSE पर ₹1,002.90 पर बंद हुआ। वहीं BSE पर शेयर करीब 3% गिरकर ₹970 पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर अंतिम कीमतों में लगभग ₹33 का अंतर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, IndusInd Bank के लिए यह दो दशकों से अधिक समय में सबसे बड़ा NSE-BSE closing price difference है।


सिर्फ IndusInd Bank ही नहीं

यह अंतर केवल IndusInd Bank तक सीमित नहीं रहा। AU Small Finance Bank, IDFC First Bank और Federal Bank जैसे अन्य बैंक शेयरों में भी NSE और BSE के अंतिम भाव में उल्लेखनीय अंतर देखा गया। गुरुवार के Closing Auction के दौरान BSE Bankex में भी काफी उतार-चढ़ाव रहा। इंडेक्स एक समय करीब 3.3% तक नीचे चला गया था और अंत में लगभग 1.7% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके बाद शुक्रवार को Bankex में करीब 1% की रिकवरी देखी गई।


क्या है Closing Auction System?

इस पूरे मामले का संबंध शेयर बाजार में लागू किए गए नए Closing Auction System से है। यह व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से लागू हुई और इसके तहत 200 से अधिक शेयरों के दिन के अंतिम भाव निर्धारित करने के लिए Auction Session का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सामान्य कारोबार खत्म होने के बाद एक निर्धारित अवधि में खरीद-बिक्री के ऑर्डर के आधार पर अंतिम कीमत तय होती है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद बाजार में कुछ असामान्य price movements और liquidity से जुड़े सवाल उठे हैं।


Monthly Expiry और कम Liquidity का असर

गुरुवार को Bank Index derivatives की monthly expiry भी थी। ऐसे समय में कुछ शेयरों में liquidity अपेक्षाकृत कम होने पर कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, कम liquidity और expiry-related activity ने कुछ छोटे बैंक शेयरों में अचानक price movements को बढ़ाया। यही वजह है कि Closing Auction के दौरान NSE और BSE पर कुछ शेयरों के भाव में सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा अंतर दिखाई दिया।


NSE और BSE पर अलग-अलग भाव क्यों?

सामान्य परिस्थितियों में एक ही शेयर की कीमत NSE और BSE पर बहुत ज्यादा अलग नहीं रहती, क्योंकि बाजार में मौजूद traders price difference का फायदा उठाकर कीमतों को करीब लाने की कोशिश करते हैं। लेकिन Closing Auction के दौरान दोनों एक्सचेंजों पर उपलब्ध orders और liquidity अलग-अलग हो सकती है। इससे कुछ समय के लिए दोनों जगह अंतिम कीमत अलग रह सकती है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, नए Auction Mechanism में यह अनुमान लगाना आसान नहीं है कि दोनों एक्सचेंजों पर अंतिम कीमत किस स्तर पर तय होगी। इससे तत्काल arbitrage, यानी price difference का फायदा उठाकर अंतर खत्म करने की प्रक्रिया, मुश्किल हो सकती है।


Market Manipulation को लेकर भी सवाल

इस असामान्य price gap ने नए Closing Auction System की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल बढ़ा दिए हैं। बाजार में इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि कम liquidity वाले समय में कीमतों में असामान्य बदलाव को रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। रिपोर्ट के अनुसार, SEBI ने हाल ही में दो कंपनियों को Auction Session के दौरान कथित price manipulation के मामले में बाजार से प्रतिबंधित किया था। इनमें JPMorgan Chase की एक इकाई भी शामिल थी। हालांकि, बैंक शेयरों में देखे गए price gaps को अपने आप में manipulation का प्रमाण नहीं माना जा सकता।


Traders की चिंता बढ़ी

बाजार में काम करने वाले कुछ traders और experts ने चिंता जताई है कि यदि एक ही शेयर की कीमत दो प्रमुख एक्सचेंजों पर कई प्रतिशत तक अलग दिखाई देती है, तो इससे market participants के भरोसे पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में एक trader के हवाले से कहा गया कि अलग-अलग एक्सचेंजों पर एक ही शेयर के closing price में करीब 3% तक का अंतर असामान्य है।


निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?

NSE और BSE के बीच कुछ समय के लिए price difference होना अपने आप में यह नहीं बताता कि किसी बैंक के fundamental performance में अचानक बड़ा बदलाव आया है। इस मामले में auction mechanism, liquidity और derivatives expiry जैसे market-structure factors महत्वपूर्ण रहे। हालांकि, लगातार बड़े price gaps बने रहने पर बाजार की पारदर्शिता और Closing Price की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसी वजह से नए Auction System की निगरानी पर बाजार की नजर बनी हुई है।


आगे क्या?

Closing Auction System अभी शुरुआती दौर में है और इसके काम करने के तरीके को लेकर बाजार में लगातार अनुभव सामने आ रहे हैं। बैंक शेयरों में हालिया price gap ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या NSE और BSE पर closing prices के बीच इतने बड़े अंतर को रोकने के लिए व्यवस्था में और सुधार की जरूरत है। फिलहाल IndusInd Bank, AU Small Finance Bank, IDFC First Bank और Federal Bank में देखे गए अंतर ने बाजार के नए Closing Auction Mechanism को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।