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सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, एक्सप्रेसवे पर डिजिटल स्पीड कंट्रोल सिस्टम लागू

15 अगस्त से दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर वैरिएबल स्पीड लिमिट पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। इसके तहत ट्रैफिक, समय और सड़क की स्थिति के अनुसार वाहनों की गति सीमा बदलेगी। डिजिटल डिस्प्ले और स्पीड कैमरों के जरिए नियमों का पालन कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना, ट्रैफिक को सुचारु बनाना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है।

Neha Sharma06 अग. 2026, 06:33 PM IST
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सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, एक्सप्रेसवे पर डिजिटल स्पीड कंट्रोल सिस्टम लागू
नई दिल्ली: सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और ट्रैफिक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर 15 अगस्त से देश का पहला वैरिएबल स्पीड लिमिट (Variable Speed Limit - VSL) पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत वाहनों की अधिकतम गति दिन, रात और ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार बदलती रहेगी। शुरुआत में यह प्रणाली अक्षरधाम से सराय काले खां के बीच लागू की जाएगी।

इस परियोजना के तहत एक्सप्रेसवे पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर वास्तविक समय (Real-Time) में लागू स्पीड लिमिट दिखाई जाएगी। इसके अलावा, स्पीड डिटेक्शन कैमरे भी लगाए गए हैं जो निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने वालों की पहचान करेंगे और नियमों का उल्लंघन करने पर चालान जारी किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, हर समय एक जैसी स्पीड लिमिट लागू रहने से कई बार ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नई प्रणाली में मौसम, ट्रैफिक का दबाव और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्पीड लिमिट तय की जाएगी। इससे वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

पायलट परियोजना के दौरान अलग-अलग समय के लिए अलग-अलग गति सीमा तय की गई है। देर रात से सुबह तक कारों के लिए अधिकतम गति 65 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 50 किमी प्रति घंटा रहेगी। सुबह से शाम तक यह सीमा कारों के लिए 55 किमी प्रति घंटा तथा भारी वाहनों के लिए 45 किमी प्रति घंटा होगी। वहीं शाम से रात तक कारों के लिए 60 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 40 किमी प्रति घंटा की गति सीमा लागू रहेगी।

इस प्रणाली को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि तीन महीने तक इस परियोजना के परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था सफल साबित होती है, तो इसे दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे के अन्य हिस्सों के साथ-साथ देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।

सरकार का मानना है कि यह पहल भारत में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक का प्रवाह भी अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।