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सरकारी जमीन बचाने की मांग, लक्ष्मीपुर गांव में ग्रामीणों का धरना जारी

झारखंड के गिरिडीह जिले के लक्ष्मीपुर गांव में सरकारी गैर-मजरूआ जमीन पर कथित अतिक्रमण के विरोध में ग्रामीणों का धरना जारी है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 15 एकड़ 28 डिसमिल जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जमीन की जांच, सीमांकन और कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले सरकारी बोर्ड लगाए जाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हालांकि, जमीन पर अतिक्रमण की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।

Neha Sharma21 अग. 2026, 08:13 PM IST
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सरकारी जमीन बचाने की मांग, लक्ष्मीपुर गांव में ग्रामीणों का धरना जारी

गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी अंचल के लक्ष्मीपुर गांव में सरकारी गैर-मजरूआ जमीन पर कथित अतिक्रमण के विरोध में ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर मकान बनाए जा रहे हैं। प्रशासन से कार्रवाई की मांग को लेकर यह धरना सोमवार से शुरू हुआ था और 20 अगस्त को चौथे दिन भी जारी रहा।


15 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, विवादित जमीन खाता संख्या 73 और प्लॉट संख्या 273 में दर्ज है। इसका कुल रकबा करीब 15 एकड़ 28 डिसमिल बताया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि यह गैर-मजरूआ सरकारी जमीन है और इस पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण कर मकान निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अतिक्रमण की जानकारी प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।


पहले लगाया गया था सरकारी बोर्ड

रिपोर्ट के अनुसार, इस जमीन पर पहले ही अंचल अधिकारी की ओर से सरकारी बोर्ड लगाया गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन पर निर्माण और अतिक्रमण की गतिविधियां नहीं रुकीं। इसी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा और सीमांकन के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाना चाहिए।


अंचल कार्यालय में दिया गया आवेदन

धरने से पहले मंटू शर्मा और अन्य ग्रामीणों ने तिसरी अंचल कार्यालय में लिखित आवेदन देकर सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण रोकने और जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की थी। ग्रामीणों के अनुसार, आवेदन के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने धरना शुरू किया।


प्रशासन से कार्रवाई की मांग

धरने पर बैठे ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि विवादित सरकारी जमीन की जांच कराई जाए और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो उसे हटाकर जमीन को सरकारी नियंत्रण में सुरक्षित किया जाए। धरने का नेतृत्व कर रहे मंटू शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि 15 एकड़ 28 डिसमिल सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त नहीं कराया गया तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। 20 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने शनिवार से भूख हड़ताल में बदलने की चेतावनी दी थी।


सरकारी जमीन की सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण?

सरकारी जमीन का उपयोग सार्वजनिक और प्रशासनिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है। इसलिए ऐसी भूमि के स्वामित्व, सीमांकन और अभिलेखों की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है। गिरिडीह जिला प्रशासन के राजस्व विभाग के अनुसार, राजस्व शाखा सरकारी जमीन के हस्तांतरण, बंदोबस्ती और पट्टे से जुड़े मामलों की निगरानी करती है। सरकारी भूमि को विभिन्न सरकारी परियोजनाओं और योजनाओं के लिए भी उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेख, खाता-प्लॉट विवरण, स्थल निरीक्षण और सीमांकन स जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलती है।


अब आगे क्या?

लक्ष्मीपुर गांव के मामले में आगे की कार्रवाई प्रशासन द्वारा किए जाने वाले स्थल निरीक्षण, राजस्व रिकॉर्ड की जांच और सीमांकन पर निर्भर करेगी। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। फिलहाल ग्रामीणों का धरना जारी है और वे प्रशासन से सरकारी जमीन को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं।


गिरिडीह के लक्ष्मीपुर गांव में 15 एकड़ 28 डिसमिल सरकारी गैर-मजरूआ जमीन को लेकर विवाद ने सरकारी भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण नियंत्रण का मुद्दा सामने ला दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन पर मकान निर्माण किया जा रहा है और प्रशासन से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। अब उनकी मांग है कि प्रशासन जमीन की जांच कराकर कथित अतिक्रमण हटाए और सरकारी भूमि को सुरक्षित करे।