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सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर जमानत दिलाने की कोशिश, सुकेश चंद्रशेखर दोषी करार

दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर को 2017 के एक मामले में दोषी करार दिया है। अदालत के मुताबिक, सुकेश ने पुलिस हिरासत के दौरान एक कांस्टेबल के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर एक विशेष न्यायाधीश को फोन किया और पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का निजी सचिव, फिर वही जज बताकर जमानत देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी माना है। सजा की अवधि पर सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

Samant Dubey26 अग. 2026, 05:06 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर जमानत दिलाने की कोशिश, सुकेश चंद्रशेखर दोषी करार

यह मामला अप्रैल 2017 का है। उस समय सुकेश चंद्रशेखर एक भ्रष्टाचार मामले में पुलिस हिरासत में था। अभियोजन के अनुसार, उसने अपनी निगरानी में तैनात कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल की और इसी फोन से उस समय भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई कर रहीं विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी से संपर्क किया। आरोप के मुताबिक, फोन पर पहले एक व्यक्ति ने खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक तत्कालीन जज का निजी सचिव बताया। इसके बाद दूसरे व्यक्ति ने खुद को वही सुप्रीम कोर्ट जज बताया। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से बात करने का दावा किया और सुकेश को जल्द से जल्द जमानत देने के लिए न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने की कोशिश की।

जज को कैसे हुआ शक?

विशेष न्यायाधीश को फोन पर किए गए दावे पर संदेह हुआ। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की। इसके बाद पता चला कि संबंधित जज के कार्यालय से ऐसा कोई फोन नहीं किया गया था और फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान भी गलत थी। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।अदालत के सामने अभियोजन ने न्यायिक अधिकारी की गवाही के साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कांस्टेबल के मोबाइल फोन तक सुकेश की पहुंच से जुड़े साक्ष्य भी रखे। अदालत ने इन साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना।

किन धाराओं में दोषी ठहराया गया?

तीस हजारी अदालत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) हर्षिता मिश्रा ने सुकेश को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी करार दिया।

  • धारा 170: लोक सेवक का रूप धारण करने से संबंधित अपराध।
  • धारा 189: लोक सेवक को नुकसान की धमकी देकर उसके काम को प्रभावित करने से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 507: गुमनाम संचार के माध्यम से आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान।

अदालत ने 20 अगस्त 2026 को दोषसिद्धि का आदेश दिया था। अब सजा की मात्रा पर 27 अगस्त को सुनवाई होनी है।

पुलिसकर्मी की भूमिका पर भी सवाल

मामले में अदालत ने केवल सुकेश की भूमिका पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि यह भी कहा कि जिस कांस्टेबल के मोबाइल फोन का कथित तौर पर इस्तेमाल हुआ, उसकी भूमिका की दोबारा जांच की जानी चाहिए। अदालत ने दिल्ली पुलिस को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि क्या पुलिसकर्मी ने फोन उपलब्ध कराने या कॉल करने में किसी तरह सहायता की थी। इसका मतलब यह नहीं है कि कांस्टेबल को इस मामले में दोषी घोषित कर दिया गया है। उसकी संभावित भूमिका की जांच अलग से की जानी है।

अदालत ने क्या टिप्पणी की?

अदालत ने इस घटना को न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की गंभीर कोशिश माना। अदालत के अनुसार, न्यायिक फैसले अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होते हैं, किसी गुप्त फोन कॉल या कथित पद की पहचान के आधार पर नहीं। अदालत ने यह भी माना कि सुकेश ने सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था के पद की प्रतिष्ठा का इस्तेमाल अपनी जमानत की कोशिश को प्रभावशाली बनाने के लिए किया।

मामले की आगे की कार्रवाई

सुकेश को दोषी ठहराए जाने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण सजा पर सुनवाई है। अदालत 27 अगस्त 2026 को यह तय करेगी कि दोषसिद्ध धाराओं के तहत उसे कितनी सजा दी जाए।इस बीच, 26 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार सुकेश ने इस दोषसिद्धि को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती भी दी है। उसकी याचिका में दोषसिद्धि को रद्द करने के साथ-साथ ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है।