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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का बड़ा फैसला: 4 हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, इन 4 जजों के नाम पर लगी मुहर
देश की न्यायपालिका में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के लिए नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की सिफारिश कर दी है। 6 अगस्त 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में जस्टिस वी. कामेश्वर राव, जस्टिस रविंद्र वी. घुगे, जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के नामों की सिफारिश की गई। खास बात यह है कि इनमें दो जज उस समय Acting Chief Justice की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हालांकि, अभी इसे अंतिम नियुक्ति नहीं माना जा सकता—कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

नई दिल्ली।
देश की न्यायपालिका से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए चार वरिष्ठ जजों के नामों की सिफारिश की है। कॉलेजियम की 6 अगस्त 2026 को हुई बैठक में ये सिफारिशें की गईं। जिन चार हाईकोर्ट के लिए नाम सुझाए गए हैं, उनमें पटना, कलकत्ता, बॉम्बे और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट शामिल हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि इसकी पुष्टि केवल मीडिया रिपोर्टों से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक Collegium Resolution से भी होती है। आधिकारिक रिकॉर्ड में चारों जजों के नाम और संबंधित हाईकोर्ट का स्पष्ट उल्लेख है। हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना बेहद महत्वपूर्ण है। अभी इन जजों की अंतिम नियुक्ति नहीं हुई है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नियुक्ति के लिए सिफारिश की है। इसके बाद निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी।
किन चार जजों के नाम की हुई सिफारिश?
कॉलेजियम ने चार अलग-अलग हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए चार जजों के नाम सुझाए हैं।
जस्टिस वी. कामेश्वर राव — पटना हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यानी उनकी प्रस्तावित पदोन्नति दिल्ली हाईकोर्ट से पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में होगी।
जस्टिस रविंद्र वी. घुगे — कलकत्ता हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस रविंद्र वी. घुगे के नाम की सिफारिश कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए की गई है। यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के Acting Chief Justice के रूप में कार्य कर रहे थे।
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी — बॉम्बे हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने पर वे इलाहाबाद हाईकोर्ट से बॉम्बे हाईकोर्ट जाएंगे।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा — पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के नाम की सिफारिश उसी हाईकोर्ट के नियमित चीफ जस्टिस पद के लिए की गई है। उनका Parent High Court इलाहाबाद हाईकोर्ट है। जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के मामले में भी एक खास पहलू है। वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के Acting Chief Justice के रूप में कार्यरत थे। अब कॉलेजियम ने उन्हें उसी हाईकोर्ट का नियमित मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है।
किस हाईकोर्ट के लिए किस जज का नाम?
जस्टिस वी. कामेश्वर राव — दिल्ली हाईकोर्ट से पटना हाईकोर्ट
जस्टिस रविंद्र वी. घुगे — बॉम्बे हाईकोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी — इलाहाबाद हाईकोर्ट से बॉम्बे हाईकोर्ट
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा — पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस
सात हाईकोर्ट अभी भी नियमित चीफ जस्टिस के इंतजार में
कॉलेजियम की ताजा सिफारिशों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 10 अगस्त 2026 तक देश के 25 हाईकोर्ट में से सात हाईकोर्ट नियमित चीफ जस्टिस के बिना काम कर रहे थे। इन हाईकोर्ट में Acting Chief Justices के जरिए कामकाज चलाया जा रहा था।
यानी चार हाईकोर्ट के लिए ताजा सिफारिशों के बावजूद नियमित Chief Justice की नियुक्ति का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में अन्य हाईकोर्ट के लिए भी कॉलेजियम की ओर से नामों की सिफारिश की जा सकती है।
Acting Chief Justices की समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं होगी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ताजा सिफारिशों के बावजूद हाईकोर्ट में नियमित मुख्य न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा पूरी तरह खत्म होने वाला नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 10 अगस्त 2026 तक सात हाईकोर्ट नियमित चीफ जस्टिस के बिना काम कर रहे थे। इसके अलावा 2026 के दौरान कई मौजूदा हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के सेवानिवृत्त होने की संभावना है। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति, तबादले और नई सिफारिशों से जुड़े और फैसले सामने आ सकते हैं।
रविंद्र वी. घुगे और अश्वनी कुमार मिश्रा के मामलों पर खास नजर
ताजा सिफारिशों में जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के नाम खास तौर पर ध्यान खींचते हैं। जस्टिस रविंद्र वी. घुगे उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के Acting Chief Justice के रूप में काम कर रहे थे। अब उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का Chief Justice बनाने की सिफारिश की गई है। वहीं जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के Acting Chief Justice के रूप में कार्यरत थे। कॉलेजियम ने उन्हें उसी हाईकोर्ट का नियमित Chief Justice बनाने की सिफारिश की है। इसका मतलब है कि इन सिफारिशों का असर केवल नए Chief Justices की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित हाईकोर्ट में आगे Acting Chief Justice या अन्य प्रशासनिक बदलाव की जरूरत भी पैदा हो सकती है।
कॉलेजियम की बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत कर रहे हैं। कॉलेजियम में उनके साथ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा शामिल हैं। पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 की बैठक में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया।
सिर्फ चीफ जस्टिस ही नहीं, ट्रांसफर पर भी फैसला
6 अगस्त 2026 की Collegium proceedings में केवल चार हाईकोर्ट के Chief Justice पदों के लिए सिफारिश ही नहीं की गई। इसी अवधि में हाईकोर्ट जजों के तबादले से संबंधित अलग सिफारिशें भी सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस मानस रंजन पाठक को गुजरात हाईकोर्ट और जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की सिफारिश की गई है। इससे साफ है कि Collegium की 6 अगस्त की बैठक हाईकोर्ट में नेतृत्व और जजों की तैनाती से जुड़े कई महत्वपूर्ण न्यायिक प्रशासनिक फैसलों के लिहाज से अहम रही।
ओडिशा हाईकोर्ट में जजों की कमी भी बड़ा मुद्दा
रिपोर्टों के मुताबिक ओडिशा हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या 33 है, जबकि उस समय वहां 17 जज कार्यरत थे। प्रस्तावित तबादलों के बाद वहां कार्यरत जजों की संख्या और कम हो सकती है। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आता है कि एक हाईकोर्ट में प्रशासनिक जरूरत के तहत जज का तबादला होने पर दूसरे हाईकोर्ट की judicial strength पर उसका क्या असर पड़ेगा। हाईकोर्ट में लंबित मामलों और न्यायिक क्षमता को देखते हुए जजों की पर्याप्त संख्या लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
2026 में आगे भी हो सकती हैं कई बड़ी नियुक्तियां
हाईकोर्ट Chief Justices की नियुक्तियों का यह मामला आने वाले महीनों में भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। कुछ मौजूदा Chief Justices के रिटायरमेंट के कारण आने वाले समय में और पद खाली हो सकते हैं। इसलिए चार हाईकोर्ट के लिए हुई ताजा सिफारिश को केवल एक isolated appointment exercise के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह हाईकोर्ट में नेतृत्व संबंधी रिक्तियों को भरने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश अपने आप में अंतिम नियुक्ति नहीं होती। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद मामला केंद्र सरकार के स्तर पर आगे बढ़ता है और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद ही संबंधित जज औपचारिक रूप से Chief Justice का पद संभालते हैं। इसलिए फिलहाल सही शब्दावली यह है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार जजों को चार हाईकोर्ट का Chief Justice बनाने की सिफारिश की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
हाईकोर्ट के Chief Justice की भूमिका केवल न्यायिक मामलों की सुनवाई तक सीमित नहीं होती। वे हाईकोर्ट के प्रशासन, बेंचों के गठन, मामलों के आवंटन और न्यायिक कामकाज के व्यापक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे समय में जब कई हाईकोर्ट नियमित Chief Justice के बिना काम कर रहे हैं और आने वाले महीनों में कुछ और Chief Justices के रिटायर होने की संभावना है, चार हाईकोर्ट के लिए नए नामों की सिफारिश न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। सबसे अहम बात यह है कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। अब इन सिफारिशों पर केंद्र सरकार और उसके बाद राष्ट्रपति की संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम नियुक्तियां प्रभावी होंगी।
