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हाईवे सेक्टर में निवेश बढ़ाने की तैयारी, निजी कंपनियों के लिए खुले अवसर l

केंद्र सरकार ने देश में हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का फोकस एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे, बड़े शहरों के रिंग रोड और बाईपास, तटीय सड़कों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों की कनेक्टिविटी तथा औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी सड़क परियोजनाओं पर है। सरकार का उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने के साथ हाईवे क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा करना है। निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए PPP मॉडल में सुधार, National Highways के TOT मॉडल के जरिए मुद्रीकरण, Public InvIT और निवेशक सम्मेलन जैसी पहल की गई हैं। BOT परियोजनाओं के नियमों में भी बदलाव कर निवेशकों और lenders के हितों की सुरक्षा, अनुबंधों में स्पष्टता और विवादों के तेज समाधान पर जोर दिया गया है।

Kashish Rai12 अग. 2026, 08:32 PM IST
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हाईवे सेक्टर में निवेश बढ़ाने की तैयारी, निजी कंपनियों के लिए खुले अवसर l

केंद्र सरकार देश के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ इस क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार नई पहल कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। सरकार का उद्देश्य देश में आधुनिक, तेज और बेहतर कनेक्टिविटी वाला सड़क नेटवर्क तैयार करना है, जिससे यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी मजबूती मिले।


सरकार ने हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए Access Controlled National High Speed Corridors और Expressways के निर्माण पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है। इसके अलावा एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में रिंग रोड और बाईपास विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इनमें पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे बड़े शहरों में ट्रैफिक दबाव कम करने और शहरों के भीतर अनावश्यक भारी यातायात को बाहर निकालने में मदद मिलेगी।


सरकार का फोकस तटीय सड़कों के विकास और बंदरगाहों की बेहतर कनेक्टिविटी पर भी है। इसके साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय की प्राथमिकताओं के अनुसार हवाई अड्डों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने तथा National Industrial Corridor Development Corporation यानी NICDC की प्राथमिकताओं के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों और नोड्स को मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश में माल और लोगों की आवाजाही को तेज और अधिक कुशल बनाना है।


बेहतर हाईवे कनेक्टिविटी का सीधा फायदा देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मिलने की उम्मीद है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और प्रमुख शहरों के बीच माल की आवाजाही आसान होगी। इससे यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने तथा व्यापारिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है। हाईवे क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने Public Private Partnership यानी PPP Projects के Model Concession Agreement में सुधार किए हैं। इसके अलावा National Highways के मुद्रीकरण के लिए Toll Operate and Transfer यानी TOT मॉडल से जुड़े मॉडल कॉन्ट्रैक्ट में भी बदलाव किए गए हैं। सरकार ने Public InvIT की शुरुआत करके निवेशकों के लिए हाईवे क्षेत्र में निवेश के दायरे को और व्यापक बनाने का प्रयास किया है।


निजी क्षेत्र की चिंताओं को समझने और निवेश के अवसरों की जानकारी देने के लिए concessionaires, financiers और प्रमुख सरकारी संस्थाओं के साथ Stakeholder Conferences भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य निजी निवेशकों को हाईवे परियोजनाओं की संभावनाओं से परिचित कराना और निवेश से जुड़ी उनकी समस्याओं का समाधान करना है। सरकार ने National Highways की Build-Operate-Transfer यानी BOT परियोजनाओं से जुड़े Standard Bidding और Concession Documents में भी कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य निजी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना, अनुबंधों को स्पष्ट बनाना और परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना है।


नए प्रावधानों के तहत Bidder Eligibility को बढ़ाया गया है। अब Fund Houses को भी उनकी वित्तीय क्षमता के आधार पर परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति दी गई है। हालांकि, परियोजना मिलने के बाद उन्हें निर्माण कार्य के लिए आवश्यक तकनीकी अनुभव रखने वाले EPC Contractors को नियुक्त करना होगा। इससे अधिक वित्तीय संस्थाओं और निवेशकों के लिए हाईवे परियोजनाओं में भागीदारी का रास्ता खुल सकता है। सरकार ने पिछले अनुभवों और विभिन्न मुकदमों से मिली सीख के आधार पर अनुबंधों में भी कई बदलाव किए हैं। Change in Ownership, Target Traffic, Damages, Compensation for Breach of Agreement, Force Majeure Costs, Construction Support, Annual Passes और Change of Scope जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों को संशोधित किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य अनुबंध की व्याख्या से जुड़े विवादों को कम करना और सभी पक्षों के अधिकार एवं जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट बनाना है।


परियोजना की Commercial Operation Date यानी COD से पहले Termination Compensation से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रावधान भी जोड़ा गया है। यदि परियोजना की भौतिक प्रगति 20 प्रतिशत या उससे अधिक हो चुकी है, तो COD से पहले समाप्ति की स्थिति में Termination Compensation के भुगतान का प्रावधान होगा। इससे concessionaire और lenders दोनों के हितों की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी। Debt Due के निर्धारण से जुड़े प्रावधानों को भी सरल बनाया गया है। इसका उद्देश्य मौजूदा अस्पष्टताओं को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि ऋण से संबंधित गणना और भुगतान व्यवस्था को लेकर निवेशकों तथा lenders के बीच अधिक स्पष्टता रहे।


विवादों के समाधान की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। सरकार ने Dispute Resolution Board को समाप्त करने का फैसला किया है। अब 10 करोड़ रुपये से कम मूल्य के विवादों को Arbitration के माध्यम से हल किया जाएगा, जबकि 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक के विवादों के लिए Conciliation या Mediation का रास्ता अपनाया जाएगा। इससे हाईवे परियोजनाओं में लंबे समय तक चलने वाले विवादों को कम करने और परियोजनाओं की वित्तीय एवं प्रशासनिक अनिश्चितता घटाने में मदद मिल सकती है। सरकार की इन पहलों का व्यापक उद्देश्य हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी पूंजी और विशेषज्ञता को आकर्षित करना है। सरकार चाहती है कि बेहतर नीतिगत ढांचे, स्पष्ट अनुबंध और जोखिम-साझेदारी की प्रभावी व्यवस्था के जरिए निजी निवेशकों का भरोसा बढ़े और देश में बड़े पैमाने पर सड़क परियोजनाओं को गति मिले।


कुल मिलाकर, एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड कॉरिडोर, रिंग रोड, बाईपास, तटीय सड़कें, बंदरगाह और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी तथा औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी परियोजनाओं के जरिए सरकार हाईवे नेटवर्क को देश की आर्थिक और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। साथ ही PPP, TOT, Public InvIT और BOT नियमों में सुधार से हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश के लिए अधिक आकर्षक और भरोसेमंद माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।