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2 लाख आंगनवाड़ी केंद्र बनेंगे सक्षम, पोषण ट्रैकर से होगी बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी
देश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों के पोषण स्तर में सुधार के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। सरकार का उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है, ताकि जरूरतमंद लाभार्थियों तक समय पर पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लीकेशन को एक आईसीटी आधारित निगरानी प्रणाली के रूप में लागू किया गया है। यह एप्लीकेशन देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की लगातार निगरानी और ट्रैकिंग में मदद कर रहा है। मंत्रालय ने बताया कि पोषण ट्रैकर तकनीक के माध्यम से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण की स्थिति की पहचान को आसान बनाया गया है। इसके जरिए बच्चों में लंबाई के अनुसार कम वृद्धि यानी स्टंटिंग, अत्यधिक कमजोरी यानी वेस्टिंग और कम वजन जैसी पोषण संबंधी समस्याओं का पता लगाया जा रहा है। पोषण ट्रैकर डैशबोर्ड पर बच्चों के पोषण संकेतकों से जुड़ी राज्यवार और वर्षवार जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को बनाया जाएगा सक्षम आंगनवाड़ी
सरकार ने आंगनवाड़ी सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की है। मिशन पोषण 2.0 के तहत सरकारी भवनों में संचालित दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी गई है। इन सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा यानी अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ECCE) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। इनमें डिजिटल शिक्षा के लिए एलईडी स्क्रीन, स्वच्छ पेयजल के लिए जल शुद्धिकरण व्यवस्था, पोषण वाटिका, प्रारंभिक बाल शिक्षा सामग्री और बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड (BaLA) पेंटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।
बच्चों और महिलाओं को उपलब्ध कराया जा रहा पूरक पोषण
मिशन पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-2 में निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार संचालित की जाती है। इसके तहत छह महीने से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को पोषण सहायता दी जाती है। लाभार्थियों को गर्म पका हुआ भोजन और घर ले जाने वाला राशन उपलब्ध कराया जाता है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों यानी Severe Acute Malnutrition (SAM) से प्रभावित बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण सहायता की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाया जा सके।
गंभीर कुपोषण से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ संयुक्त प्रयास
बच्चों में गंभीर कुपोषण को रोकने और उसका प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मिलकर बच्चों में कुपोषण प्रबंधन के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल जारी किया है। इस प्रोटोकॉल के माध्यम से गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार और निगरानी की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। सरकार का उद्देश्य कुपोषण से जुड़ी बीमारियों और मृत्यु दर को कम करना है।
डिजिटल सुविधाओं से मजबूत हो रही आंगनवाड़ी व्यवस्था
मिशन पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। उन्हें स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और डेटा रिचार्ज की सुविधा भी दी जा रही है। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थियों की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर पा रही हैं और पोषण सेवाओं की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से हो रही है। डिजिटल माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ी है और वास्तविक स्थिति का आकलन करना आसान हुआ है।
बच्चों की वृद्धि की नियमित निगरानी के लिए उपकरण उपलब्ध
बच्चों के शारीरिक विकास और पोषण स्तर की नियमित जांच के लिए प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इन उपकरणों की मदद से बच्चों का वजन और लंबाई नियमित रूप से मापी जाती है। इसमें शिशुओं की लंबाई मापने के लिए इंफेंटोमीटर, बच्चों की लंबाई मापने के लिए स्टेडियोमीटर, शिशुओं के वजन के लिए वेइंग स्केल और मां एवं बच्चे के वजन की जांच के लिए विशेष मशीनें शामिल हैं। इन उपकरणों से बच्चों में पोषण संबंधी समस्या की शुरुआती पहचान संभव हो रही है, जिससे समय पर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
घर-घर जाकर पोषण संबंधी सलाह दे रही हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अब केवल केंद्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे घर-घर जाकर भी पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध करा रही हैं। वे गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और तीन वर्ष तक के बच्चों के परिवारों से संपर्क कर उन्हें संतुलित आहार, बच्चों की देखभाल और शुरुआती विकास से जुड़ी जानकारी देती हैं। इस पहल का उद्देश्य परिवारों में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना और बच्चों के बेहतर विकास के लिए सही देखभाल को बढ़ावा देना है।
पोषण जागरूकता के लिए चलाए जा रहे जन आंदोलन
सरकार का कहना है कि कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए केवल योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लोगों की आदतों और व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से पोषण माह और पोषण पखवाड़ा जैसे जन जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। सितंबर में पोषण माह और मार्च-अप्रैल में पोषण पखवाड़ा आयोजित कर लोगों को संतुलित आहार, पोषण संबंधी आदतों और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इन अभियानों के माध्यम से समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और पोषण को जन आंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पोषण वाटिका से बढ़ेगी आहार विविधता
मिशन पोषण 2.0 के तहत देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य स्थानीय और मौसमी फल एवं सब्जियों के सेवन को बढ़ावा देना है। पोषण वाटिका के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को अधिक पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे भोजन में विविधता बढ़ेगी और शरीर के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होगी।
कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर सरकार
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की इन पहलों का उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाना है। डिजिटल पोषण ट्रैकर, सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र, ग्रोथ मॉनिटरिंग व्यवस्था, पोषण वाटिका और जन जागरूकता अभियान के माध्यम से सरकार बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रयास कर रही है। मिशन पोषण 2.0 के तहत सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर बच्चे, गर्भवती महिला और स्तनपान कराने वाली मां तक गुणवत्तापूर्ण पोषण सेवाएं पहुंचें और कुपोषण की चुनौती को प्रभावी तरीके से कम किया जा सके।
