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26 साल के युवक के पेट में मिला गर्भाशय l

दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित एक अस्पताल में 26 वर्षीय युवक के फर्टिलिटी टेस्ट के दौरान बेहद दुर्लभ मेडिकल स्थिति सामने आई। जांच में उसके पेट के अंदर गर्भाशय जैसी संरचना और दोनों फैलोपियन ट्यूब मौजूद मिलीं। जेनेटिक जांच में युवक का क्रोमोसोम पैटर्न 46,XY पाया गया और बाहरी शारीरिक विकास पुरुषों जैसा था। डॉक्टरों ने इसे परसिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम (PMDS) बताया है। युवक का स्पर्म काउंट भी शून्य था और दोनों अंडकोष पेट के अंदर पाए गए।

Kashish Rai10 सित. 2026, 06:56 PM IST
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26 साल के युवक के पेट में मिला गर्भाशय l

दिल्ली के राजौरी गार्डन के एक अस्पताल में फर्टिलिटी जांच के लिए पहुंचे 26 वर्षीय युवक के मामले ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। युवक की जांच के दौरान उसके पेट के अंदर गर्भाशय जैसी संरचना और फैलोपियन ट्यूब जैसी दो ट्यूब दिखाई दीं। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, उनके यहां इस तरह का यह पहला मामला सामने आया है। मामला तब सामने आया जब युवक फर्टिलिटी टेस्ट कराने अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने उसकी जांच शुरू की तो स्पर्म काउंट शून्य पाया गया। इसके बाद आगे की जांच के दौरान पेट और पेल्विक एरिया में असामान्य संरचनाएं दिखाई दीं।


मामले की जांच कर रहे डॉ. सुशील खरबंदा के मुताबिक, युवक की एमआरआई जांच में पेल्विक एरिया में गर्भाशय जैसी संरचना दिखाई दी। इसके साथ दो ऐसी ट्यूब भी नजर आईं, जो महिलाओं में पाई जाने वाली फैलोपियन ट्यूब जैसी थीं। स्थिति को स्पष्ट करने के लिए युवक का जेनेटिक टेस्ट कराया गया। जेनेटिक जांच में युवक का क्रोमोसोम पैटर्न 46,XY मिला, जो सामान्यतः पुरुषों में पाया जाता है। इसके अलावा युवक का बाहरी शारीरिक विकास भी पुरुषों जैसा ही था। यानी बाहर से वह सामान्य पुरुष दिखाई देता था, लेकिन शरीर के अंदर महिला प्रजनन तंत्र से जुड़ी संरचनाएं मौजूद थीं।

लैप्रोस्कोपी में हुई पुष्टि

मामले की पुष्टि के लिए डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपी की। इस प्रक्रिया के दौरान पेट के अंदर एक छोटा और पूरी तरह विकसित न हुआ गर्भाशय पाया गया। दोनों अंडकोष भी अपनी सामान्य जगह यानी अंडकोष की थैली में नहीं थे, बल्कि पेट के अंदर मौजूद थे। डॉक्टरों के लिए दोनों अंडकोष का पेट के अंदर होना भी चिंता का विषय था। लंबे समय तक पेट के अंदर रहने वाले अंडकोष में आगे चलकर कुछ जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए गर्भाशय जैसी संरचनाओं और दोनों अंडकोष को हटाने का फैसला किया।

क्या है Persistent Müllerian Duct Syndrome?

परसिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम (PMDS) एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति है। इसमें ऐसे व्यक्ति में, जिसके क्रोमोसोम पुरुषों वाले 46,XY होते हैं और जिसका बाहरी शारीरिक विकास पुरुषों जैसा होता है, शरीर के अंदर गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी मुलेरियन संरचनाएं बनी रह सकती हैं। सामान्य पुरुष भ्रूण विकास के दौरान एंटी-मुलेरियन हार्मोन (AMH) और उसके रिसेप्टर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि इस हार्मोन के बनने या उसके असर से जुड़ी आनुवंशिक गड़बड़ी हो, तो मुलेरियन संरचनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हो पातीं और शरीर के अंदर गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब जैसी संरचनाएं मौजूद रह सकती हैं। इस स्थिति का कई बार लंबे समय तक पता नहीं चलता। कुछ मामलों में इसका पता हर्निया, अंडकोष के नीचे न उतरने या पेट की किसी अन्य सर्जरी के दौरान चलता है। फर्टिलिटी से जुड़ी जांच भी इसके सामने आने का एक कारण हो सकती है।

फर्टिलिटी से भी जुड़ी समस्या

इस मामले में युवक अस्पताल फर्टिलिटी जांच के लिए आया था और उसका स्पर्म काउंट शून्य पाया गया। दोनों अंडकोष का पेट के अंदर होना भी उसकी प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। PMDS बेहद दुर्लभ स्थिति है और इसके मामलों की संख्या बहुत कम बताई जाती है। भारत में इसके मामलों का कोई व्यापक केंद्रीय रजिस्टर उपलब्ध नहीं है, हालांकि मेडिकल साहित्य में अलग-अलग केस रिपोर्ट प्रकाशित हुई हैं।