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GST में ‘फ्रॉड’ लिखकर नहीं बचा पाएंगे टैक्स की लिमिटेशन! सुप्रीम कोर्ट ने Tata Steel को दी बड़ी राहत
GST की कार्रवाई में सिर्फ बड़े-बड़े कानूनी शब्द लिख देना अब टैक्स विभाग के लिए काफी नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने Tata Steel के खिलाफ जारी GST Show Cause Notice को रद्द करते हुए साफ कर दिया कि Section 74 की extended limitation का फायदा लेने के लिए विभाग को केवल ‘fraud’, ‘willful misstatement’ या ‘suppression of facts’ का जिक्र नहीं, बल्कि इन आरोपों को साबित करने वाले बुनियादी तथ्य भी नोटिस में बताने होंगे। जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि ऐसे शब्दों को महज limitation बढ़ाने के लिए mechanically दोहराया नहीं जा सकता।

नई दिल्ली:
GST वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जिसका असर देशभर में Section 74 के तहत जारी होने वाले Show Cause Notices पर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि टैक्स विभाग सिर्फ ‘fraud’, ‘willful misstatement’ या ‘suppression of facts’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके सामान्य limitation period को बढ़ा नहीं सकता। अगर विभाग Section 74 के तहत कार्रवाई करना चाहता है तो Show Cause Notice में उन आरोपों के पीछे मौजूद foundational facts यानी बुनियादी तथ्यों को स्पष्ट रूप से बताना होगा। जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 25 अगस्त 2026 को Tata Steel Limited से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने Section 74 के तहत जारी SCN और उसके आधार पर पारित 26 दिसंबर 2025 के Order-in-Original को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का सीधा संदेश- सिर्फ कानूनी शब्दों की ‘रट’ नहीं चलेगी
कोर्ट ने कहा कि Section 74 में extended limitation का प्रावधान सामान्य limitation से अलग और गंभीर परिणाम वाला है। इसलिए सिर्फ नोटिस में ‘fraud’, ‘willful misstatement’ या ‘suppression of facts’ शब्द लिख देना पर्याप्त नहीं है। विभाग को नोटिस में यह दिखाना होगा कि आखिर कौन-से तथ्य छिपाए गए, किस तरह छिपाए गए और कथित tax short payment या गलत Input Tax Credit का उस alleged suppression या fraud से क्या संबंध है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि foundational facts नोटिस में ही दिखाई देने चाहिए। बाद की adjudication के दौरान उन बुनियादी तथ्यों को पहली बार खड़ा करके Section 74 की jurisdiction को सही नहीं ठहराया जा सकता।
Tata Steel का मामला कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा?
मामला Tata Steel के वित्तीय वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 से संबंधित था। CAG audit objections के बाद GST विभाग की ओर से कार्रवाई शुरू हुई। मुख्य मुद्दों में कथित Input Tax Credit mismatch और FY 2019-20 में tax short payment शामिल था। विभाग ने 13 जून 2025 को Section 74 के तहत Show Cause Notice जारी किया। Tata Steel ने इसका विरोध करते हुए कहा कि SCN में fraud, willful misstatement या suppression of facts के ऐसे specific facts नहीं बताए गए हैं जिनके आधार पर Section 74 की extended limitation लागू की जा सके। मामला पहले झारखंड हाईकोर्ट भी पहुंचा था। हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2026 को Tata Steel की चुनौती में हस्तक्षेप नहीं किया और statutory appellate remedy का रास्ता अपनाने को कहा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सबसे अहम सवाल था- Section 73 या Section 74?
इस मामले में limitation का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण था। Section 73 सामान्य तौर पर उन मामलों में लागू होता है जहां tax short payment, non-payment, erroneous refund या wrongful ITC का मामला हो, लेकिन fraud, willful misstatement या suppression of facts का आरोप statutory ingredients के रूप में मौजूद न हो।
दूसरी ओर Section 74 उन मामलों के लिए है जहां ऐसी tax liability fraud, willful misstatement या suppression of facts के कारण उत्पन्न हुई हो और tax evasion की मंशा से जुड़ी हो। इसी Section 74 में सामान्य व्यवस्था की तुलना में extended limitation उपलब्ध होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस extended limitation को हासिल करने के लिए विभाग को Section 74 की अनिवार्य शर्तों को वास्तविक तथ्यों से स्थापित करना होगा।
Section 74 को ‘limitation बचाने का रास्ता’ नहीं बनाया जा सकता
कोर्ट के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Section 74 को केवल limitation period बचाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मामले में Section 73 की सामान्य limitation समाप्त हो चुकी थी। इसलिए विभाग के लिए Section 74 की extended limitation महत्वपूर्ण थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि SCN में fraud या suppression के आरोपों को support करने वाले पर्याप्त foundational facts मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि GST कानून में ‘protective demand’ या ‘protective assessment’ के नाम पर ऐसी कार्रवाई का कोई वैधानिक आधार नहीं है।
Audit objection आया तो भी अधिकारी को खुद बनानी होगी संतुष्टि
फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू CAG audit objection से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल audit objection होने से Proper Officer की statutory satisfaction स्वतः स्थापित नहीं हो जाती। अधिकारी को खुद रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर अपना स्वतंत्र दिमाग लगाना होगा। इस मामले में विभाग ने audit objection को लेकर Public Accounts Committee के समक्ष भी अपना पक्ष रखा था और proceedings को कुछ समय के लिए ‘call book’ में रखा गया था। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को भी इस बात के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना कि अधिकारी की ओर से Section 74 के लिए आवश्यक independent satisfaction वास्तव में बनी थी या नहीं।
GST experts के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
GST practitioners के लिए इस फैसले का सबसे बड़ा संदेश यह है कि Section 74 के SCN की drafting अब सिर्फ statutory language दोहराने तक सीमित नहीं रह सकती। Indirect Tax professional और Chartered Accountant Nikhil Bhandari ने इस फैसले की analysis में भी इसी पहलू को रेखांकित किया है कि Section 74 का इस्तेमाल तभी टिकाऊ होगा जब notice में fraud, willful misstatement या suppression के factual foundation को सामने रखा गया हो। उनकी प्रकाशित analysis के अनुसार, audit objection अपने आप Proper Officer की independent satisfaction का विकल्प नहीं बन सकता। वहीं GST विशेषज्ञ CA Sandeep Kanoi की प्रकाशित analysis में भी इस फैसले को Section 74 notices में mechanical fraud/suppression allegations पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के रूप में बताया गया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि सिर्फ suppression की bland allegation extended limitation को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
केवल Tata Steel तक सीमित नहीं है मामला, G.R. Infra फैसला भी अहम
इस फैसले को और महत्वपूर्ण बनाता है सुप्रीम कोर्ट का हालिया G.R. Infra Projects Limited वाला फैसला। 19 अगस्त 2026 को जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने G.R. Infra Projects के मामले में भी Section 74 की extended limitation को लेकर इसी तरह का सिद्धांत अपनाया। वहां भी कोर्ट ने कहा कि fraud या concealment जैसे शब्दों को mechanically लिख देना पर्याप्त नहीं है; notice में उस निष्कर्ष तक पहुंचने वाली सामग्री और foundational facts दिखने चाहिए।
इस तरह अगस्त 2026 में एक ही पीठ के दो फैसले Section 74 के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट judicial approach सामने रखते हैं।
क्या अब हर Section 74 का नोटिस रद्द हो जाएगा?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह नहीं कहता कि Section 74 के तहत कार्रवाई ही नहीं की जा सकती। अगर विभाग के पास fraud, willful misstatement या suppression of facts से जुड़े वास्तविक और ठोस तथ्य हैं और वे तथ्य SCN में स्पष्ट रूप से बताए गए हैं, तो Section 74 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। समस्या तब होगी जब नोटिस में केवल statutory expressions लिखकर extended limitation का लाभ लेने की कोशिश की जाएगी। यानी सवाल यह नहीं है कि SCN में ‘suppression’ शब्द लिखा गया है या नहीं। असली सवाल यह है कि उस suppression को साबित करने वाले foundational facts क्या हैं।
Tata Steel को क्या राहत मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने Tata Steel के खिलाफ जारी Show Cause Notice और 26 दिसंबर 2025 के consequential Order-in-Original को set aside कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने विभाग के लिए पूरी तरह रास्ता बंद नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कानून के तहत extended period अभी उपलब्ध है तो विभाग fresh Section 74 proceedings शुरू कर सकता है, लेकिन नए notice में foundational facts स्पष्ट रूप से सामने आने चाहिए और निर्धारित समयसीमा के भीतर आदेश पारित करना होगा। रिपोर्टेड judgment के अनुसार यह अवधि 28 फरवरी 2027 तक उपलब्ध है।
कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा?
इस फैसले से GST taxpayers को Section 74 के SCN को चुनौती देने के लिए एक महत्वपूर्ण legal test मिल गया है।
किसी taxpayer को अब यह जांचने का आधार मिलेगा कि:
क्या SCN में fraud का specific factual basis बताया गया है?
क्या willful misstatement के पीछे के facts स्पष्ट हैं?
क्या suppression of facts का आरोप सिर्फ सामान्य भाषा में लगाया गया है?
क्या कथित suppression और tax short payment/ITC mismatch के बीच स्पष्ट संबंध बताया गया है?
क्या Proper Officer ने स्वतंत्र रूप से application of mind किया है?
क्या Section 74 का इस्तेमाल केवल limitation बचाने के लिए तो नहीं किया गया?
अगर इन सवालों के जवाब संतोषजनक नहीं हैं तो Section 74 की कार्रवाई न्यायिक जांच में कमजोर पड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्यापक असर
यह फैसला सिर्फ Tata Steel को मिली राहत तक सीमित नहीं है। इसका महत्व उन सभी GST मामलों में हो सकता है जहां विभाग सामान्य limitation समाप्त होने के बाद Section 74 की extended limitation का सहारा लेता है। सुप्रीम कोर्ट ने मूल रूप से यह सिद्धांत मजबूत किया है कि किसी कठोर statutory consequence को केवल कानूनी शब्दों की औपचारिक पुनरावृत्ति से लागू नहीं किया जा सकता। आरोप की factual foundation notice में ही दिखाई देनी चाहिए। यानी GST में अब ‘Fraud’, ‘Willful Misstatement’ और ‘Suppression of Facts’ सिर्फ तीन जादुई शब्द नहीं हैं। इन शब्दों के पीछे ठोस तथ्य, सामग्री और Proper Officer की वास्तविक application of mind भी दिखनी होगी।
