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Jharkhand Public Service Commission Exam पर SC का बड़ा कदम
JPSC Exam Controversy: झारखंड लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला Supreme Court पहुंच गया है। अदालत ने CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC और अन्य संबंधित पक्षों को Notice जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में OMR Sheets, Evaluation Process, CCTV Footage, Server Data और अन्य परीक्षा रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी CBI जांच या परीक्षा रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।

नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC, CBI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। यह याचिका परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत के सामने CBI जांच या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग रखी।
किस परीक्षा को लेकर है विवाद?
यह मामला Jharkhand Combined Civil Services Preliminary Examination 2025 से जुड़ा है, जिसे JPSC ने 19 अप्रैल 2026 को आयोजित किया था। याचिका में परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में ऐसी कथित अनियमितताएं हुईं, जिनकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से मामले की जांच राज्य एजेंसी के बजाय CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है।
OMR और Evaluation Process पर उठे सवाल
याचिका में केवल परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि OMR scanning, coding, evaluation और result-generation system की भी स्वतंत्र जांच और audit की मांग की गई है। इसके अलावा परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इनमें original OMR sheets, candidates की carbon copies, question papers, answer keys, attendance records, biometric records, CCTV footage, scanning records, server data और result-generation data जैसे दस्तावेज शामिल हैं।
वायरल OMR कॉपी से भी उठा विवाद
याचिका में एक सफल अभ्यर्थी की OMR answer sheet की कथित carbon copy के ऑनलाइन प्रसारित होने का भी उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, इस दस्तावेज को लेकर परीक्षा के मूल्यांकन पर सवाल उठे और इसी के आधार पर पूरी evaluation process की स्वतंत्र जांच की मांग की गई। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि छात्र कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, CJI सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि लगाए गए आरोपों की प्रकृति ऐसी है जिसमें केवल सामान्य inquiry के बजाय proper investigation और forensic examination की जरूरत पड़ सकती है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी आरोपों को सही नहीं माना है और न ही इस स्तर पर CBI जांच का अंतिम आदेश दिया है। नोटिस जारी होना न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण है, जिसमें संबंधित पक्ष अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे।
परीक्षा रद्द करने और दोबारा कराने की भी मांग
याचिका में कथित अनियमितताओं के अलावा परीक्षा रद्द कर दोबारा Preliminary Examination आयोजित कराने की मांग भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर पर्याप्त संदेह है, तो अभ्यर्थियों के हित में नए सिरे से परीक्षा कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि स्वतंत्र जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि परीक्षा प्रक्रिया में किन स्तरों पर गड़बड़ी हुई और किन अभ्यर्थियों पर इसका प्रभाव पड़ा।
छात्रों के आंदोलन से भी जुड़ा है मामला
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन भी हुआ है। हाल में छात्रों ने करीब 26 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन को स्थगित करते हुए राज्य सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए दो महीने का समय दिया था। इस पूरे विवाद ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की transparency, examination security और recruitment process को लेकर बहस तेज कर दी है।
अब आगे क्या होगा?
अब केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC, CBI और अन्य संबंधित पक्ष सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देंगे। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि मामले की जांच किस तरीके से आगे बढ़ाई जानी चाहिए और क्या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की जरूरत है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने JPSC परीक्षा विवाद पर संज्ञान लेते हुए जवाब मांगा है, लेकिन अभी CBI जांच या परीक्षा दोबारा कराने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। आगे की सुनवाई में मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।
