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MCA के रेस्टोरेंट लाइसेंस बहाल, FDA पर बरसा बॉम्बे हाईकोर्ट l
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन यानी MCA परिसर में चलने वाले पांच खाने-पीने के ठिकानों के फूड लाइसेंस निलंबित करने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट के निर्देश पर हुई दोबारा जांच में रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा नियमों का बड़े स्तर पर पालन मिला। इसके बाद अदालत ने लाइसेंस सस्पेंशन आदेश वापस लेने और रेस्टोरेंट्स को दोबारा खोलने की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FDA की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा सख्त बताते हुए कहा कि “मच्छर मारने के लिए तलवार मत चलाओ।
Kashish Rai30 अग. 2026, 02:11 PM IST

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन यानी MCA के परिसर में चलने वाले खाने-पीने के ठिकानों के फूड लाइसेंस निलंबित करने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन हर मामले में कार्रवाई उसकी गंभीरता के हिसाब से होनी चाहिए। महाराष्ट्र FDA ने MCA परिसर में चलने वाले पांच रेस्टोरेंट्स और खाने-पीने के ठिकानों की जांच की थी। इसके बाद 21 अगस्त को इनके फूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए। FDA की कार्रवाई के खिलाफ MCA ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और लाइसेंस निलंबन आदेश को चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA की जांच और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। कोर्ट ने 25 अगस्त को संबंधित खाने-पीने के ठिकानों की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि FDA अधिकारी दोबारा निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखें। जब तक नई रिपोर्ट नहीं आती, तब तक इन ठिकानों पर सीमित रूप से चाय और कॉफी उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद FDA अधिकारियों ने दोबारा निरीक्षण किया। नई जांच रिपोर्ट में MCA परिसर के रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा नियमों का बड़े स्तर पर पालन पाया गया। ताजा रिपोर्ट में करीब 88 प्रतिशत अनुपालन दर्ज किया गया, जबकि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने 98 से 99 प्रतिशत तक अनुपालन के बावजूद लाइसेंस निलंबित रखे जाने पर सवाल उठाया था।
नई रिपोर्ट सामने आने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को जारी किए गए सस्पेंशन आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि जब दोबारा जांच में रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन पाया गया है, तो लाइसेंस निलंबित रखने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने संबंधित रेस्टोरेंट्स को फिर से सामान्य रूप से काम शुरू करने की अनुमति दे दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA के अधिकारियों से यह भी पूछा कि उन्होंने कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन क्यों नहीं किया। बेंच ने अधिकारियों के रवैये को जरूरत से ज्यादा कठोर और व्यावहारिक दृष्टिकोण से दूर बताया। अदालत ने कहा कि प्रशासन को किसी भी मामले में सीधे सबसे बड़ी कार्रवाई करने के बजाय पहले कमी की गंभीरता समझनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “मच्छर मारने के लिए तलवार मत चलाओ।” कोर्ट का आशय था कि किसी छोटी या सुधार योग्य कमी के लिए लाइसेंस सस्पेंड करना या कारोबार पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है। अधिकारियों को नियम लागू करते समय संतुलित और व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए।
बेंच ने FDA के अधिकारियों से यह भी सवाल किया कि क्या वे खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी न तो कोर्ट के आदेशों को ठीक से समझ रहे हैं और न ही अपने ही नियमों को पढ़ रहे हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई कर देते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश सरल और स्पष्ट भाषा में लिखे जाते हैं, ताकि संबंधित अधिकारी उन्हें आसानी से समझ सकें। मामले में एक अन्य मुद्दा यह भी सामने आया कि MCA परिसर के रेस्टोरेंट्स का संचालन M/s Shirke Infrastructure नाम की तीसरी कंपनी कर रही थी, जबकि फूड लाइसेंस MCA के नाम पर जारी किए गए थे। FDA ने इस तकनीकी और संचालन संबंधी पहलू को भी लाइसेंस निलंबन का आधार बनाया था। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे की अलग से जांच की जा सकती है, लेकिन केवल इस आधार पर रेस्टोरेंट्स को बंद रखना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब खाद्य सुरक्षा नियमों का पर्याप्त पालन पाया गया है।
FDA ने अदालत को बताया कि वह MCA को नया नोटिस जारी करेगा और Shirke Infrastructure के साथ उसके अनुबंध से जुड़े मुद्दे पर MCA को अपना पक्ष रखने का अवसर देगा। इसके बाद FDA इस विषय पर कारण सहित नया आदेश जारी कर सकेगा। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को स्वीकार करते हुए फिलहाल लाइसेंस सस्पेंशन आदेश को हटा दिया। सुनवाई के अंत में अदालत ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक सुझाव भी दिया। कोर्ट ने कहा कि बड़े रेस्टोरेंट्स और खाने-पीने के ठिकानों के लिए अलग वेबपेज बनाए जा सकते हैं। इन वेबपेज पर ग्राहक सफाई, खाने की गुणवत्ता और स्वाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकें। अदालत का मानना था कि इससे ग्राहकों को अपनी शिकायत और राय दर्ज कराने का मंच मिलेगा। साथ ही, रेस्टोरेंट संचालकों को अपनी कमियों की जानकारी मिलेगी और वे समय रहते सुधार कर सकेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा नियमों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन कार्रवाई का उद्देश्य कारोबार बंद करना नहीं, बल्कि सुधार सुनिश्चित करना होना चाहिए।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद MCA परिसर के संबंधित रेस्टोरेंट्स के दोबारा खुलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा नियमों और लाइसेंस के संचालन से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर FDA की आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA की जांच और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। कोर्ट ने 25 अगस्त को संबंधित खाने-पीने के ठिकानों की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि FDA अधिकारी दोबारा निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखें। जब तक नई रिपोर्ट नहीं आती, तब तक इन ठिकानों पर सीमित रूप से चाय और कॉफी उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद FDA अधिकारियों ने दोबारा निरीक्षण किया। नई जांच रिपोर्ट में MCA परिसर के रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा नियमों का बड़े स्तर पर पालन पाया गया। ताजा रिपोर्ट में करीब 88 प्रतिशत अनुपालन दर्ज किया गया, जबकि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने 98 से 99 प्रतिशत तक अनुपालन के बावजूद लाइसेंस निलंबित रखे जाने पर सवाल उठाया था।
नई रिपोर्ट सामने आने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को जारी किए गए सस्पेंशन आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि जब दोबारा जांच में रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन पाया गया है, तो लाइसेंस निलंबित रखने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने संबंधित रेस्टोरेंट्स को फिर से सामान्य रूप से काम शुरू करने की अनुमति दे दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA के अधिकारियों से यह भी पूछा कि उन्होंने कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन क्यों नहीं किया। बेंच ने अधिकारियों के रवैये को जरूरत से ज्यादा कठोर और व्यावहारिक दृष्टिकोण से दूर बताया। अदालत ने कहा कि प्रशासन को किसी भी मामले में सीधे सबसे बड़ी कार्रवाई करने के बजाय पहले कमी की गंभीरता समझनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “मच्छर मारने के लिए तलवार मत चलाओ।” कोर्ट का आशय था कि किसी छोटी या सुधार योग्य कमी के लिए लाइसेंस सस्पेंड करना या कारोबार पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है। अधिकारियों को नियम लागू करते समय संतुलित और व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए।
बेंच ने FDA के अधिकारियों से यह भी सवाल किया कि क्या वे खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी न तो कोर्ट के आदेशों को ठीक से समझ रहे हैं और न ही अपने ही नियमों को पढ़ रहे हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई कर देते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश सरल और स्पष्ट भाषा में लिखे जाते हैं, ताकि संबंधित अधिकारी उन्हें आसानी से समझ सकें। मामले में एक अन्य मुद्दा यह भी सामने आया कि MCA परिसर के रेस्टोरेंट्स का संचालन M/s Shirke Infrastructure नाम की तीसरी कंपनी कर रही थी, जबकि फूड लाइसेंस MCA के नाम पर जारी किए गए थे। FDA ने इस तकनीकी और संचालन संबंधी पहलू को भी लाइसेंस निलंबन का आधार बनाया था। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे की अलग से जांच की जा सकती है, लेकिन केवल इस आधार पर रेस्टोरेंट्स को बंद रखना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब खाद्य सुरक्षा नियमों का पर्याप्त पालन पाया गया है।
FDA ने अदालत को बताया कि वह MCA को नया नोटिस जारी करेगा और Shirke Infrastructure के साथ उसके अनुबंध से जुड़े मुद्दे पर MCA को अपना पक्ष रखने का अवसर देगा। इसके बाद FDA इस विषय पर कारण सहित नया आदेश जारी कर सकेगा। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को स्वीकार करते हुए फिलहाल लाइसेंस सस्पेंशन आदेश को हटा दिया। सुनवाई के अंत में अदालत ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक सुझाव भी दिया। कोर्ट ने कहा कि बड़े रेस्टोरेंट्स और खाने-पीने के ठिकानों के लिए अलग वेबपेज बनाए जा सकते हैं। इन वेबपेज पर ग्राहक सफाई, खाने की गुणवत्ता और स्वाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकें। अदालत का मानना था कि इससे ग्राहकों को अपनी शिकायत और राय दर्ज कराने का मंच मिलेगा। साथ ही, रेस्टोरेंट संचालकों को अपनी कमियों की जानकारी मिलेगी और वे समय रहते सुधार कर सकेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा नियमों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन कार्रवाई का उद्देश्य कारोबार बंद करना नहीं, बल्कि सुधार सुनिश्चित करना होना चाहिए।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद MCA परिसर के संबंधित रेस्टोरेंट्स के दोबारा खुलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा नियमों और लाइसेंस के संचालन से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर FDA की आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।
