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PM मोदी ने शेयर किया संस्कृत का खास संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 सितंबर 2026 को संस्कृत का एक सुभाषित साझा किया, जिसमें अभयदान यानी भय से मुक्ति देने और जीवन की रक्षा जैसे मानवीय मूल्यों पर जोर दिया गया। इस संदेश में करुणा, सुरक्षा और दूसरों के जीवन के प्रति सम्मान की भावना को महत्वपूर्ण बताया गया है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 सितंबर 2026 को एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें अभयदान और जीवन की रक्षा जैसे मानवीय मूल्यों को प्रमुखता दी गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित PIB की आज की सूची में इस संदेश को प्रमुखता से शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित का मूल भाव दूसरों को भय से मुक्त करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जीवन के प्रति सम्मान रखने से जुड़ा है। भारतीय संस्कृत परंपरा में अभयदान को केवल किसी को डर से बचाने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि जरूरत के समय किसी व्यक्ति को सुरक्षा, भरोसा और संरक्षण देने के व्यापक मानवीय भाव से जोड़ा जाता है।
अभयदान का क्या है अर्थ?
'अभयदान' दो शब्दों से मिलकर बना है—'अभय' यानी भय का अभाव और 'दान' यानी देना। इसका अर्थ हुआ किसी को भय से मुक्ति या सुरक्षा प्रदान करना। भारतीय दर्शन और साहित्य में अभयदान को महत्वपूर्ण नैतिक गुण माना गया है। इसका संदेश यह है कि किसी कमजोर, असहाय या संकट में पड़े व्यक्ति को डर के बजाय सुरक्षा और भरोसा देना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने इसी मानवीय भावना को संस्कृत सुभाषित के माध्यम से सामने रखा है। इसका व्यापक संदेश करुणा, संवेदनशीलता और जीवन के सम्मान से जुड़ा हुआ है।
जीवन रक्षा पर जोर
सुभाषित का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष जीवन रक्षा है। किसी व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना भारतीय नैतिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस विचार का व्यापक अर्थ यह है कि मनुष्य को केवल अपने हित के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की सहायता और सुरक्षा के लिए भी आगे आना चाहिए। जीवन के प्रति सम्मान और दूसरे व्यक्ति की सुरक्षा की भावना सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करती है।
संस्कृत सुभाषित के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर संस्कृत के सुभाषित और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विचार साझा करते रहे हैं। ऐसे संदेशों के माध्यम से प्राचीन भारतीय साहित्य में मौजूद नैतिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों को वर्तमान संदर्भ से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है। 2 सितंबर के संदेश में भी किसी राजनीतिक या आर्थिक विषय के बजाय मानवीय मूल्यों और जीवन की सुरक्षा पर जोर दिखाई देता है। PIB की सूची में इसे प्रधानमंत्री कार्यालय की रिलीज के रूप में दर्ज किया गया है।
समाज के लिए क्या है संदेश?
अभयदान और जीवन रक्षा की भावना का महत्व आज के सामाजिक संदर्भ में भी देखा जा सकता है। समाज में जब लोग एक-दूसरे की सुरक्षा, सम्मान और सहायता के प्रति संवेदनशील होते हैं, तो आपसी विश्वास मजबूत होता है। इस दृष्टि से सुभाषित का संदेश केवल धार्मिक या साहित्यिक संदर्भ तक सीमित नहीं है। इसे मानवीय जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनशीलता के रूप में भी समझा जा सकता है।
भारतीय परंपरा में 'अभय' की अवधारणा
भारतीय परंपरा में 'अभय' का विचार व्यापक रूप से मिलता है। इसका संबंध निडरता के साथ-साथ दूसरों को भयमुक्त वातावरण देने से भी है। किसी व्यक्ति को यह भरोसा देना कि वह सुरक्षित है और आवश्यकता पड़ने पर उसे सहायता मिलेगी, सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह जीवन रक्षा का विचार मानव जीवन के मूल्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की भावना को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस खबर का शीर्षक “प्रधानमंत्री ने अभयदान और जीवन रक्षा के गुणों को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया” दिया गया है। उसी दिन की सूची में AIIMS रायपुर, भारत-अफगानिस्तान व्यापार, EPF योजना और बाघ संरक्षण जैसी अन्य प्रमुख सरकारी गतिविधियों से जुड़ी खबरें भी शामिल हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषित अभयदान, जीवन की रक्षा, करुणा और मानवीय संवेदना जैसे मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा के उन विचारों को सामने लाता है, जिनमें दूसरों की सुरक्षा और जीवन के सम्मान को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
