government

Pune Ring Road: जमीन अधिग्रहण पर प्रशासन सख्त

पुणे में Inner Ring Road परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन ने 31 अगस्त तक अधिग्रहण से जुड़े मामले जमा करने, 10 सितंबर से जमीन का सर्वे शुरू करने और 10 अक्टूबर तक बाजार दर तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

Neha Sharma29 अग. 2026, 02:56 PM IST
खबर शेयर करें:
Pune Ring Road: जमीन अधिग्रहण पर प्रशासन सख्त

पुणे: प्रस्तावित Inner Ring Road परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों को तय समयसीमा में आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सभी भूमि अधिग्रहण मामलों को 31 अगस्त 2026 तक जिला प्रशासन के सामने प्रस्तुत करने, संबंधित जमीन का 10 सितंबर तक सर्वे और माप शुरू करने तथा 10 अक्टूबर तक जमीन की बाजार दर तय करने के लिए बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।



जिला प्रशासन ने तय की तीन चरणों की समयसीमा

पुणे कलेक्टरेट में शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टर जितेंद्र डूडी और पुणे महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने Inner Ring Road के लिए जरूरी जमीन की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में भूमि की उपलब्धता, लंबित अधिग्रहण मामलों, प्रभावित जमीन मालिकों का विवरण, सरकारी जमीन की उपलब्धता, लंबित दस्तावेज और अधिग्रहण प्रक्रिया में आ रही बाधाओं पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिग्रहण से जुड़े सभी लंबित दस्तावेज पूरे किए जाएं और संबंधित प्रस्ताव 31 अगस्त तक जिला प्रशासन को सौंपे जाएं। प्रशासन का उद्देश्य है कि अलग-अलग विभागों के स्तर पर लंबित मामलों को जल्द निपटाया जाए और परियोजना के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।


10 सितंबर से जमीन का सर्वे और माप

भूमि अधिग्रहण मामलों को जमा करने के बाद अगला चरण जमीन की वास्तविक माप और सर्वे का होगा। अधिकारियों को 10 सितंबर 2026 से संबंधित जमीन का सर्वे शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इस दौरान जमीन की भौतिक माप, नक्शे और परियोजना के लिए आवश्यक तकनीकी दस्तावेज तैयार किए जाएंगे। प्रशासन चाहता है कि सर्वे और अन्य तकनीकी काम भी तय समयसीमा के भीतर पूरे हों, ताकि भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया में देरी न हो।


10 अक्टूबर तक जमीन की बाजार दर पर बैठक

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में जमीन की कीमत या बाजार दर तय करना भी महत्वपूर्ण चरण है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को 10 अक्टूबर तक जमीन की बाजार दर और लागू दरों पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित करने को कहा है। अधिकारियों को बैठक से पहले आवश्यक आंकड़े, जमीन से जुड़े दस्तावेज और प्रस्ताव तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य बाजार मूल्य से संबंधित प्रक्रिया को समय पर आगे बढ़ाना है।


सरकारी जमीन की उपलब्धता भी जांची गई

समीक्षा बैठक में केवल निजी जमीन के अधिग्रहण पर ही चर्चा नहीं हुई। अधिकारियों ने Inner Ring Road के लिए उपलब्ध सरकारी जमीन की स्थिति की भी समीक्षा की। इसके अलावा प्रभावित जमीन मालिकों का विवरण, अधिग्रहण के लंबित मामले और अलग-अलग स्तर पर अटके दस्तावेजों की जानकारी भी ली गई। जिन मामलों में विभागीय स्तर पर समाधान संभव है, उन्हें वहीं निपटाने और जिन मामलों में वरिष्ठ स्तर के हस्तक्षेप की जरूरत है, उन्हें तुरंत ऊपर भेजने के निर्देश दिए गए।


PMRDA, PMC और राजस्व विभाग मिलकर करेंगे काम

भूमि अधिग्रहण की इस प्रक्रिया में Pune Metropolitan Region Development Authority (PMRDA), Pune Municipal Corporation (PMC), भूमि अधिग्रहण विभाग, राजस्व विभाग और परियोजना से जुड़ी कंसल्टिंग एजेंसी शामिल हैं। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और प्रगति रिपोर्ट के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि तय समयसीमा के बावजूद कोई मामला अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।


Inner Ring Road क्यों है महत्वपूर्ण?

PMRDA के अनुसार Pune Inner Ring Road का उद्देश्य शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना और पुणे तथा आसपास के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी तैयार करना है। PMRDA की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक परियोजना की प्रस्तावित लंबाई 83.12 किलोमीटर और चौड़ाई 65 मीटर है। परियोजना के प्रशासनिक अनुमोदन की लागत ₹14,200 करोड़ बताई गई है। इसमें 2 Railway Over Bridges, 11 टनल, 17 बड़े पुल और 9 इंटरचेंज प्रस्तावित हैं। इस सड़क का उद्देश्य भारी और बाहरी यातायात को शहर के भीतरी हिस्सों से हटाकर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना भी है। PMRDA के मुताबिक इससे यातायात दबाव कम करने के साथ शहर के आसपास के क्षेत्रों के नियोजित विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


भूमि अधिग्रहण में तेजी क्यों जरूरी?

किसी बड़े सड़क प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले आवश्यक जमीन उपलब्ध होना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होता है। जमीन से जुड़े मामलों में देरी होने पर निर्माण और आगे की परियोजना गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से जिला प्रशासन ने इस बार भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए अलग-अलग चरणों की समयसीमा तय की है। अधिकारियों को लंबित मामलों को तेजी से निपटाने और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं करने को कहा गया है।


प्रशासन का स्पष्ट संदेश अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं

समीक्षा बैठक में कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। विभागीय स्तर पर हल होने वाले मामलों को वहीं सुलझाने और उच्च स्तर के हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले मामलों को तुरंत प्रशासन के संज्ञान में लाने को कहा गया है। अब 31 अगस्त, 10 सितंबर और 10 अक्टूबर की समयसीमाएं इस परियोजना के भूमि अधिग्रहण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव होंगी। यदि प्रशासन द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो Inner Ring Road के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने के काम में तेजी आने की उम्मीद है।