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RailOne App की रफ्तार तेज, 4.76 करोड़ डाउनलोड l

भारतीय रेलवे के RailOne App ने डिजिटल रेल सेवाओं में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 2 अगस्त 2026 तक ऐप को 4.76 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसके जरिए रोजाना औसतन करीब 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं। RailOne पर रोजाना लगभग 2.79 लाख आरक्षित और 7.24 लाख अनारक्षित टिकट बुक हो रहे हैं। ऐप में आरक्षित, अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट बुकिंग के साथ ट्रेन की जानकारी, PNR Enquiry, RailMadad और अन्य प्रमुख रेलवे सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इससे यात्रियों को अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने और कई पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं रहती। इसके साथ ही National Train Enquiry System यानी NTES रोजाना 6 करोड़ से अधिक पूछताछ संभाल रहा है और करीब 80,000 यूजर्स एक साथ इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से रेलवे पूछताछ काउंटरों पर भीड़ और यात्रियों का इंतजार कम हुआ है।

Kashish Rai12 अग. 2026, 08:32 PM IST
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RailOne App की रफ्तार तेज, 4.76 करोड़ डाउनलोड l

भारतीय रेलवे की डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में RailOne App तेजी से यात्रियों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि 2 अगस्त 2026 तक RailOne App के 4.76 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। ऐप के माध्यम से रोजाना औसतन करीब 10 लाख टिकट बुकिंग हो रही है, जो रेलवे की डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है।


RailOne App को भारतीय रेलवे ने 1 जुलाई 2025 को लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य यात्रियों को रेलवे की अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की परेशानी से मुक्त करना है। इस ऐप में आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन संबंधी जानकारी, PNR जांच, RailMadad और कई अन्य यात्री सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। रेलवे के अनुसार, RailOne का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्री Single Sign-On (SSO) सुविधा के जरिए एक ही लॉगिन से कई सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे यात्रियों को अलग-अलग रेलवे ऐप डाउनलोड करने और उनके अलग-अलग पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी टिकट बुकिंग से लेकर ट्रेन की जानकारी और यात्री सहायता तक कई सुविधाएं एक ही मोबाइल ऐप में मिल जाती हैं।


2 अगस्त 2026 तक RailOne पर रोजाना औसतन करीब 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे थे। इनमें लगभग 2.79 लाख आरक्षित टिकट और करीब 7.24 लाख अनारक्षित टिकट शामिल हैं। इससे पता चलता है कि यात्री केवल लंबी दूरी के आरक्षित टिकटों के लिए ही नहीं, बल्कि अनारक्षित यात्रा और प्लेटफॉर्म संबंधी सेवाओं के लिए भी डिजिटल माध्यम को तेजी से अपना रहे हैं। रेलवे की डिजिटल व्यवस्था में National Train Enquiry System यानी NTES भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2000 में शुरू किया गया NTES यात्रियों को ट्रेन के चलने की लगभग रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है। 


इसके जरिए यात्री ट्रेन के आने-जाने का समय, ट्रेन का शेड्यूल, किसी स्टेशन पर ट्रेन की स्थिति और दो स्टेशनों के बीच चलने वाली ट्रेनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। NTES की सेवाएं रेलवे पूछताछ काउंटरों के अलावा वेबसाइट, Android और iOS मोबाइल ऐप तथा रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 के जरिए उपलब्ध हैं। इसके प्रमुख फीचर्स में ‘Spot Your Train’, ‘Live Station’, ‘Train Schedule’ और ‘Trains Between Stations’ शामिल हैं। इन सुविधाओं से यात्रियों को ट्रेन से जुड़ी विश्वसनीय और ताजा जानकारी आसानी से मिल जाती है। 


1 अगस्त 2026 तक NTES के Android ऐप के 4.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके थे, जबकि iOS ऐप के करीब 16 लाख डाउनलोड दर्ज किए गए। NTES फिलहाल एक साथ करीब 80,000 यूजर्स को संभाल रहा है और रोजाना 6 करोड़ से अधिक पूछताछ को प्रोसेस कर रहा है। रेलवे के अनुसार, यात्रियों ने इस डिजिटल व्यवस्था को सामान्य तौर पर काफी सराहा है। NTES के व्यापक इस्तेमाल का सीधा असर रेलवे के पूछताछ काउंटरों पर भी दिखाई दे रहा है। यात्रियों को ट्रेन की स्थिति, समय और शेड्यूल जैसी जानकारी ऑनलाइन मिलने के कारण उन्हें छोटी-छोटी जानकारियों के लिए रेलवे पूछताछ काउंटरों पर जाने की जरूरत कम हो गई है। इससे काउंटरों पर कतार और प्रतीक्षा समय कम करने में मदद मिली है।


रेलवे की ऑनलाइन टिकटिंग व्यवस्था में ट्रेन रद्द होने की स्थिति में यात्रियों के लिए ऑटोमैटिक रिफंड की सुविधा भी उपलब्ध है। ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकट की ट्रेन रद्द होने पर NGeT यानी Next Generation E-Ticketing सिस्टम निर्धारित प्रस्थान समय के बाद रिफंड की प्रक्रिया अपने आप शुरू कर देता है और लागू राशि यात्री के बैंक खाते में वापस भेज दी जाती है। हालांकि यह सुविधा फिलहाल केवल ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकट के लिए उपलब्ध है। काउंटर से खरीदे गए टिकट के मामले में यात्री को संबंधित PRS काउंटर पर जाकर प्रक्रिया पूरी करनी होती है।


रेलवे ने बताया कि वर्तमान में लगभग 89 प्रतिशत आरक्षित टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा करीब 49 प्रतिशत था। इसी तरह अनारक्षित टिकटों की बुकिंग में भी डिजिटल और गैर-काउंटर माध्यमों का इस्तेमाल बढ़कर करीब 39 प्रतिशत हो गया है। RailOne App को भारतीय रेलवे का आधिकारिक ऐप बताया गया है, जिसमें यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा योजना, ट्रेन की जानकारी, यात्री सहायता और अन्य रेलवे सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं। रेलवे की डिजिटल सेवाओं का यह विस्तार यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और कम समय में सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे लगातार डिजिटल माध्यमों को मजबूत कर रहा है। RailOne और NTES जैसी सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से स्पष्ट है कि भारतीय रेलवे में टिकटिंग और यात्री सूचना सेवाएं तेजी से डिजिटल और मोबाइल आधारित होती जा रही हैं।